पटना के संपतचक अंचल कार्यालय में दाखिल-खारिज के लिए इस तरह होता था 'काला खेल',गूगल से किया जाता था पेमेंट

Updated at : 22 Nov 2022 1:10 AM (IST)
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पटना के संपतचक अंचल कार्यालय में दाखिल-खारिज के लिए इस तरह होता था 'काला खेल',गूगल से किया जाता था पेमेंट

Bihar news patna: संपतचक अंचल से दाखिल-खारिज व अन्य कार्य कराने के लिए हजारों में होता था सौदा. यहां दाखिल-खारिज के नाम पर लिये जाते थे चार से सात हजार रुपये. अधिक जानकारी के लिए पढ़े पूरी खबर...

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पटना: संपतचक अंचल में दाखिल-खारिज से लेकर अन्य काम को कराने के लिए दलालों व बिचौलियों का एक बड़ा ग्रुप सक्रिय है. काम कराने के लिए अंचल कार्यालय के कर्मियों को वाट्सएप पर कागजात दलालों द्वारा भेजे जाते थे और गुगल पे के माध्यम से तुरंत ही रकम भेज दिये जाते थे.

एसडीओ पटना सदर श्रीकांत कुंडलिक खांडेकर ने 19 नवंबर को संपतचक अंचल के साथ ही पत्रकार नगर में ऑरेंज होटल के समीप चल रहे अवैध रूप से कार्यालय का निरीक्षण किया था. इस दौरान मनोज नाम के दलाल को पकड़ा गया. साथ ही कार्यालय में कार्यपालक सहायक आशुतोष कुमार भी मिले थे और संपतचक अंचल से जुड़े कई दस्तावेज बरामद किये गये थे. इस दौरान दोनों के मोबाइल फोन की जांच की गयी तो पता चला कि वाट्सएप के माध्यम से सारा खेल होता था.

दलालों के जरिये प्राप्त होते थे कागजात

आशुतोष को दलालों के माध्यम से कागजात प्राप्त होते थे और वह अंचलाधिकारी, राजस्व पदाधिकारी व राजस्व कर्मचारी को वाट्सएप से शेयर करते थे. जांच में यह बात सामने आयी है कि पत्रकार नगर में जो कमरा किराये पर लिया गया था, वह ऑपरेटर के माध्यम से लिया गया था. इस संबंध मं पत्रकार नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी जा चुकी है. पुलिस एसडीओ की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करने में जुटी है. एसडीओ ने जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी डॉ चंद्रशेखर सिंह को सौंप दी है.

कार्यालय से अनुपस्थित पाये गये थे सीओ व राजस्व पदाधिकारी

एसडीओ के 19 नवंबर के औचक निरीक्षण में अंचल कार्यालय से अंचलाधिकारी नंद किशोर प्रसाद व राजस्व पदाधिकारी स्वाति झा गायब थी. उन्हें फोन कर बुलाया गया तो उपस्थित हुए. इसके बाद जांच में कई आवेदन भी लंबित पाये गये.

एसडीओ ने जांच में पाया, पैसे लेकर होता था अंचल में कोई भी काम

एसडीओ ने अपनी जांच रिपोर्ट में बताया है कि डाटा इंट्री ऑपरेटर शंकर कुमार व इंतखाब आलम ने भी स्वीकार किया है कि पैसे लेकर दाखिल-खारिज व अन्य कार्य किये जाते थे. वाट्सएप से सारी डिटेल आ जाती थी और फिर गुगल पे से पेमेंट भी मिल जाता था. साथ ही एसडीओ ने यह भी बताया है कि जांच के क्रम में यह जानकारी मिली है कि दाखिल-खारिज व परिमार्जन के लिए चार हजार से सात हजार रुपये लिए जाते थे.

इन लोगों के नाम आये सामने

एसडीओ ने इस बात की भी जानकारी दी है कि उन्हें कई लोगों ने बताया कि अंचल अधिकारी व राजस्व कर्मचारी की मिलीभगत कई दलालों और बिचौलियों से है, जो राजस्व कर्मचारी के मुंशी के रूप में काम करते हैं. इनके ही माध्यम से से पैसे की वसूली की जाती है. एसडीओ की जांच में जिन बिचौलियों का नाम सामने आया है, उसमें मनोज कुमार, नागेंद्र कुमार सिंह, मनोज कुमार-2, संजीत कुमार, उपेंद्र कुमार, गोविंद कुमार, धीरेंद्र कुमार व नन्हें जी शामिल हैं.

राजस्व अधिकारी को प्रताड़ित करने का भी मामला आया सामने

एसडीओ ने राजस्व अधिकारी स्वाती झा से भी पूछताछ की और अपनी रिपोर्ट में उसका जिक्र किया है. जिसमें स्वाती झा ने यह जानकारी दी है कि राजस्व कर्मचारी के ये बिचौलिए हमेशा उन पर गलत काम कराने के लिए दबाव देते थे और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था.

करोड़ों के मालिक बन गये हैं बिचौलिये

सूत्रों का कहना है कि जिन बिचौलियों का नाम सामने आया है, उन्होंने अंचल से जुड़े कामों को कराने के बाद करोड़ों की चल व अचल संपत्ति अर्जित की है.

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