ऑपरेशन बुलडोजर : भू-माफियाओं ने आवास बोर्ड की भूमि से बनाये करोड़ों, पटना हाइकोर्ट में होगी आज सुनवाई
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 06 Jul 2022 7:19 AM
भूमि माफियाओं ने राजीव नगर में आवास बोर्ड की जमीन को बेच कर करोड़ों रुपये बनाये. इन माफियाओं ने बिना निबंधन के को-ऑपरेटिव सोसाइटी बनायी और उसके माध्यम से आवास बोर्ड द्वारा अधिगृहीत अधिकांश जमीन बेच दी.
पटना. भूमि माफियाओं ने राजीव नगर में आवास बोर्ड की जमीन को बेच कर करोड़ों रुपये बनाये. इन माफियाओं ने बिना निबंधन के को-ऑपरेटिव सोसाइटी बनायी और उसके माध्यम से आवास बोर्ड द्वारा अधिगृहीत अधिकांश जमीन बेच दी. जमीन को बेचने और कब्जा करने का खेल लगातार चलता रहा. अभी उसी जमीन की कीमत 30-40 लाख रुपये तक पहुंच गयी.
जमीन की कीमत इसलिए भी बढ़ गयी कि भूमि माफियाओं ने सेटिंग करके सड़क तक बनवा ली और बिजली कनेक्शन की भी व्यवस्था कर ली. सारा काम प्रशासन के सामने होता रहा और लोगों ने भी समझ लिया कि इतने कम दाम में इतनी अच्छी जमीन नहीं मिलेगी. इसके बाद भू-माफियाओं के चंगुल में फंस कर लोगों ने जमीन खरीद ली.
आवास बोर्ड की जमीन को खरीदने के साथ ही उस पर मकान बनवाने का पूरा ठेका लेने वाले लोग भी खड़े हो गये थे. ये लोग काम कराने के लिए सामान्य से अधिक रकम लेते थे. किसी ने अगर जमीन खरीदी और उसे मकान बनवाना है, तो खर्च अलग से देना होता था. इसके बाद जमीन पर रात में मकान बनाने का कार्य किया जाता था.
पटना हाइकोर्ट में बुधवार को नेपाली नगर में अवैध अतिक्रमण को हटाये जाने के मामले पर सुनवाई होगी. न्यायाधीश संदीप कुमार दोपहर सवा दो बजे इससे संबंधित याचिका पर सुनवाई करेंगे. सोमवार को कोर्ट ने सुनवाई के बाद नेपाली नगर में मकानों को तोड़े जाने और विरोध करने वालों के खिलाफ किसी तरह की बलपूर्वक कार्रवाई पर रोक लगाने का आदेश दिया था.
राजीव नगर स्थित आवास बोर्ड की जमीन को बेचने में निराला गृह निर्माण समिति व ललित फेडरेशन के नाम पुलिस के समक्ष आ चुके हैं. इन दोनों ही समितियों के खिलाफ राजीव नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है और दोनों के ही अध्यक्ष व सचिव को आरोपित बनाया गया है. निराला गृह निर्माण समिति के अध्यक्ष सत्यनारायण सिंह हैं, जबकि ललित फेडरेशन के अध्यक्ष व सचिव की पहचान की जा रही है.
सत्यनारायण सिंह व उनके बेटे की पहचान भूमि माफिया के रूप में रही है. उन्होंने ही आवास बोर्ड की जमीन को अंधाधुंध बेचा. इस काम में उनका भतीजा नीरज सिंह भी सहयोगी रहा. लेकिन, उसने भी बाद में अपना अलग सिस्टम बना लिया. इसके बाद सत्यनारायण सिंह व नीरज सिंह के गुटों के बीच में कई बार गोलीबारी हुई और कई घायल हुए.
राजीव नगर की जमीन की रजिस्ट्री पटना में नहीं होती है. इस जमीन पर कब्जा के लिए भूमि माफियाओं ने सेटिंग कर कोलकाता से जमीन की रजिस्ट्री और पॉवर ऑफ अटार्नी भी करायी.
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