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आईआरसीटीसी घोटाला मामला, तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी को मिली जमानत

Updated at : 07 Oct 2018 6:34 AM (IST)
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आईआरसीटीसी घोटाला मामला, तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी को मिली जमानत

नयी दिल्ली : आईआरसीटीसी होटल के आवंटन में कथित अनियमितता और मनी लाउंड्रिंंग मामले में पटियाला हाउस की विशेष अदालत ने बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और अन्य को जमानत दे दी. सीबीआई के विशेष न्यायाधीश अरुण भारद्वाज ने प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दर्ज मनी लाउंड्रिंग के एक मामले में राबड़ी […]

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नयी दिल्ली : आईआरसीटीसी होटल के आवंटन में कथित अनियमितता और मनी लाउंड्रिंंग मामले में पटियाला हाउस की विशेष अदालत ने बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और अन्य को जमानत दे दी. सीबीआई के विशेष न्यायाधीश अरुण भारद्वाज ने प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दर्ज मनी लाउंड्रिंग के एक मामले में राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और अन्य को 19 नवंबर तक अंतरिम जमानत दे दी.
इस मामले में लालू प्रसाद को 19 नवंबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये पेश करने का अदालत ने आदेश दिया. हालांकि सीबीआई ने जमानत का विरोध किया, लेकिन कोर्ट ने विरोध याचिका खारिज कर दी और लालू प्रसाद को छोड़ अन्य सभी को नियमित जमानत दे दी.
अब इस मामले की सुनवाई 19 नवंबर को होगी. अदालत में तेजस्वी और राबड़ी देवी के अलावा प्रेमचंद गुप्ता और सरला गुप्ता भी मौजूद थे. सीबीआई ने नियमित जमानत का विरोध करते हुए कहा कि अगर नियमित जमानत दी जाती है तो इससे जांच प्रभावित होगी. अदालत ने जांच एजेंसी की दलील को खारिज कर दिया, लेकिन तेजस्वी यादव को अपना पासपोर्ट जमा करने का आदेश दिया. सुनवाई के दौरान पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद के खराब स्वास्थ्य की जानकारी दी गयी और कहा गया कि वे मौजूद नहीं हो सकते हैं. गौरतलब है कि 31 अगस्त को अदालत ने लालू तेजस्वी और राबड़ी को जमानत दे दी थी.
प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि लालू प्रसाद के रेल मंत्री रहते पुरी और रांची में रेलवे के दो होटलों के रखरखाव का जिम्मा सुजाता होटल प्राइवेट लिमिटेड को दे दिया गया और इसके एवज में सुजाता होटल ने लालू परिवार को फायदा पहुंचाया. जांच एजेंसियों का दावा है कि इस मामले में लालू परिवार के खिलाफ पुख्ता सबूत है.
तेजस्वी को खाली करना होगा सरकारी आवास : पटना. पटना हाईकोर्ट ने बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और राजद नेता तेजस्वी यादव को पटना के देशरत्न मार्ग स्थित सरकारी आवास को खाली करने का आदेश दिया है.
जस्टिस ज्योति शरण ने इस मामले में सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था, जिसे शनिवार को सुनाया गया. यह बंगला तेजस्वी यादव को वर्ष 2015 में महागठबंधन की सरकार में उपमुख्यमंत्री बनने के बाद आवंटित किया गया था.जुलाई 2017 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार महागठबंधन से अलग हो गये थे और एनडीए की सरकार बनी.
तब तेजस्वी उपमुख्यमंत्री के पद से हट गये थे. इस वजह से आवास का आवंटन सरकार ने रद्द कर दिया था. 20 सितंबर, 2017 को राज्य के इस्टेट ऑफिसर ने तेजस्वी यादव को नोटिस जारी कर कहा था कि वे देशरत्न मार्ग का सरकारी आवास खाली कर दें. उन्होंने इस आदेश को पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी, लेकिन कोर्ट ने उनके दावे को खारिज करते हुए राज्य सरकार के आदेश को सही करार दिया है. यह आवास राज्य सरकार ने वर्तमान उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी को आवंटित किया गया था.
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