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प्रधानमंत्री बुनकर मुद्रा योजना का लाभ अधिक से अधिक लोगों को दिलाया जायेगा : सुशील मोदी

Updated at : 07 Aug 2018 8:51 PM (IST)
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प्रधानमंत्री बुनकर मुद्रा योजना का लाभ अधिक से अधिक लोगों को दिलाया जायेगा : सुशील मोदी

पटना : प्रधानमंत्री बुनकर मुद्रा योजना के तहत बुनकरों को 50 हजार से पांच लाख रुपये तक का बैंक कर्ज देने का प्रावधान है. इसके अंतर्गत छह से अधिकतम सात प्रतिशत तक ब्याज अनुदान और 10 हजार मार्जिन मनी भी दिया जाता है. बैंकर्स कमेटी की अगली बैठक में अधिक से अधिक बुनकरों को इस […]

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पटना : प्रधानमंत्री बुनकर मुद्रा योजना के तहत बुनकरों को 50 हजार से पांच लाख रुपये तक का बैंक कर्ज देने का प्रावधान है. इसके अंतर्गत छह से अधिकतम सात प्रतिशत तक ब्याज अनुदान और 10 हजार मार्जिन मनी भी दिया जाता है. बैंकर्स कमेटी की अगली बैठक में अधिक से अधिक बुनकरों को इस योजना का लाभ दिलाने का प्रयास किया जायेगा. यह बातें उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने मंगलवार को कहीं. वे राष्ट्रीय हस्तकरघा दिवस पर अधिवेशन भवन में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे.

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने 18 करोड़ रुपये की लागत से भागलपुर में मेगा हैंडलूम कलस्टर के साथ 6.58 करोड़ रुपये की लागत से डिहरी, नवादा और बिहारशरीफ में भी हैंडलूम कलस्टर की स्थापना की है. भागलपुर के सात और बांका के तीन प्रखंडों को मिला कर मेगा हैंडलूम कलस्टर की स्थापना की गयी है. इसके अंतर्गत दोनों जिलों में एक-एक डाई हाऊस, डिजाइन स्टूडियो, 10 कलस्टर डेवलपमेंट, डिजाइनिंग और मार्केटिंग एक्जक्यूटिव आदि की नियुक्ति की गयी है. वहां बुनकर सेवा केंद्र के माध्यम से बुनकरों को बुनाई, छपाई व रंगाई आदि का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है. राज्य सरकार जहां बुनकरों से अस्पतालों में आपूर्ति की जाने वाली सतरंगी चादर की खरीद कर रही है, वहीं पूर्व मध्य रेलवे ने 30 हजार चादर और 50 हजार तकिया कवर के निर्माण का आदेश दिया है.

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सात अगस्त, 2015 को ‘राष्ट्रीय हस्तकरघा दिवस’ मनाने का ऐलान किया. उसके बाद पिछले चार साल से पूरे देश में हस्तकरघा दिवस मनाया जा रहा है. 1905 में सात अगस्त को ही बंगाल में स्वदेशी का आंदोलन प्रारंभ हुआ था जिसमें रवीन्द्र नाथ ठाकुर से लेकर बंगाल की नामचीन हस्तियों ने हिस्सा लिया था. तब से सात अगस्त को ‘स्वदेशी दिवस’ के तौर पर मनाया जाता था जिसे अब ‘हस्तकरघा दिवस’ के रूप में परिवर्तित कर दिया गया है.

राज्य व केंद्र सरकार खादी के साथ हर स्तर पर हस्तकरघा को बढ़ावा देने के लिए तत्पर है. कृषि के बाद सर्वाधिक रोजगार उपलब्ध कराने वाला क्षेत्र हस्तकरघा है. गांधी जी ने भी कहा था, ‘आजादी का हथियार स्वदेशी है, गरीबी से लड़ाई का हथियार हस्तकरघा है.’ कम पूंजी से सर्वाधिक रोजगार देने वाला हस्तकरघा इको फ्रेंडली भी है.

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