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15 जिलों में बारिश से पांच नदियों के जल स्तर में वृद्धि, बाढ़ जैसे बने हालात

Updated at : 04 Jul 2018 6:40 AM (IST)
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15 जिलों में बारिश से पांच नदियों के जल स्तर में वृद्धि, बाढ़ जैसे बने हालात

पटना : प्रदेश के 15 जिलों में मंगलवार को बारिश से मुख्य पांच नदियों के जल स्तर में बढ़ोतरी हुई. इनमें गंगा, गंडक, कमला बलान, कोसी और महानंदा नदियां शामिल हैं.सबसे अधिक बारिश 150 मिमी पश्चिमी चंपारण के चनपटिया में दर्ज की गयी. मौसम विज्ञान विभाग ने मंगलवार को पटना, गया, भागलपुर और पूर्णिया सहित […]

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पटना : प्रदेश के 15 जिलों में मंगलवार को बारिश से मुख्य पांच नदियों के जल स्तर में बढ़ोतरी हुई. इनमें गंगा, गंडक, कमला बलान, कोसी और महानंदा नदियां शामिल हैं.सबसे अधिक बारिश 150 मिमी पश्चिमी चंपारण के चनपटिया में दर्ज की गयी. मौसम विज्ञान विभाग ने मंगलवार को पटना, गया, भागलपुर और पूर्णिया सहित राज्य के लगभग सभी हिस्सों में बारिश की संभावना जतायी है.
बायसी के तीन प्रखंडों में खतरा : इधर, नेपाल के तराई क्षेत्रों में लगातार हो रही मूसलधार बारिश से पूर्णिया जिले के बायसी अनुमंडल के तीन प्रखंडों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है.
इस अनुमंडल क्षेत्र से होकर गुजरने वाली तीनों प्रमुख नदियां महानंदा, कनकई व परमान पर उफान बढ़ता जा रहा है. वैसे विभाग का दावा है कि बाढ़ से निबटने को वे तैयार हैं. हमारी टीम ने मंगलवार को नदियों के किनारे बसे गांवों के लोगों से मिल कर स्थिति का आकलन किया.
मोटरबोट से नेपाली पुलिस ने बचायी जान, बागमती नदी की धार में फंसे 150 लोग
बैरगनिया (सीतामढ़ी). सीमा पार नेपाल के रौतहट जिले की बाढ़ में फंसे 150 लोगों को सर्लाही पुलिस ने मोटर बोट की सहायता से बचा लिया गया. रौतहट के प्रमुख जिलाधिकारी गोविंद रिजाल ने बताया कि जिले के बड़हरवा व राजदेवी गांव के करीब डेढ़ सौ लोग सोमवार को घास काटने नाव से बागमती नदी के पूर्वी पार में गये थे. जब तक घास लेकर लोग वापस लौटते, तब तक बागमती व मनुसमारा नदियों में तेजी से पानी फैल गया.
बागमती नदी के उस पार गये सभी डेढ़ सौ लोग मनुसमारा व बागमती नदियों के बीच फंस गये. रौतहट के प्रमुख जिलाधिकारी ने बागमती के उस पार अवस्थित सर्लाही जिला प्रशासन को इसकी जानकारी दी. उसके बाद मलंगवा से पहुंची पुलिस ने सभी फंसे डेढ़ सौ लोगों को मोटरबोट की सहायता से बाहर निकाला.
एनएच पर बना डायवर्जन पानी में डूबा, आवाजाही बंद
मधुबनी : बीते तीन दिनों से हो रही बारिश से जिले के कोसी, कमला, भूतही बलान, गागस नदियां उफना गयी हैं. कमला नदी का जल स्तर खतरे के निशान से करीब तीन फुट ऊपर बह रही है. लगातार जल स्तर में उतार-चढ़ाव हो रहा है. वहीं धौरी नदी के जल स्तर में बढ़ोतरी होने से लदनियां थाना क्षेत्र के पद्मा गांव में एनएच 227(पूर्व का 104) पर बना डायवर्सन पूरी तरह पानी में डूब गया है. इस पथ पर आवाजाही पूरी तरह से बाधित हो गयी है. लदनियां प्रखंड का जयनगर अनुमंडल से यातायात संपर्क पूरी तरह से भंग हो गया है.
वहीं मधेपुर में द्वालख व जानकीनगर में भी कोसी, कमला के जल स्तर में बढ़ोतरी से कटाव हो रहा है. पूर्व में बना चचरी पुल पानी की तेज धारा में बह गयी है. नाव ही इस इलाके के लोगों के लिए आवाजाही का एक मात्र जरिया बची है. झंझारपुर में कमला के जल स्तर खतरे के निशान से ऊपर बह रही है.
थेथरी नदी में उफान से डायवर्जन बहा, गांवों का मुख्यालय से कटा संपर्क
मैनाटांड़ : पिछले चार दिनों से प्रखंड क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश से थेथरी नदी उफान पर है. बाढ़ का पानी समतल मैदान में भर गया है. वहीं मंगलवार को डायवर्जन बह गया. भंगहा, सिसवा ताजपुर, धुमाटांड़, जसौली सहित दर्जनों गांवों का प्रखंड मुख्यालय से रास्ता कट गया है.
