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पटना : वायु प्रदूषण पर घोषणपत्र जारी, पंद्रह साल पुराने वाहनों के परिचालन पर लगे रोक

Updated at : 28 Nov 2018 8:08 AM (IST)
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पटना : वायु प्रदूषण पर घोषणपत्र जारी, पंद्रह साल पुराने वाहनों के परिचालन पर लगे रोक

पटना : जलवायु परिवर्तन के कारण आकस्मिक बाढ़, जल जमाव, भूकम्प, कार्बन उत्सर्जन, वायु प्रदूषण आदि शहरों और उसके आसपास की बस्तियों की सबसे बड़ी समस्या है. वायु प्रदूषण पर रोक के लिए भारत सरकार को मोटर वाहन अधिनियम में संशोधन कर 15 साल पुराने वाहनों के परिचालन पर रोक लगाने के साथ ही स्वच्छ […]

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पटना : जलवायु परिवर्तन के कारण आकस्मिक बाढ़, जल जमाव, भूकम्प, कार्बन उत्सर्जन, वायु प्रदूषण आदि शहरों और उसके आसपास की बस्तियों की सबसे बड़ी समस्या है.
वायु प्रदूषण पर रोक के लिए भारत सरकार को मोटर वाहन अधिनियम में संशोधन कर 15 साल पुराने वाहनों के परिचालन पर रोक लगाने के साथ ही स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने की जरूरत है. उक्त बातें उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहीं.
वे मंगलवार को ‘अरबन क्लाइमेट रिजिलियेंस: द कन्टेक्स्ट ऑफ रिवर बेसिन’ पर बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकार की ओर से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के उद्घाटन समारोह को सम्बोधित कर रहे थे. कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री ने वायु प्रदूषण पर पटना घोषणपत्र को भी जारी किया.
सुशील कुमार मोदी ने कहा कि अध्ययन में शामिल असम के जोरहाट, पश्चिम बंगाल के बसिरहाट और बिहार के सहरसा आदि शहरों में बाढ़ के प्रभाव को कैसे कम किया जाये, इस पर गहन विचार करने की जरूरत है.
वहीं, गंगा के किनारों के शहरों में जल जमाव की बड़ी समस्या है. बिल्डिंग बायलॉज में प्रावधान है, लेकिन, इसके बावजूद वर्षा जल के संचयन को सख्ती से लागू करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि भूकंपरोधी भवन के निर्माण को बढ़ावा देने की जरूरत है, क्योंकि बिहार के अधिकतर शहर भूकंप जोन-5 के अन्तर्गत आते हैं.
वर्षा जल के संचयन को सख्ती से लागू करने की जरूरत
एयर मॉनीटरिंग मशीन लगाने का निर्देश
उन्होंने कहा कि पटना में वायु प्रदूषण की मॉनीटरिंग के लिए पांच स्थानों पर एयर मॉनीटरिंग मशीन लगाने का निर्देश दिया गया है. जाड़े के मौसम गंगा किनारे के शहरों के करीब दियारे के क्षेत्र उभर आते हैं जिससे मिट्टी और बालू के कण उड़ कर वायु को प्रदूषित करतेे हैं. पटना के आसपास के पांच प्रखंडों में नए ईंट-भट्ठा खोलने पर रोक के साथ पुराने ईंट-भट्ठों को नयी तकनीक अपनाने के लिए एक साल का समय दिया गया है.
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