मंडलकारा में ठंड लगने से एक बंदी की मौत, शराब मामले में था बंद

Published by : MANOJ KUMAR Updated At : 06 Jan 2026 7:07 PM

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Nawada news. मंडलकारा नवादा में ठंड की चपेट में आने से एक बंदी की मौत हो गयी है. शराब के एक मामले में व्यवहार न्यायालय अनन्य विशेष न्यायाधीश के आदेश पर पिछले माह 22 दिसंबर से जेल में जेल में बंद था.

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पावापुरी मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचने से पहले तोड़ा दम

नहाने के बाद कपड़ा पसारने के दौरान गिरने से हुआ था बेहोश

प्रतिनिधि, नवादा कार्यालय

मंडलकारा नवादा में ठंड की चपेट में आने से एक बंदी की मौत हो गयी है. शराब के एक मामले में व्यवहार न्यायालय अनन्य विशेष न्यायाधीश के आदेश पर पिछले माह 22 दिसंबर से जेल में जेल में बंद था. मंगलवार की सुबह करीब 10 बजे विम्स पावापुरी पहुंचने से पहले बंदी ने दम तोड़ दिया. मंडलकारा अधीक्षक बृजेश सिंह मेहता ने बताया कि मंगलवार की सुबह नहाने के बाद कपड़ा पसारने गया था. इसी बीच अचानक गिर गया, जिससे बेहोश हो गया. उसे अन्य बंदियों और कर्मियों के सहयोग से आनन-फानन में जेल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सक ने चेकअप किया, तो उसका ब्लड प्रेशर और प्लास रेट काफी बढ़ा हुआ पाया गया. प्राथमिक उपचार के बाद उसे सदर अस्पताल रेफर किया गया. गंभीर स्थिति को देखते हुए सदर अस्पताल से वर्द्धमान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (विम्स) पावापुरी के अस्पताल में भेजा गया. पीड़ित बंदी को पावापुरी पहुंचाया गया, जहां चिकित्सक ने देखते ही मृत घोषित कर दिया. उन्होंने बताया कि मृतक बंदी पिछले माह 22 दिसंबर को शराब के मामले में जेल पहुंचा था, जो हिसुआ थाना क्षेत्र के हिसुआ बाजार स्थित तेली टोला निवासी कृष्णा साव का 58 वर्षीय बेटा मनोज साव था. परिजनों की जानकारी दे दी गयी है. शव को पोस्टमार्टम के लिए पीएमसीएच पटना भेजा गया है, क्योंकि न्यायिक हिरासत में मौत के बाद तीन सदस्यीय फॉरेंसिक टीम के द्वारा पोस्टमार्टम की प्रक्रिया की जाती हैं. पोस्टमार्टम के बाद शव को परिजनों को विधिवत सौंप दिया जायेगा.

परिजनों ने की न्यायिक जांच की मांग

ऐसे बंदी की मौत का कारण पोस्टमार्टम के बाद ही स्पष्ट हो पायेगा, लेकिन परिजनों का आरोप है जेल प्रशासन की लापरवाही से ही मौत हुई है. बंदियों के लिए कड़ाके की ठंड और शीतलहर से बचाव के लिए समुचित व्यवस्था नहीं रहने की कारण आये दिन बंदी बीमार पड़ रहे हैं. अगर समय पर इलाज होता तो मौत से बचाया जा सकता था. परिजनों ने न्यायिक जांच की मांग की हैं. खैर मौत की कारण जांच बाद ही स्पष्ट हो पाएगा,लेकिन पिछले एक वर्ष में यह तीसरी बंदी की मौत हुई हैं,इसके एक सप्ताह पहले इलाज की दौरान ही एक बंदी सदर अस्पताल से ही फरार हो गया था. जिससे पुलिस आज तक गिरफ्तार नहीं कर सकी. ऐसे मंडलकारा में मौत के बाद जिला मुख्य दंडाधिकारी के नेतृत्व में न्यायिक जांच की प्रक्रिया थी, लेकिन नये बीएनएस कानून में न्यायिक जांच या जिलाधिकारी के आदेश पर एसडीओ स्तर की पदाधिकारी के नेतृत्व में मजिस्ट्रेट इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट की तहत जांच प्रक्रिया की जायेगी.

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