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लालू परिवार पर आये संकट पर सिमटकर रह गयी राजद की भाजपा भगाओ, देश बचाओ रैली

Updated at : 28 Aug 2017 2:46 PM (IST)
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लालू परिवार पर आये संकट पर सिमटकर रह गयी राजद की भाजपा भगाओ, देश बचाओ रैली

पटना : बिहार के सबसे बड़े सियासी परिवार के मुखिया राजद सुप्रीमो लालू यादव ने रविवार को राजधानी पटना में महारैली का सफल आयोजन किया. रैली को लेकर विपक्ष ने हमला किया और इसे सुपर फ्लॉप कहा. जवाब में लालू ने ट्वीट किया कि लोगों की छाती पर सांप लोट गया. रैली काउद्देश्य था, एंटी […]

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पटना : बिहार के सबसे बड़े सियासी परिवार के मुखिया राजद सुप्रीमो लालू यादव ने रविवार को राजधानी पटना में महारैली का सफल आयोजन किया. रैली को लेकर विपक्ष ने हमला किया और इसे सुपर फ्लॉप कहा. जवाब में लालू ने ट्वीट किया कि लोगों की छाती पर सांप लोट गया. रैली काउद्देश्य था, एंटी एनडीए फ्रंट को बिहार की क्रांतिकारी धरती से एक मंच देना, ताकि एनडीए और भाजपा के खिलाफ एक विपक्षी खेमा तैयार हो सके. राजनीतिक जानकारों की मानें, तो रैली लालू कुनबे पर हो रही कार्रवाई के मुद्दे तक सिमट कर रह गयी और विपक्षी एकता की बात गौण हो गयी. वैसे भी रैली में कई बड़े चेहरे नहीं पहुंचे. जो मौजूद रहे, उसमें ममता बनर्जी को छोड़ दें, तो सभी पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री थे. रैली का उद्देश्य भाजपा भगाओ, देश बचाओ के साथ महागठबंधन बनाने के उद्देश्य से आयोजित था, लेकिन शरद यादव को छोड़ दें, तो मंच से किसी ने महागठबंधन बनाने की बात नहीं की. लालू अपने सियासी परिवार पर हो रही कार्रवाई की दुहाई देते हुए बदले की कार्रवाई बताया और बाकी नेता लालू की बात का समर्थन करते दिखे. पूरी रैली की केंद्र बिंदू में लालू परिवार, नीतीश कुमार, नरेंद्र मोदी सरकार छायी रही. असली मुद्दा पूरी तरह लालू के परिवार पर आये संकट तक सिमटकर रह गया.

एंटी एनडीए फ्रंट की एकता पर सवाल

अगले लोकसभा चुनाव में भाजपा को सत्ता से हटाने का आह्वान किया लेकिन इसकी चमक कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके पुत्र राहुल गांधी और बसपा प्रमुख मायावती जैसे नेताओं की अनुपस्थिति के करण फीकी रही. रैली में उपस्थित दिग्गज नेताओं में जदयू के बागी नेता शरद यादव, कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री एवं तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव शामिल थे. गांधी मैदान में प्रभावशाली भीड़ से उत्साहित राजद प्रमुख लालू प्रसाद और अन्य नेताओं ने दावा किया कि 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा और उसके सहयोगी दलों की सत्ता से बेदखल होने की उल्टी गिनती शुरू हो गयी है. रैली में राकांपा, नेशनल कान्फ्रेंस, द्रमुक, केरल कांग्रेस, रालोद, भाकपा, झामुमो, झाविमो, पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौडा के नेतृत्व वाले जदएस, असम के एआईयूडीएफ, आरएसपी और भाकपा माले जैसे अन्य विपक्षी दलों के प्रतिनिधि उपस्थित थे. रैली में ममता बनर्जी की उपस्थिति के कारण माकपा का कोई भी नेता इसमें शामिल नहीं हुआ. ममता की तृणमूल कांग्रेस पश्चिम बंगाल की राजनीति में माकपा की प्रमुख प्रतिद्वंद्वी है.

