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ओडिशा ट्रेन हादसा: पटरियों पर था शवों का अंबार, काल के मुंह से लौटे यात्रियों ने खौफनाक मंजर के बारे में बताया

Updated at : 04 Jun 2023 2:47 PM (IST)
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ओडिशा ट्रेन हादसा: पटरियों पर था शवों का अंबार, काल के मुंह से लौटे यात्रियों ने खौफनाक मंजर के बारे में बताया

ओडिशा के बालासोर में हुआ भीषण ट्रेन हादसा दिल दहलाने वाला है. पटरियों पर शवों का अंबार लगा हुआ था. उस ट्रेन में यात्रा कर रहे लोगों में जमुई जिले के चंद्रमंडीह थाना क्षेत्र के महेशापत्थर गांव निवासी शीतल टुड्डू के पुत्र अजीत टुड्डू भी शामिल थे.

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Odisha Train Accident: ओडिशा के बालासोर में भीषण ट्रेन हादसा दिल दहलाने वाला है. पटरियों पर शवों का अंबार लगा हुआ था. उस ट्रेन में यात्रा कर रहे लोगों में जमुई जिले के चंद्रमंडीह थाना क्षेत्र के महेशापत्थर गांव निवासी शीतल टुड्डू के पुत्र अजीत टुड्डू भी शामिल थे. अजीत ने बताया कि शाम 7:30 बजे के करीब का वक्त होगा, जिस समय यह हादसा हुआ. हम लोग बैंगलोर से यशवंतपुर एक्सप्रेस में चढ़े थे और हावड़ा जा रहे थे. हमें हावड़ा पहुंचने में ढाई घंटे का वक्त और लगने वाला था. इसलिए हम सब खाना खाकर बोगी में ही बैठे हुए थे. तभी अचानक ऐसे लगा जैसे किसी बड़े ट्रक ने हमें पीछे से ठोकर मार दी हो और हमें तेज झटका लगा. साथ ही काफी तेज आवाज हुई और चारों तरफ अंधेरा छा गया.

थोड़ी देर के लिए हम सब बदहवास हो गए- यात्री

अजीत ने बताया कि थोड़ी देर के लिए हम सब बदहवास हो गए और हमारी स्थिति ऐसी नहीं थी कि हम कुछ देख समझ सके. उस ट्रेन में मेरे अलावा और तीन दोस्त भी थे. जिसमें, श्यामलाल हेंब्रम, विकास किस्कु, राम किस्कु एक अन्य युवक शामिल था. हम सब अपने बीमार दोस्त को घर लेकर आ रहे थे, इसी दौरान यह हादसा हुआ. यात्री ने बताया कि थोड़ी देर बेहोशी की हालत में पड़े रहने के बाद जब उनकी आंख खुली तब पता लगा कि वह ट्रेन की सीट के नीचे फंस गए है. उनका दोस्त श्यामलाल हेंब्रम ने सहायता से उन्हें ट्रेन की सीट के नीचे से बाहर निकाला.

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पटरियों पर बिछी थी लाशें- अजीत

अजीत आगे बताते है कि चारों तरफ अंधेरा था और हम अपने दोस्तों को ढूंढना चाह रहे थे, लगातार उनका नाम पुकारने के बाद भी, जब उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया. तब, हम उन्हें ढूंढते हुए ट्रेन से बाहर उतरे. जैसे ही हम ट्रेन से बाहर निकले हमने देखा कि वही पटरियों पर लाशें बिछी हुई थी है. हर तरफ लोग जमीन पर पड़े हुए थे, वह कराह रहे थे और मदद के लिए पुकार रहे थे. उन्हीं में से एक हमारा दोस्त विकास भी था, जिसकी हालत काफी खराब थी. हमने वहीं पास ही में पड़ा पानी का एक बोतल उठाया और उसे पानी पिला कर उसकी देखभाल करने लगे तथा अपने दूसरे दोस्त को ढूंढ रहे थे. तभी हमारी नजर रेलवे लाइन के किनारे लगी झाड़ियों पर गयी, वहां राम पड़ा हुआ था, उसकी मौत हो गयी थी.

हादसे के बाद चारों तरफ मची चीख-पुकार

हादसे के बाद चारों तरफ चीख-पुकार मची हुई थी और लोग चिल्ला रहे थे. थोड़ी ही देर में पास के गांव के लोग वहां पहुंच गए और उन्होंने ही पुलिस तथा एंबुलेंस को फोन कर इस हादसे की जानकारी दी. अजीत ने कहा कि हादसे के बाद तो हमें ऐसा लगने लगा था कि हम जिंदा नहीं बच सकेंगे, लेकिन जब बचाव दल वहां पहुंचा तब उन्होंने हमें इलाज के लिए पास ही के एक अस्पताल में भर्ती करा दिया. गौरतलब है कि इस भीषण ट्रेन हादसे में 233 से अधिक लोगों की मौत हो गयी, जबकि 900 लोग घायल हो गये हैं. मरने वालों में जमुई के भी दो युवक शामिल हैं तथा दो युवकों की हालत गंभीर बतायी जा रही है. इसके अलावा दो अन्य युवक ऐसे हैं जो अभी तक लापता हैं. और उनका कुछ भी पता नहीं चल सका है.

रिपोर्ट: गुलशन कश्यप, जमुई

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