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महिला सशक्तिकरण के मामले में देश के अन्य राज्यों से आगे है बिहार : सुशील मोदी

Updated at : 09 Feb 2018 6:31 PM (IST)
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महिला सशक्तिकरण के मामले में देश के अन्य राज्यों से आगे है बिहार : सुशील मोदी

पटना : बिहारकेउपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने आज कहा कि महिला सशक्तिकरण के मामले में देश के अन्य राज्यों से आगे है और यहां महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 35 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है. उन्होंने कहा कि सोशल क्राइम पर नियंत्रण के लिए प्रत्येक जिले में एक–एक डीएसपी की तैनाती की प्रक्रिया चल रही […]

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पटना : बिहारकेउपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने आज कहा कि महिला सशक्तिकरण के मामले में देश के अन्य राज्यों से आगे है और यहां महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 35 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है. उन्होंने कहा कि सोशल क्राइम पर नियंत्रण के लिए प्रत्येक जिले में एक–एक डीएसपी की तैनाती की प्रक्रिया चल रही है. एसटी समुदाय से आने वाले थारूओं का बिहार स्वाभिमान पुलिस के नाम से दो बटालियन का गठन किया गया है. एनडीए सरकार के दौरान 2011 में राज्य के सभी 40 पुलिस जिलों में महिला पुलिस थाना खोला गया है.

बिहार वेटनरी कॉलेज के सभागार मेंशुक्रवारको आयोजित राष्ट्रीय महिला आयोग व बिहार पुलिस के संयुक्त तत्वावधान में राज्य के 40 महिला थानों के थानाध्यक्षों और अन्य अनुसंधान पदाधिकारियों के तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए सुशील मोदी ने क्राइम के ग्राफ के मामले में बिहार को राष्ट्रीय औसत के हिसाब से काफी पीछे बताया. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय औसत की तुलना में बिहार में अपराध काफी कम हैं. उन्होंने राज्य के महिला थानों के विकास के बारे में बात करते हुए कहा कि राज्य के 700 थानों में महिलाओं के लिए शौचालय व स्नानागार का निर्माण कराया गया है. बिहार में एनडीए की सरकार बनने के बाद राज्य की महिलाओं को पंचायत चुनाव में 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया जो महिला सशक्तिकरण में मील का पत्थर साबित हुआ है.

सुशील मोदी ने राष्ट्रीय क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े पेश करते हुए कहा कि प्रति एक लाख पर बलात्कार की घटनाओं का राष्ट्रीय औसत 6.3 जबकि बिहार में मात्र 2 तथा छेड़खानी के मामलों में प्रति लाख पर राष्ट्रीय औसत 13.2, जबकि बिहार का 0.6 है. मगर दहेजमामलेको लेकर मृत्यु का राष्ट्रीय औसत जहां 1.2 वहीं, बिहार का 2 है, जो चिंता की बात है. 2015 में बलात्कार से जुड़े 91 मामलों में सजा दी गयी वहीं 2017 में इसकी संख्या बढ़ कर 168 हो गयी. दहेज हत्या के मामले में 2015 में 110 तथा 2017 में 170 लोगों को सजा दी गयी है.

उपमुख्यमंत्री ने कहा है कि पुरुषवादी मानसिकता से महिला पुलिस अधिकारियों को भी बाहर निकलने की जरूरत है. आज महिलाओं में जागृति आयी है, अब वह मुकाबला कर रही है. घरेलू हिंसा की घटनाएं पहले भी घटती थी मगर अब वह प्रतिवेदित हो रही है. उन्होंने अपील किया कि पुलिस महिलाओं से जुड़े मामले में बेहतर अनुसंधान करें ताकि अपराधियों को सजा मिल सके. इस मौके पर राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य सुषमा साहू, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी विनय कुमार, गुप्तेश्वर पांडेय व के एस द्विवेदी आदि उपस्थित थे.

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