नीतीश थे आलोचना के केंद्र में

रैली में भाजपा के अलावा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विपक्षी दलों के नेताओं की आलोचना के केंद्र में थे. कुमार ने लालू और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर महागठबंधन का साथ छोड़ दिया था और बाद में भाजपा के साथ मिलकर बिहार में नयी सरकार बना ली थी. बागी जदयू नेता शरद यादव ने पार्टी के निर्देशों का उल्लंघन करते हुए रैली में हिस्सा लिया और बिहार में महागठबंधन टूटने के बारे में अपनी बात रखी. यादव ने कहा कि वह अब देश के 125 करोड़ नागरिकों का गठबंधन बनाने के लिए काम करेंगे. यादव का परोक्ष रूप से इशारा भाजपा नीत राजग के खिलाफ विपक्षी दलों का एक गठबंधन बनाने के प्रयास की ओर था. रैली में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी का पहले से रिकार्ड किया हुआ भाषण चलाया गया.

शामिल नहीं हुए बड़े चेहरे

लालू प्रसाद, ममता बनर्जी, गुलाम नबी आजाद, शरद यादव, अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर प्रहार किया और सवाल किया कि उनके शासन के तीन साल गुजर जाने के बावजूद अच्छे दिन का क्या हुआ. उन्होंने किसानों, मजदूरों और युवाओं की खराब स्थिति के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया. लगभग सभी वक्ताओं ने देश में भाजपा की जीत के रथ को रोकने के लिए 2015 में बिहार में महागठबंधन, जदयू, राजद, कांग्रेस की बड़ी जीत को याद किया और भाजपा के साथ मिलकर जनादेश को धोखा देने के लिए नीतीश कुमार के प्रति आक्रोश व्यक्त किया. ममता ने नोटबंदी की कड़ी निंदा की और कहा कि इससे अगले चुनाव में भाजपा का पतन होगा. उन्होंने कहा कि जैसे नसबंदी से इंदिरा गांधी का पतन हुआ था, नोटबंदी से भाजपा का पतन होगा. राजद प्रमुख लालू ने नीतीश कुमार पर आरोप लगाया कि उन्होंने भाजपा की मदद से उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ झूठे मामले थोपे क्योंकि वह तेजस्वी यादव के उदय से ईष्या करते हैं. लालू ने करोड़ों रुपये के सृजन एनजीओ घोटाले में कुमार की ओर उंगली उठायी और उनके इस्तीफे की मांग की. उन्होंने मांग की कि सीबीआइ की जारी जांच उच्चतम न्यायालय की निगरानी में करायी जाये.

जदयू नेता शरद पर कार्रवाई

बागी जदयू नेता शरद यादव राजद की रैली में हिस्सा लेने के कारण कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार हैं. उन्होंने कुमार का नाम नहीं लिया लेकिन इस बारे में बात की कि किस तरह से बिहार के 11 करोड़ लोगों का विश्वास टूटा जिन्होंने महागठबंधन को वोट किया था. उन्होंने परोक्ष रूप से कुमार की ओर इशारा करते हुए कहा, मैं आपसे डरता नहीं हूं. उन्होंने कहा कि किसानों और मजदूरों के लिए उनका संघर्ष जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि मैं 43 मामलों का सामना कर रहा हूं और गरीबों एवं दबे-कुचलों के लिए संघर्ष के दौरान मेरे दोनों पैर टूट गये थे. अब मैं देश के 125 करोड़ लोगों के लिए एक गठबंधन बनाने के लिए काम करूंगा. ममता, कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद, अखिलेश यादव, झामुमो नेता हेमंत सोरेन और रालोद के जयंत चौधरी सहित अधिकतर नेताओं ने लालू के छोटे पुत्र तेजस्वी यादव की प्रशंसा की जो कि बिहार में विपक्ष के नेता हैं. लालू प्रसाद के बड़े पुत्र तेज प्रताप ने कहा कि उन्होंने कहा अर्जुन, अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव के लिए बिगुल बजा दिया है कि वह बिहार में नीतीश कुमार और भाजपा के खिलाफ निर्णायक लड़ाई शुरू करें. तेजस्वी यादव अपने खिलाफ लगे आरोपों पर कुछ नहीं बोले जिसका वादा उन्होंने किया था. उन्होंने जनसभा में कहा कि क्या आप मानते हैं कि मैं चोर या भ्रष्ट हूं.

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