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जरीब की झंझट खत्म, ईटीएस से जमीन मापी

पटना: आनेवाले दिनों में जंजीर खींचकर जमीन की मापी की जानेवाली जरीब की झंझट से लोगों को छुटकारा मिलेगा. अमीन द्वारा जरीब से जमीन की मापी में एक कड़ी इधर से उधर कर देने से लोगों के बीच होनेवाले विवाद पर भी अंकुश लगेगा. अब राज्य में जमीन की मापी इलेक्ट्रॉनिक टोटल स्टेशन (ईटीएस) मशीन […]

पटना: आनेवाले दिनों में जंजीर खींचकर जमीन की मापी की जानेवाली जरीब की झंझट से लोगों को छुटकारा मिलेगा. अमीन द्वारा जरीब से जमीन की मापी में एक कड़ी इधर से उधर कर देने से लोगों के बीच होनेवाले विवाद पर भी अंकुश लगेगा. अब राज्य में जमीन की मापी इलेक्ट्रॉनिक टोटल स्टेशन (ईटीएस) मशीन से होगी. फिलहाल ईटीएस मशीन का उपयोग विशेष सर्वे के तहत जमीन मापी में हो रही है. हवाई जहाज में लगे शक्तिशाली कैमरों की मदद से लिये गये जमीन की फोटोग्राफ की जांच आर्थो लैब में करने के बाद उसकी मापी ईटीएस मशीन से हो रही है. हवाई सर्वे करनेवाली तीन एजेंसियों ने ईटीएस मशीन उपलब्ध करायी है.
दूसरे राज्यों में जमीन की मापी इटीएस से हो रही है. आंघ्रप्रदेश में इटीएस मशीन से जमीन की मापी में लगभग 90 फीसदी मामले का निष्पादन हुआ है.
310 मौजो में सीमा सत्यापन का काम पूरा
नौ जिले लखीसराय, बेगूसराय, खगड़िया, नालंदा, शेखपुरा, मुंगेर, मधेपुरा, सहरसा व सुपौल के 310 मौजो में ग्राम सीमा सत्यापन का काम पूरा हो गया है. त्री सीमाना पर माॅन्यूमेंट (चिह्न) लगाने का काम हुआ है. विभागीय सूत्र ने बताया कि अमीन व हवाई एजेंसी के प्रतिनिधियों द्वारा यूनिक विलेज बाऊंड्री का निर्धारण किया जाता है. साथ ही तीन गांवों की सीमा पर चिह्न लगाया जाता है. सर्वे के काम में जमीन की मापी के साथ कागजातों की जांच होती है. इस आधार पर रिकॉर्ड ऑफ राइट्स या खतियान बन रहा है. विभाग के कर्मियों सहित अमीन को इटीएस मशीन से जमीन मापी का प्रशिक्षण दिया जा रहा है.
कम समय में त्रुटिहीन मापी संभव
ईटीएस मशीन से जमीन की मापी कम समय में त्रुटिहीन होगी. इसमें जमीन की मापी तेजी से होने के साथ लोगों को किसी तरह की शंका नहीं रहेगी. जानकारों के अनुसार हवाई सर्वे के बाद तैयार जमीन का ब्योरा एक चिप के माध्यम से मशीन में फीड रहेगी. जिस खेत की मापी होगी उसके चारो मेड़ पर स्टैंड खड़ा कर दूरबीन के सहारे जमीन का रकवा मिलान होगा. इससे जमीन की एक्यूरेट मापी होगी. जरीब से होनेवाले जमीन की मापी को लेकर पूरी तरह से लोग संतुष्ट नहीं होते हैं. जरीब से होनेवाले जमीन की मापी में अमीन द्वारा जंजीर इधर से उधर कर देने की अधिक शिकायत होती है. इस वजह से विवाद का निष्पादन होने की बजाय विवाद और अधिक उलझ जाता है. लगभग 50 फीसदी से अधिक मामले जमीन विवाद को लेकर है.
Prabhat Khabar Digital Desk
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