पटना : नींद की दवा देकर हर बीमारी का इलाज!
Updated at : 15 Aug 2018 8:19 AM (IST)
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पटना : राजीव नगर के नेपाली नगर स्थित आसरा होम में दो महिलाओं की मौत के बाद जांच में कई खुलासे हो रहे हैं. वहां रहनेवाली लड़कियों के भोजन से लेकर चिकित्सा मामले में भारी लापरवाही हुई है. मंगलवार को मानवाधिकार पर काम करनेवाली संस्था पीयूसीएल की टीम ने अासरा होम का निरीक्षण किया,तो कई […]
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पटना : राजीव नगर के नेपाली नगर स्थित आसरा होम में दो महिलाओं की मौत के बाद जांच में कई खुलासे हो रहे हैं. वहां रहनेवाली लड़कियों के भोजन से लेकर चिकित्सा मामले में भारी लापरवाही हुई है. मंगलवार को मानवाधिकार पर काम करनेवाली संस्था पीयूसीएल की टीम ने अासरा होम का निरीक्षण किया,तो कई चौंकानेवाली बातें सामने आ आयीं. इस मामले में सोमवार को गिरफ्तार संस्था से संबंध रखनेवाले चिरंतन कुमार व मनीषा दयाल की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. पुलिस ने मंगलवार को तीन और लोगों को हिरासत में लिया है.
नहीं होती थी नियमित जांच : निरीक्षण करने के बाद पीयूसीएल की अध्यक्ष प्रोफेसर डेजी नारायण व निवेदिता ने बताया कि आसरा होम की हालत बहुत खराब है. एक बच्ची की हालत इतनी खराब थी कि उसके चेहरे पर मक्खियां बैठी थीं. वहीं, यहां रहनेवाली अधिकतर लड़कियों की मानसिक व शारीरिक हालत खराब है. इलाज के लिए कोई इंतजाम नहीं है. यहां बीमार के इलाज के लिए एक डिब्बे में दवाइयां रखी गयी थीं. इनमें कुछ नींद की गोलियां व कुछ अन्य दवाइयां थीं.
मंगलवार को अासरा होम में डॉक्टरों की टीम ने भी निरीक्षण किया. इस दौरान कई बच्चियों की शारीरिक जांच की गयी. इसमें 12 बच्चियों की शारीरिक स्थिति खराब पायी गयी, जबकि एक बच्ची को पीएमसीएच रेफर कर दिया गया है. सबसे बड़ी बात यह है कि मानसिक रूप से बीमार बच्चियों के लिए अब तक कोई जांच की व्यवस्था नहीं की गयी है.
कई बार भाग चुकी हैं लड़कियां
इस वर्ष अप्रैल में अल्पावास गृह की शुरुआत होने के साथ ही यहां गड़बड़ियां शुरू हो गयी थीं. जानकारी के अनुसार, इस आसरा होम से कई बार लड़कियां बाहर भाग चुकी हैं. आसपास के रहनेवाले लोगों से बातचीत की गयी, तो कई बातें निकल कर सामने आयीं. लोगों ने बताया कि भागी हुई लड़कियों को मुहल्ले के लोगों की सहायता से पकड़ कर लाया जाता था.
कई बार तो अासरा होम के गार्ड को भी इसकी जानकारी नहीं रहती थी. पकड़े जाने पर लड़कियां अपना नाम, पता व घर की सही जानकारी बताती थीं. लड़कियों का कहना है कि घर की जानकारी देने के बाद भी अल्पावास गृह से वापस नहीं भेजा जा रहा है.
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