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लालू-राबड़ी का दिया शगून वाला लिफाफा इस सामाजिक संस्था को दान करेंगे सुशील मोदी, पढ़ें

Updated at : 04 Dec 2017 5:57 PM (IST)
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लालू-राबड़ी का दिया शगून वाला लिफाफा इस सामाजिक संस्था को दान करेंगे सुशील मोदी, पढ़ें

पटना : बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने अपने बेटे उत्कर्ष की दहेज रहित शादी कर इन दिनों चर्चा में बने हुए हैं. वैसे भी यह शादी घोषणा के बाद से अपने ई कार्ड और राजद नेता तेज प्रताप की धमकी की वजह से खासी चर्चा में रही. हालांकि, इस शादी में राजद सुप्रीमो […]

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पटना : बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने अपने बेटे उत्कर्ष की दहेज रहित शादी कर इन दिनों चर्चा में बने हुए हैं. वैसे भी यह शादी घोषणा के बाद से अपने ई कार्ड और राजद नेता तेज प्रताप की धमकी की वजह से खासी चर्चा में रही. हालांकि, इस शादी में राजद सुप्रीमो लालू यादव ने शिरकत की और दुल्हन को शगून का लिफाफा भी दिया. अब, शादी के बाद सुशील मोदी ने आम लोगों से एक खास अपील की है. उन्होंने कुछ महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए कहा है कि यदि लोग इन नियमों को अपनाकर अपने बेटे-बेटियों की शादी करें, तो समाज से दहेज रूपी विकृति खत्म हो जायेगी.

सुशील कुमार मोदी ने मीडिया से बातचीत में कहा है कि समाज के हर तबके के युवक और युवतियां दहेज रहित शादी का संकल्प लें और अपने परिजनों को भी इसके लिए बाध्य करें, तभी दहेज जैसी सामाजिक विकृति का खात्मा संभव है. अपने पुत्र उत्कर्ष तथागत की शादी समारोह में शामिल हो कर वर–वधू को आशीष देने वाले सभी आमंत्रितों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा है कि पूर्व की घोषणा के बावजूद पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी व लालू प्रसाद तथा कुछेक अन्य सज्जनों की ओर से दिए गए शगून के लिफाफे की राशि सामाजिक संस्था ‘दधीचि देहदान समिति’ को दान कर दी जायेगी.

सुशील मोदी ने कहा कि बिना तिलक–दहेज और सादगीपूर्ण शादी की महत्वपूर्ण जिम्मेवारी अभिभावकों के साथ–साथ नौजवानों के संकल्पों पर भी निर्भर हैं. दहेजरहित शादी के लिए अगर जरूरत पड़े तो युवक व युवतियां अपने परिजनों से भी विद्रोह करें और दहेज न देने और न लेने के लिए उन्हें बाध्य करें.

उन्होंने सुझाव देते हुए कहा कि खर्चीली शादी से बचने के लिए दिन के आयोजन को प्राथमिकता दें तथा डिजिटल इंडिया के इस दौर में महंगे निमंत्रण पत्र छपवाने की जगह ई–मेल और व्हाट्सएेप व अन्य सोशल मीडिया के विकल्पों का उपयोग कर ई–निमंत्रण कार्ड को बढ़ावा दें. बैंड, बाजा,बारात, नाच–गाने, रौशनी की भड़कीली सजावट, आतिशबाजी आदि से मुंह मोड़ कर युवक और युवतियां अगर दहेजरहित शादी का अभियान चलाये तो न केवल दहेज जैसी कुप्रथा पर रोक लगेगी बल्कि दहेज जनित अनेक प्रकार के अपराध और पारिवारिक कलह का भी खात्मा संभव हो सकेगा.

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