पटना : गंगा की सीमा के अंदर खोले ईंट भट्ठे, शहरी पर्यावरण के लिए भी घातक

Updated at : 08 Aug 2018 6:57 AM (IST)
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पटना : गंगा की सीमा के अंदर खोले ईंट भट्ठे, शहरी पर्यावरण के लिए भी घातक

राजदेव पांडेय पटना : राजधानी की बीस लाख की आबादी के निकट तमाम ईंट भट्ठे संचालित हैं. ये सभी ईंट भट्ठे नियम कायदों को ठेंगा दिखा कर संचालित किये जा रहे हैं. ऐसे ही कुछ ईंट भट्ठों में गंगा किनारे शहर की सुरक्षा दीवार के अंदर संचालित ईंट भट्टे भी हैं. हालांकि, इन दिनों वे […]

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राजदेव पांडेय
पटना : राजधानी की बीस लाख की आबादी के निकट तमाम ईंट भट्ठे संचालित हैं. ये सभी ईंट भट्ठे नियम कायदों को ठेंगा दिखा कर संचालित किये जा रहे हैं. ऐसे ही कुछ ईंट भट्ठों में गंगा किनारे शहर की सुरक्षा दीवार के अंदर संचालित ईंट भट्टे भी हैं. हालांकि, इन दिनों वे खाली हैं. दरअसल बरसात से पहले दीपावली तक ये ईंट भट्ठे करीब-करीब बंद ही रखे जाते हैं. ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक गंगा किनारे और शहरी आबादी के बीच मौजूद ये ईंट भट्ठे करीब दशक भर पहले स्थापित किये गये थे.
ये ईंट भट्ठे जेपी सेतु के निकट से गुजर रहे एक्सप्रेस वे के एकदम करीब हैं. गंगा की बाढ़ से शहर को बचाने के लिए बनायी गयी दीवार (गंगा प्रोटेक्शन वॉल) के इसी पार (गंगा नदी की तरफ ) बनाये गये मिट्टी-पत्थर के रिंग डेम के बीच में यह ईंट भट्ठे हैं. गजब की बात यह है कि तीन में से दो ईंट भट्ठे यहां से निकल रहे गंगा एक्सप्रेस वे के एकदम करीब हैं. जानकारों के मुताबिक गंगा और दूसरी नदियों के किनारे घनी आबादी के निकट संचालित और भी जगहों पर ईंट भट्ठे हैं.
गंगा प्रोटेक्शन वॉल पर असर
दीघा परिक्षेत्र में संचालित ये ईंट भट्ठे गैर कानूनी हैं. इससे भी अहम यह है कि ये पर्यावरण के लिए भी घातक हैं, क्योंकि घनी आबादी वाले क्षेत्र में ये ईंट भट्ठे करीब एक दशक तक संचालित रहे हैं. अभी भी इनके स्ट्रक्चर पूरी तरह सुरक्षित हैं.
जाहिर-सी बात यह है कि बरसात के बाद ये फिर संचालित हो सकते हैं. शहर में पछुआ हवाओं के दौर में इस इलाके में धुंध छा जाती है. ईंट बनाने के लिए मिट्टी का इंतजाम भी वहीं से किया जाता था. जाहिर है कि इससे मिट्टी का कटाव भी तेज होगा. चूंकि मुश्किल से वहां से आधा किलाेमीटर की दूरी पर गंगा प्रोटेक्शन वॉल है, उसको भी खतरा पहुंच सकता है.
हजारों मकान बने हुए हैं
ईंट भट्ठों के एकदम पीछे हजारों की तादाद में मकान बने हुए हैं. घनी आबादी में ये ईंट भट्ठे वर्षों से संचालित हैं. इसके बावजूद किसी ने इस अवैध गतिविधि पर ध्यान नहीं दिया. हालांकि, आसपास बसी आबादी भी अवैध बस्ती बतायी जा रही है.
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