पटना : सरकारी हाईस्कूलों में छात्रों की उपस्थिति 30% भी नहीं

Updated at : 28 Aug 2018 7:44 AM (IST)
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पटना : सरकारी हाईस्कूलों में छात्रों की उपस्थिति 30% भी नहीं

पटना : राज्य के सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए कई स्तर पर कवायद किये जा रहे हैं. तमाम कोशिशों के बावजूद भी स्कूल की कक्षाओं खासकर हाईस्कूल में छात्रों की उपस्थिति नहीं बढ़ रही है. हर तरह से प्रयास करने के बाद रोजाना हाईस्कूलों में 30 फीसदी बच्चे भी उपस्थित नहीं […]

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पटना : राज्य के सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए कई स्तर पर कवायद किये जा रहे हैं. तमाम कोशिशों के बावजूद भी स्कूल की कक्षाओं खासकर हाईस्कूल में छात्रों की उपस्थिति नहीं बढ़ रही है. हर तरह से प्रयास करने के बाद रोजाना हाईस्कूलों में 30 फीसदी बच्चे भी उपस्थित नहीं हो पाते हैं.
जबकि, स्कूलों के रजिस्टर पर सैकड़ों की संख्या में बच्चों का नामांकन दर्ज रहता है. फिर भी बच्चों की उपस्थिति नदारद ही रहती है.
इसमें सबसे बड़ा सवाल उठता है कि आखिर बच्चे नामांकन कराने के बाद स्कूल क्यों नहीं आते या नामांकन करवाने के बाद कहां गायब हो जाते हैं. हालांकि, प्राथमिक स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति की स्थिति इतनी खराब नहीं है. वहां 55 से 60 फीसदी तक बच्चे रोजाना क्लास में उपस्थित होते हैं.
लेकिन, जैसे-जैसे क्लास बढ़ते जाते हैं, वैसे-वैसे बच्चों की उपस्थिति कम होती चली जाती है. हाईस्कूल के स्तर पर साइकिल, पोशाक समेत अन्य योजनाओं का लाभ लेने वाले छात्रों की संख्या उपस्थित होने वाले छात्रों की संख्या से कहीं ज्यादा रहती है. जबकि, साइकिल और पोशाक योजना का लाभ उन्हीं छात्रों को देने का प्रावधान है, जिनकी क्लास में उपस्थिति 75 फीसदी से ज्यादा हो. ऐसे में बड़ी संख्या में नामांकन लेने के बाद गायब रहने वाले छात्रों की हाजिरी 75 फीसदी कैसे बन जाती है, यह भी समझ से परे है.
130 हाईस्कूलों में नामांकित पाये गये एक लाख चार हजार छात्र
सरकारी स्कूलों में गुणवत्ता सुधारने की कवायद के तहत शिक्षा विभाग ने औचक निरीक्षण करने का प्रावधान किया गया है. इसके अंतर्गत जिला और प्रखंड स्तर के पदाधिकारी किसी स्कूल का बिना बताये निरीक्षण करते हैं और वहां के सभी पहलुओं का आकलन करते हैं. इस दौरान अनुपस्थित पाये गये शिक्षकों का एक दिन का वेतन रोकते हुए इनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की गयी है.
इसी क्रम में 130 माध्यमिक स्कूलों का औचक निरीक्षण किया गया था, जिसमें रजिस्टर पर नामांकित छात्रों की संख्या एक लाख चार हजार 103 पायी गयी. जबकि, वास्तविक रूप से क्लास में मौजूद छात्रों की संख्या महज 25 हजार 106 ही थी, जो 30 फीसदी से भी कम है. इससे पहले भी किये गये निरीक्षण के दौरान हाईस्कूलों में ऐसी ही स्थिति देखने को मिली. 30 फीसदी से ज्यादा कभी भी उपस्थिति नहीं मिली.
प्राथमिक स्कूलों में उपस्थिति थोड़ी बेहतर
इसके अलावा 393 प्राथमिक स्कूलों का भी औचक निरीक्षण किया गया. इनमें नामांकित छात्रों की संख्या एक लाख 76 हजार 779 मिली और वास्तव में उपस्थित छात्रों की संख्या 99 हजार 739 पायी गयी, जो करीब 55 फीसदी के आसपास है.
प्राथमिक स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति हाईस्कूल की तुलना में थोड़ी बेहतर रहती है. प्राप्त सूचना के अनुसार हाईस्कूल में काफी बड़ी संख्या में छात्र सिर्फ सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए नामांकन करवा लेते है, लेकिन पढ़ते कहीं और हैं.
कई छात्र नामांकन करवा कर निजी कोचिंग संस्थानों में क्लास लेते हैं और सिर्फ परीक्षा देने सरकारी स्कूलों में आते हैं. ऐसे छात्रों की संख्या भी काफी है. नियमित पढ़ाई नहीं होने या गुणवत्ता की कमी के कारण छात्रों का मोह सरकारी हाईस्कूलों में क्लास करने से भंग होता जा रहा है.
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