Patna Metro: पटना मेट्रो में नौकरी दिलाने के नाम पर चल रहे बड़े फर्जीवाड़े का पुलिस ने पर्दाफाश किया है. इस मामले में गिरोह के सरगना समेत तीन शातिर जालसाजों को गिरफ्तार किया गया है.
शुरुआती जांच में करीब आठ से दस लाख रुपये की ठगी की पुष्टि हुई है, लेकिन पुलिस का मानना है कि ठगी की रकम करोड़ों तक पहुंच सकती है. यह गिरोह बीते दो वर्षों से बेरोजगार युवाओं को निशाना बना रहा था.
पटना मेट्रो के नाम पर चला संगठित ठगी का नेटवर्क
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपितों में सुपौल का अखिलेश कुमार चौधरी, नवादा का दिनेश कुमार साव और मधेपुरा का नवनीत कुमार शामिल हैं. गिरोह का मास्टरमाइंड अखिलेश कुमार चौधरी है.
एएसपी सदर अभिनव कुमार ने बताया कि एक अभ्यर्थी की शिकायत पर जब पुलिस ने छापेमारी की, तो दो लोग इंटरव्यू लेते हुए रंगेहाथ पकड़े गए. पूछताछ में पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ.
2000 से ज्यादा आवेदन, 700 को दिखाया चयनित
अब तक की जांच में यह सामने आया है कि 2000 से अधिक बेरोजगार युवकों ने आवेदन किया था. इनमें से करीब 700 अभ्यर्थियों को चयनित दिखाया गया. इंटरव्यू के लिए उम्मीदवारों को पटना बुलाया जाता था, ताकि उन्हें भरोसा हो जाए कि भर्ती प्रक्रिया वास्तविक है. जुलाई में पटना के उर्मिला इंटरप्राइजेज नामक एक परीक्षा केंद्र पर लिखित परीक्षा भी कराई गई थी.
ट्रेनिंग के नाम पर वसूली गई मोटी रकम
इंटरव्यू में जानबूझकर कठिन सवाल पूछे जाते थे. करीब 700 में से लगभग 80 उम्मीदवारों को यह कहकर फेल कर दिया जाता था कि उनकी नौकरी पक्की नहीं है. इसके बाद उन्हें डेटा ऑपरेटर, इलेक्ट्रिशियन या फिटर की ट्रेनिंग का ऑफर दिया जाता था. ट्रेनिंग के नाम पर 55 हजार रुपये तक की रकम वसूली जाती थी. लेकिन जब अभ्यर्थी बताए गए ट्रेनिंग सेंटर पहुंचे, तो वहां कुछ भी नहीं मिला.
ओडिशा से जुड़े तार और पुलिस की कार्रवाई
एएसपी सदर अभिनव कुमार ने बताया कि इस गिरोह ने अपनी वेबसाइट को ऑपरेट करने के लिए ओडिशा की एक कंपनी की मदद ली थी. पुलिस को इस फर्जीवाड़े की भनक तब लगी जब पीड़ितों ने जक्कनपुर और रामकृष्ण नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई.
वेबसाइट को विश्वसनीय दिखाने के लिए ओडिशा की एक कंपनी की तकनीकी मदद ली गई थी. फेसबुक, इंस्टाग्राम और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगातार विज्ञापन चलाए जा रहे थे, जिससे नौकरी तलाश रहे युवाओं को यह पूरी प्रक्रिया असली लगती थी.
छापेमारी के दौरान पुलिस ने दो आरोपियों को रंगे हाथ इंटरव्यू लेते हुए पकड़ा. पकड़े गए बदमाशों में सुपौल का अखिलेश, नवादा का दिनेश और मधेपुरा का नवनीत शामिल हैं. जांच में पता चला है कि यह गोरखधंधा पिछले दो वर्षों से बेधड़क चल रहा था. पुलिस अब सरगना को रिमांड पर लेकर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस सिंडिकेट में और कौन-कौन से सफेदपोश शामिल हैं.
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