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बिहार में चुनाव की एक लड़ाई सोशल मीडिया पर भी जारी, सुशील मोदी खुलासा मास्टर, तेजस्वी ट्वीट ब्वाय

Updated at : 08 Oct 2018 7:25 AM (IST)
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बिहार में चुनाव की एक लड़ाई सोशल मीडिया पर भी जारी, सुशील मोदी खुलासा मास्टर, तेजस्वी ट्वीट ब्वाय

अनुज शर्मा पटना : नाम में क्या रखा है? मशहूर फिल्म के इस डायलॉग का राजनीति में कोई मायने नहीं हैं. यहां तो नाम में ही सियासत है. बिहार में चुनाव की एक लड़ाई सोशल मीडिया पर लड़ी जा रही है. सियासी खेल कुछ इस तरह खेला जा रहा है कि जिस दल के नेता […]

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अनुज शर्मा

पटना : नाम में क्या रखा है? मशहूर फिल्म के इस डायलॉग का राजनीति में कोई मायने नहीं हैं. यहां तो नाम में ही सियासत है. बिहार में चुनाव की एक लड़ाई सोशल मीडिया पर लड़ी जा रही है. सियासी खेल कुछ इस तरह खेला जा रहा है कि जिस दल के नेता के हाथ जैसा मुद्दा लग रहा है, वह अपने विरोधी नेता को वैसा ही नाम दे रहा है. आलम यह है कि सियासी हित साधने में अधिकतर नेता विरोधियों को निजी दुख दे रहे हैं.

सोशल मीडिया पर अपने विरोधियों का नामकरण करने के लिए बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव मास्टर माने जाते हैं. शायद ही कोई दिन बीतता है जिसमें वह ‘सरकार’ पर निशाना नहीं साधते. सच तो यह है कि अपने ट्वीट के कारण ही वे खबरों में रह रहे हैं.

राज्य की कानून व्यवस्था को लेकर हमला करना हो तो वह ‘सरकार’ को सुशासन बाबू, सियासी निर्णयों को लेकर घेरना हो तो नैतिक कुमार, संवेदनशीलता पर कटाक्ष करना हो तो ‘अंतरात्मा बाबू’ का संबोधन देते हैं. पलटवार में जदयू के मुख्य प्रवक्ता संजय सिंह ने नेता प्रतिपक्ष को अनुकंपा प्रसाद और ट्वीट ब्वाय का नाम दे रखा है. डिप्टी सीएम सुशील मोदी पर ‘अफवाह मियां और खुलासा मास्टर’ के संबोधन से ट्वीट अटैक हो रहा है. तेज प्रताप लालू के कन्हैया बनकर ट्रोल हो रहे हैं.

अभी अौर बढ़ेगी यह लड़ाई

ट्वीट का ट्रोल होना लोकप्रियता का पैमाना

सोशल मीडिया के जरिये लड़ी जा रही सियासी लड़ाई अभी और घमासान होगी. नेताओं के लिए यह ऐसा प्लेटफार्म बन गया है कि सांप भी मर रहा है और लाठी भी नहीं टूट रही. बिहार में सभी प्रमुख नेता सुबह होते ही अपनी बात व्हाट्सएप ग्रुप, फेसबुक और ट्विटर पर रखकर सियासी मुद्दा बन भी रहे हैं ओर बना भी रहे हैं. शायद ही कोई दल या संगठन है जिसने सोशल मीडिया सेल का गठन नहीं किया हो. लाखों रुपये खर्च कर सोशल मीडिया के पेशेवरों का सहारा ले रहे हैं. इसे अब सच मान लिया गया है कि सोशल मीडिया राजनीतिक लोगों का एजेंडा तक सेट कर रही है. अब तो पोस्ट या ट्वीट का ट्रोल होना या फॉलोवर्स की वृद्धि नेताजी की लोकप्रियता और पकड़ का पैमाना बन गया है.

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