वहीं नौखनिया, करताहा, हरपतबेनी, थेथरी नदी पर बना डायवर्जन पानी में बह जाने के कारण मरजादवा, लक्ष्मीपुर, वस्ठा आदि गांवों के करीब दस हजार लोगों का संपर्क अनुमंडल व प्रखंड मुख्यालय से संपर्क कट गया है.
सीतामढ़ी में तीन स्थानों पर बागमती का जल स्तर खतरे के निशान से ऊपर
सीतामढ़ी : नेपाल व भारतीय क्षेत्र में लगातार वर्षा के कारण बागमती व अधवारा समूह के जल स्तर में उतार-चढ़ाव जारी है. मंगलवार को कुछ स्थानों पर बागमती का जल स्तर खतरे के निशान को पार कर गया है.
जल स्तर में वृद्धि के कारण जिले के रून्नीसैदपुर, बेलसंड, सुरसंड व परिहार प्रखंड में कुछ स्थानों पर बांध पर रेन कट शुरू हो गया है. हालांकि संभावित बाढ़ की आशंका को देखते हुए डीएम डाॅ रणजीत कुमार सिंह की ओर से जिले के सभी हिस्सों पर नजर रखते हुए संबंधित विभाग को लगातार आवश्यक दिशा-निर्देश दिया जा रहा है.
मधुबनी में पानी में डूबने से दो बच्चों की मौत, दूसरे दिन शव बरामद
मधुबनी : धनहा थाना क्षेत्र के डीही गांव में दो बच्चों की मौत डूबने से हो गयी है. दोनों बच्चे सोमवार से ही गायब थे. मंगलवार की सुबह उनकी लाश गड्ढे में मिली. धनहा पंचायत के डीही गांव निवासी आकाश पटेल (12 वर्ष) और प्रदीप यादव (10 वर्ष) सोमवार दोपहर से ही गायब थे. मंगलवार की सुबह ग्रामीणों ने खेत में खोदे गये गड्ढे में दोनों का शव देखा.
तटबंध की निगरानी में लगाये गये होमगार्ड
सीवान : मॉनसून आने के साथ ही बाढ़ आने की आशंका बन जाती है. इसी को लेकर जिला प्रशासन के अधिकारी अलर्ट हो गये है. इसको देखते हुए जिलाधिकारी रंजीता ने समाहरणालय में समीक्षा बैठक भी की है और जिलास्तरीय पदाधिकारियों को बाढ़ को लेकर आवश्यक निर्देश दिया है.
बाढ़ की आशंका को देखते हुए सभी सीओ को भी अलर्ट रहने की डीएम ने निर्देश दिया है. नेपाल में लगातार हो रहीं बारिश से सरयू नदी में इन दिनों पानी बढ़ने लगा है. पानी बढ़ने की सूचना के बाद जिला प्रशासन अलर्ट हो गया है. बाढ़ के समय बचाव के लिए तैयारी भी आपदा विभाग द्वारा शुरू कर दी गयी है. सरयू नदी का बांध सुरक्षित रहे और कोई असामाजिक तत्व बांध को काट नहीं सके.
इसके रखवाली के लिए जिला प्रशासन द्वारा दरौली से लेकर सिसवन तक सुरक्षा के दृष्टीकोण से हर एक किलोमीटर पर होमगार्ड का जवान लगाया गया है. ताकि ये लोग बांध की सुरक्षा कर सके. इसके अलावा विभागीय अधिकारी भी इस पर नजर बनाये हुए है. पुलिस अधीक्षक नवीन चंद्र झा ने बताया कि सरयू नदी के सुरक्षा के लिए बांध पर होमगार्ड जवान प्रति एक किलोमीटर पर लगाये गये है.
गंडक नदी में बढ़ रहे जल स्तर से आधा दर्जन प्रखंड के लोग सतर्क : गोपालगंज जिले से गुजरने वाली गंडक नदी भी नेपाल समेत तराई क्षेत्र में झमाझम मॉनसूनी बारिश से बढ़ने लगी है. यहां भी जल स्तर बढ़ने लगा है.
अगर गोपालगंज जिला में तटबंध टूटता है तो और वहां बाढ़ आती है तो सीवान जिले के लगभग पांच प्रखंड के कई गांव प्रभावित हो सकता है. जिसमें गोरेयाकोठी, बसंतपुर, लकड़ीनवीगंज, भगवानपुर हाट, बड़हरिया शामिल है. इसके पूर्व वर्ष 2017 में लकड़ीनवीगंज प्रखंड के आधा दर्जन गांव के लोग बाढ़ से प्रभावित हुए थे.
गंडक नदी में बाल्मिकी नगर बराज से प्रतिदिन पानी छोड़ा जा रहा है. जिससे उसका पानी बढ़ रहा है. अगर गोपालगंज में तटबंध टूटता है तो ये प्रखंड प्रभावित हो सकता है. जिला प्रशासन द्वारा समाहरणालय में इसके लिए बाढ़ नियंत्रण कक्ष की स्थापना की गयी है.
जहां भी सूचना दी जा सकती है. इसके अलावा तटबंधों को सुरक्षा के लिए सिसवन, रघुनाथपुर, दरौली व गुठनी के इलाका में सरयू के समीप बालू से भरे बैग रखा गया है. ताकि कटाव की सूचना पर बैग से मरम्मत किया जा सके. इसके लिए तैयारी हर स्तर पर पूरी कर ली गयी है. सरयू के इलाके के भी कुछ गांव बाढ़ के पानी से प्रभावित होते है.
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