पटना : तीन माह में 30% तक महंगी हुई पूजन सामग्री, घी महंगा, तिल का तेल बेअसर
Author Prabhat khabar digital desk
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सुबोध कुमार नन्दन श्रद्धालु पूजन सामग्री के खर्च में कटौती करने को मजबूर, कारोबार पर भी पड़ा बुरा असर पटना : महंगाई की मार का असर पूजा-पाठ पर भी दिखने लगा है. पूजन सामग्रियों के भाव में पिछले दो-तीन माह में 15 से 30 फीसदी तक का इजाफा दर्ज किया गया है. इससे कारोबार में […]
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सुबोध कुमार नन्दन
श्रद्धालु पूजन सामग्री के खर्च में कटौती करने को मजबूर, कारोबार पर भी पड़ा बुरा असर
पटना : महंगाई की मार का असर पूजा-पाठ पर भी दिखने लगा है. पूजन सामग्रियों के भाव में पिछले दो-तीन माह में 15 से 30 फीसदी तक का इजाफा दर्ज किया गया है. इससे कारोबार में भी गिरावट आयी है. दुकानदारों की मानें तो दुर्गा पूजा के पहले पूजन सामग्री के भाव में 10 से 15 फीसदी का और इजाफा हो सकता है. फिलहाल पूजन सामग्री के खर्च में श्रद्धालुओं ने कटौती कर दी है. जो लोग 200 ग्राम कपूर ले जाते थे वह अब सौ ग्राम ही ले जा रहे हैं. हुमाद, गुगुल और धुना की भी मांग कम हो गयी है. पटना में अधिकतर पूजन सामग्रियां वाराणसी से आती है. कुछ दिल्ली से भी आती है.
कम हो गयी अगरबत्तियों की संख्या
अगरबत्तियों की कीमत में बदलाव न कर उसके वजन को कम कर दिया गया है. इसके कारण प्रति डब्बा अगरबत्तियों की संख्या कम हो गयी है. बादशाह अगरबत्ती के प्रमुख जीवन सिंह ने बताया कि फिलहाल कुछ ही कंपनियों ने अगरबत्ती के मूल्य में बढ़ोतरी की है. इसका मुख्य कारण इत्र के भाव में 25 से 30 फीसदी तक का इजाफा होना है.
घी महंगा, तिल का तेल बेअसर
धार्मिक अनुष्ठान में घी का भी विशेष महत्व है. इसका भाव 150-250 से बढ़कर 200 से 350 रुपये प्रति किलो हो गया है. पूजा के लिए बाजार में उपलब्ध अधिकांश घी को रंग, एसेंस, पॉमोलीन (पॉम आयल) और वनस्पति घी मिलाकर तैयार किया जाता है. देसी घी की सुगंध के लिए लोग इसमें केमिकल और मोटा करने के लिए एक पाउडर मिलाते हैं. इसके कारोबारी 70 रुपये में एक किलो नकली घी तैयार कर लेते हैं.
यह होलसेल बाजार में 100 तक में मिल जाता है. खुदरा बाजार में 200 से लेकर 300 रुपये प्रति किलो बिकता है. बहरहाल तिल के तेल में कोई तेजी नहीं दिख रही है.
गुगुल में तेजी
गुगुल की कीमत 800-1000 रुपये से बढ़कर 1200 से 1400 रुपये प्रति किलो हो गयी है. जबकि हुमाद की कीमत दोगुनी हो गयी है. 60-75 रुपये से बढ़कर 120 से 150 रुपये प्रति किलो. अगरबत्ती के दाम में भी तेजी दर्ज की गयी है. मसाला धूपबत्ती की कीमत में बढ़ोतरी हुई है, क्योंकि इसमें कपूर का प्रयोग किया जाता है. धुना के भाव में भी तेजी दर्ज की गयी है. इसकी कीमत 250-350 से बढ़कर 350- 600 रुपये प्रति किलो हो गयी है.
सबसे ज्यादा इजाफा कपूर में
पूजन सामग्री में सबसे ज्यादा महंगा कपूर हुआ है. पिछले दो-तीन माह में कपूर की कीमत में 400 रुपये प्रति किलो का इजाफा हुआ है. पहले कपूर 600- 800 रुपये प्रति किलो था, यह आज एक हजार से लेकर 1500 रुपये तक बिक रहा है. निम्न स्तर का कपूर भी 500-600 रुपये प्रति किलो बिक रहा है.
दुकानदारों ने बताया कि इस समय चाइनीज कपूर बाजार में छाया हुआ है. कपूर यानी काम्फोर पाउडर से तैयार होता है. यह काम्फोर लौरेल नामक पेड़ में पाया जाता है. यह मुख्य रूप से चीन, जापान, भारत, मंगोलिया आदि देशों में पाया जाता है.
वैसे कपूर दो प्रकार के होते हैं. एक प्राकृतिक जो कपूर के पेड़ से मिलता है और दूसरा कृत्रिम केमिकल कपूर जो कि सामान्यत: बाजार में मिलता है. इसी का प्रयोग लोग पूजन के दौरान करते हैं. प्राकृतिक कपूर भीमसेनी की खासियत यह होती है कि पानी में डालने पर यह नीचे बैठ जाता है. कृत्रिम कपूर तारपीन के तेल से तैयार होता है. यह पानी में अघुलनशील व अल्कोहल में घुलनशील
होता है.
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