हिंदी साहित्य के विकास में बिहार का ऐतिहासिक योगदान : प्रो. मैनेजर पांडेय
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 01 Dec 2018 10:43 PM
नयी दिल्ली: वरिष्ठ साहित्यकार एवं समालोचक मैनेजर पांडेय ने शनिवार को कहा कि हिंदी साहित्य के विकास में बिहार का ऐतिहासिक योगदान रहा है. हिंदी के आदिकवि सरहपा बिहार के नालंदा विश्वविद्यालय के आचार्य थे. उनकी विद्रोही चेतना का प्रभाव आगे चलकर हिंदी के निर्गुण भक्तकवि कबीर की रचनाओं पर भी दिखता है. उन्होंने कहा […]
नयी दिल्ली: वरिष्ठ साहित्यकार एवं समालोचक मैनेजर पांडेय ने शनिवार को कहा कि हिंदी साहित्य के विकास में बिहार का ऐतिहासिक योगदान रहा है. हिंदी के आदिकवि सरहपा बिहार के नालंदा विश्वविद्यालय के आचार्य थे. उनकी विद्रोही चेतना का प्रभाव आगे चलकर हिंदी के निर्गुण भक्तकवि कबीर की रचनाओं पर भी दिखता है. उन्होंने कहा कि आदिकालीन कवि विद्यापति भी बिहार के थे जिनका प्रभाव सूरदास पर दिखता है.
पांडेय ने साहित्यिक पत्रिका ‘नई धारा’ द्वारा यहां आयोजित 14वें उदयराज सिंह स्मृति व्याख्यान में यह बात कही. व्याख्यान का विषय ‘हिंदी साहित्य को बिहार की देन’ था. पत्रिका ‘नयी धारा’ की विज्ञप्ति के अनुसार उन्होंने कहा कि हिंदी के चार विशिष्ट शैलीकार राजा राधिकारमरण प्रसाद सिंह, आचार्य शिवपूजन सहाय, रामवृक्ष बेनीपुरी और फणीश्वरनाथ रेणु बिहार से थे. इनकी रचनाशीलता ने पूरे देश में हिंदी का मान बढ़ाया. उन्होंने कहा कि हिंदी की प्रथम खड़ी बोली के लेखक महेश नारायण भी बिहार से थे जिनका ‘स्वप्न’ शीर्षक काव्य 1881 में प्रकाशित हुआ था.
साहित्य में आंचलिकता की शुरूआत ‘देहाती दुनिया’ (1926), ‘बलचनमा’ (1948), ‘मैला आंचल’ (1954) जैसे उपन्यासों से मानी जाती है. इन सभी रचनाओं के लेखक बिहार से थे. उन्होंने कहा कि जनार्दन झा ‘द्विज’, दिनकर, जानकीवल्लभ शास्त्री, नलिन विलोचन शर्मा जैसे कवि, लेखक, आलोचक भी बिहार से थे जिनके योगदान को हिंदी साहित्य में स्वर्णक्षरों में अंकित किया जाता है. इस मौके पर ‘नयी धारा’ की ओर से प्रो. पांडेय को उदयराज सिंह स्मृति सम्मान से सम्मानित किया गया. उन्हें एक लाख रुपये नकद, सम्मान पत्र, प्रतीक चिह्न, अंगवस्त्र आदि प्रदान किया गया.
‘नयी धारा’ के प्रधान संपादक डा. प्रमथराज सिंह ने जानेमाने लेखक डा. मंगलमूर्ति (पटना), व्यंग्य लेखक एवं पत्रकार सुभाष राय (लखनऊ) तथा मराठी कवि एवं पत्रकार विजय चोरमारे (कोल्हापुर) को ‘नयी धारा’ रचना सम्मान से सम्मानित करते हुए 25-25 हजार रुपये, सम्मान पत्र, प्रतीक चिह्न, अंगवस्त्र आदि प्रदान किये.
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