दवा दुकानें रहीं बंद, पर्ची लेकर भटकते रहे मरीज, बंद में सात करोड़ का कारोबार प्रभावित, बिहार में 40 हजार दवा दुकानों पर ताला

Updated at : 29 Sep 2018 3:19 AM (IST)
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दवा दुकानें रहीं बंद, पर्ची लेकर भटकते रहे मरीज,  बंद में सात करोड़ का कारोबार प्रभावित, बिहार में 40 हजार दवा दुकानों पर ताला

पटना : केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित ई-फार्मेसी एक्ट का दवा विक्रेताओं ने शुक्रवार को जम कर विरोध किया. शहर में दवा की जरूरत पड़ने पर मेडिकल स्टोर पहुंचने वाले लोग मायूस हो उठे. दवा विक्रेताओं की हड़ताल के चलते तमाम लोगों को बिना दवा लिये ही वापस घर लौटना पड़ा. दवा की सख्त जरूरत होने […]

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पटना : केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित ई-फार्मेसी एक्ट का दवा विक्रेताओं ने शुक्रवार को जम कर विरोध किया. शहर में दवा की जरूरत पड़ने पर मेडिकल स्टोर पहुंचने वाले लोग मायूस हो उठे. दवा विक्रेताओं की हड़ताल के चलते तमाम लोगों को बिना दवा लिये ही वापस घर लौटना पड़ा. दवा की सख्त जरूरत होने पर कई मरीज इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान पहुंच गये.
इसके अलावा कुछ मरीज शहर के छोटे सरकारी अस्पतालों में भी पहुंच गये. छोटे अस्पतालों में दवा के लिए पर्चा बनवा कर डॉक्टर को दिखाने की शर्त रख दी गयी. अस्पताल की ओपीडी से झटका खाने के बाद मरीज प्रधानमंत्री जन औषधि योजना के अंतर्गत खुले मेडिकल स्टोर पर पहुंचे, लेकिन तमाम दवाएं वहां नहीं मिलने से मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ गया.
एक दिन की हड़ताल के चलते पूरे पटना में करीब सात करोड़ और बिहार में करीब 25 करोड़ रुपये का दवा कारोबार प्रभावित हुआ. बिहार ड्रगिस्ट एवं केमिस्ट एसोसिएशन के बैनर तले सभी दवा दुकानदारों ने हड़ताल की.
दवा एसोसिएशन के सचिव संतोष कुमार ने बताया कि बिहार की सबसे बड़ी मंडी गोविंद मित्रा में रोजाना तीन से चार करोड़ रुपये का दवा कारोबार किया जाता है. दुकानें बंद होने से करोड़ों रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ. पूरे बिहार में करीब 40 हजार दुकानें बंद थीं.
जीएम रोड पर प्रदर्शन
निजी मेडिकल स्टोर संचालित करने वाले शहर के तमाम दवा व्यापारियों ने बिहार केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के बैनर तले शुक्रवार को गोविंद मित्रा रोड पहुंच कर प्रदर्शन किया. केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित ई-फार्मेसी एक्ट का दवा विक्रेताओं ने जम कर विरोध किया और अपनी बातों के समर्थन में जम कर नारेबाजी की. वहीं दवा कारोबारियों ने प्रदर्शन कर गुस्से का इजहार किया.
एसोसिएशन के अध्यक्ष पर्सन कुमार सिंह, सचिव अमर वर्मा व संतोष कुमार के नेतृत्व में हजारों की संख्या में दवा व्यापारी सुबह 10 बजे से शाम छह बजे तक धरना स्थल पर बैठे रहे. इधर इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में संचालित अमृत दवा दुकान पर पर लंबी लाइन लग गयी. दुकान के अंदर काफी अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला. यहां आईजीआईएमएस के अलावा बाहर के भी मरीज दवा लेने के लिए पहुंचे थे.
सर्राफा सहित अन्य रिटेल दुकानें खुली रहीं
पटना : वॉलमार्ट व फ्लिपकार्ट डील और रिटेल में विदेशी निवेश के खिलाफ कॉन्फेडरेशन ऑफ आॅल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) द्वारा शुक्रवार को आहूत भारत व्यापार बंद पूरी तरह विफल रहा. राजधानी में सर्राफा सहित अन्य रिटेल दुकानें सामान्य दिनों की तरह खुली रहीं, जबकि सीएआईटी के अधिकारियों को दावा है कि पटना सिटी, दानापुर, फुलवारीशरीफ तथा हाजीपुर में भारत व्यापार बंद का असर रहा.
बाकरगंज के सभी सर्राफा के थोक बाजार और शहर की रिटेल दुकानें आज सामान्य दिनों की तरह खुली रहीं और कारोबार सामान्य ही रहा. बाकरगंज के अलावा ठाकुरबाड़ी रोड मार्केट, नाला रोड की सभी दुकानें खुली रहीं और सामान्य दिनों की तरह काम काज होते दिखे. हथुआ मार्केट, लालजी मार्केट, चांदनी चौक मार्केट, न्यू मार्केट, डाकबंगला, फ्रेजर रोड, एग्जीबिशन रोड, मौर्यालोक मार्केट, बोरिंग रोड, पटना मार्केट, बेली रोड, राजा बाजार की भी सभी दुकानें खुली रहीं.
दर्जन भर भी व्यापारी यात्रा में शामिल नहीं हुए
सीएआईटी के अधिकारी आज सुबह 11 बजे दरियापुर (बाकरगंज) के ब्रह्म पंचायत मंदिर पास एकत्रित हुए और उसके बाद अध्यक्ष अशोक वर्मा और महासचिव डाॅ रमेश गांधी के नेतृत्व में पटना डीएम को एक ज्ञापन सौंपा. प्रतिनिधि दल में पटना सिटी व्यापार मंडल के अध्यक्ष प्रदीप सिंह, अशोक शर्मा शशि शेखर रस्तोगी, धर्मराज प्रसाद आदि शामिल थे.
डॉ रमेश गांधी ने बताया कि सरकार व्यापारियों के साथ छलावा कर रही है. धारा 411 और 412 के तहत सर्राफा कारोबारियों को गिरफ्तार कर बेवजह परेशान किया जा रहा है. सरकार अविलंब व्यापार मंत्रालय का गठन करे. इसके अलावा खुदरा व्यापार एवं ई-कॉमर्स में विदेशी निवेश को किसी प्रकार की अनुमति न दी जाये. बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज, पाटलिपुत्र सर्राफा संघ, पटना थाेक वस्त्र व्यवसाय संघ और बिहार खुदरा विक्रेता महासंघ ने भारत व्यापार बंद से खुद को अलग रखा.
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