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बिहार में सियासी गठजोड़: सबकी इच्छा का सम्मान करना राजद के लिए सबसे बड़ी चुनौती

Updated at : 27 Oct 2018 7:48 AM (IST)
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बिहार में सियासी गठजोड़: सबकी इच्छा का सम्मान करना राजद के लिए सबसे बड़ी चुनौती

अब राजद गठबंधन में सीट बंटवारे पर टिकी सबकी निगाहें पटना : बिहार में एनडीए के दो बड़े दलों में सीट बंटवारे पर सहमति के बाद सबकी निगाहें राजद गठबंधन खेमे पर टिक गयी है. इस गठबंधन के दलों ने अब तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं. अंदरूनी तौर पर राजद व कांग्रेस में सीटों […]

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अब राजद गठबंधन में सीट बंटवारे पर टिकी सबकी निगाहें

पटना : बिहार में एनडीए के दो बड़े दलों में सीट बंटवारे पर सहमति के बाद सबकी निगाहें राजद गठबंधन खेमे पर टिक गयी है. इस गठबंधन के दलों ने अब तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं. अंदरूनी तौर पर राजद व कांग्रेस में सीटों के बंटवारे पर सहमति बतायी जा रही है, लेकिन गठबंधन के दूसरे दलों को लेकर सीटों की स्थिति स्पष्ट नहीं है.

कांग्रेस भी अब अतिरिक्त सीटों का बनायेगी दबाव : गठबंधन से जुड़े बड़े नेताओं के अब तक तय फॉर्मूले के मुताबिक राजद सर्वाधिक 20 से 22 सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना बना रहा था. पार्टी ने सहयोगी दलों के लिए 18 से 20 सीटें छोड़ रखी थीं, जिनमें से कांग्रेस को आठ, हम को दो जबकि लोजद, भाकपा, माकपा, माले, सपा और बसपा को एक-एक सीट दी जानी थी. चार सीट रालोसपा के लिए सुरक्षित रखी गयी थी. लेकिन, एनडीए गठबंधन में भाजपा की घटी सीटों को देख कर कांग्रेस भी आठ से अधिक सीटों के लिए राजद पर दबाव बना सकती है.

नहीं तय हो पा रहा महागठबंधन का स्वरूप: सीटों की उठा पटक के चलते ही एनडीए के खिलाफ प्रस्तावित महागठबंधन का स्वरूप भी तय नहीं हो पा रहा. महागठबंधन के लिए बिहार में सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते राजद पहल कर रही है, लेकिन इसमें दूसरे दलों का साथ नहीं मिल रहा. गुरुवार की रैली में कांग्रेस के बड़े नेता गुलाम नबी आजाद ने स्पष्ट कर दिया कि महागठबंधन क्लियर नहीं है. पार्टी का अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग मुद्दों पर गठबंधन होगा. वाम दल (भाकपा, माकपा, माले) एक-एक सीटों पर संतुष्ट नहीं दिख रहे. उनकी मांग अधिक सीटों की है, जो इतने बड़े गठबंधन में संभव नहीं दिखता. मायावती की बसपा और ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने पहले से ही महागठबंधन से किनारा कर रखा है. शरद यादव के संरक्षण वाली पार्टी लोजद से जुड़े बड़े नेता भी टिकट के दावेदार हैं. लेकिन, सबकी इच्छा का सम्मान करना राजद के लिए संभव नहीं होगा.
उपेंद्र के रुख पर तय होगी घोषणा
राजद गठबंधन में सीटों के बंटवारे की घोषणा उपेंद्र के रुख पर ही तय होगा. आने वाले एक-दो दिनों में एनडीए सीटों की संख्या के बंटवारे का एलान कर देगा. इसके बाद यह भी तय हो जायेगा कि उपेंद्र किस गठबंधन का हिस्सा बनेंगे. शुक्रवार को उपेंद्र कुशवाहा की अरवल में तेजस्वी से मुलाकात ने उनके राजद गठबंधन में शामिल होने की खबरों को फिर से हवा दे दी है. उपेंद्र कुशवाहा की स्थिति स्पष्ट होते ही राजद गठबंधन भी सीटों के बंटवारे का एलान कर देगा.
एनडीए में सीट बंटवारे की घोषणा के बाद अब महागठबंधन में भी सीटों की स्थिति जल्द साफ होने की उम्मीद है. किसी भी गठबंधन में घटक दलों में आपसी खींचतान होती रहती है. चुनाव का समय नजदीक देखते हुए गठबंधन दलों के नेता सीट जल्द फाइनल कर लेंगे.
ट्रंप को भी मिला लें, जनता कड़ा सबक सिखायेगी : तेजस्वी
राजद गठबंधन के बढ़ते जनाधार,जमीनी हकीकत व सर्वे का सामना करने के बाद नीतीश जी और बीजेपी के हाथ-पैर फूल गये. आनन-फानन में यह वोट कटाव रोकने का प्रयास है. बिहार क्रांति व बदलाव की धरती है. वे चाहे ट्रंप को भी मिला लें, बिहार की न्यायप्रिय जनता इनको कड़ा सबक सिखायेगी.
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