नवादा में 1000 छात्रों के भविष्य से खिलवाड़! दो कमरों के भरोसे चल रहा पकरीबरावां का यह +2 स्कूल

Published by : Aditya Kumar Ravi Updated At : 31 May 2026 4:32 PM

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स्कूल

Nawada News: नवादा के पकरीबरावां प्रखंड के ढोंढा स्थित महंत गणेशदत्त पुरी +2 उच्च विद्यालय में भवन की कमी के कारण 1000 से अधिक छात्र-छात्राओं की पढ़ाई बाधित हो रही है. साल 2022 में इंटर का दर्जा मिलने के बावजूद स्कूल केवल दो कमरों और एक पुराने प्रयोगशाला भवन के सहारे चल रहा है, जबकि यहां 28 शिक्षक कार्यरत हैं. प्रभारी प्रधानाध्यापक दिलीप कुमार और मुखिया प्रतिनिधि चंद्रमा यादव द्वारा कई बार गुहार लगाने तथा एमएलसी अशोक यादव द्वारा विधान परिषद में आवाज उठाने के बाद भी शिक्षा विभाग ने भवन निर्माण के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है, जिससे ग्रामीणों और अभिभावकों में भारी आक्रोश है.

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Nawada News (विश्वनाथ कुमार): नवादा जिले के पकरीबरावां प्रखंड अंतर्गत ढोंढा गांव स्थित महंत गणेशदत्त पुरी +2 उच्च विद्यालय इन दिनों भारी प्रशासनिक उपेक्षा और बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) के घोर अभाव से जूझ रहा है. यह विद्यालय भवन के अभाव में पिछले कई वर्षों से महज दो कमरों के भरोसे किसी तरह संचालित हो रहा है. विडंबना यह है कि वर्ष 2022 में इस संस्थान को बकायदा इंटर विद्यालय (+2) का दर्जा तो दे दिया गया, लेकिन इसके अपग्रेडेशन के दो साल बाद भी विद्यालय को आज तक अपना नया भवन नसीब नहीं हो सका है. इसके कारण यहां नामांकित एक हजार से अधिक छात्र-छात्राओं की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है और उनका शैक्षणिक भविष्य दांव पर लगा हुआ है.

प्रायोगिक भवन में चल रही हैं कक्षाएं, एक ही कमरे में कई क्लास के बच्चे बैठने को मजबूर

विद्यालय के मौजूदा संसाधनों की स्थिति बेहद दयनीय है. कैंपस में वर्तमान में केवल दो छोटे कमरे ही मुख्य रूप से उपलब्ध हैं, जिनमें से एक कमरे का उपयोग प्रशासनिक कार्यालय के रूप में और दूसरे का उपयोग स्टाफ रूम (शिक्षकों के बैठने) के लिए किया जा रहा है.

ऐसे में बच्चों को पढ़ाने के लिए करीब आठ वर्ष पूर्व निर्मित दो कमरों वाले एक छोटे से प्रयोगशाला (लैब) भवन का इस्तेमाल किया जा रहा है. विद्यालय में छात्र-छात्राओं के नामांकन की संख्या साल-दर-साल लगातार बढ़ रही है, और वर्तमान में यहां कुल 28 शिक्षक-शिक्षिकाएं कार्यरत हैं. पर्याप्त कक्षाओं (क्लासरूम) के अभाव में विवश होकर कई अलग-अलग वर्गों के विद्यार्थियों को एक ही कमरे में भेड़-बकरियों की तरह एक साथ बैठाकर पढ़ाना पड़ रहा है, जिससे न तो बच्चे कुछ समझ पा रहे हैं और न ही शिक्षक सही से ध्यान दे पा रहे हैं.

ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर भी अपडेट है समस्या, लेकिन विभाग की सुस्ती बरकरार

विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक दिलीप कुमार ने इस बदहाली पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि नए भवन निर्माण की सख्त आवश्यकता को लेकर कई बार लिखित रूप से शिक्षा विभाग के वरीय अधिकारियों को अवगत कराया गया है. सरकार के नियमानुसार विद्यालय की इस भौतिक और बुनियादी आवश्यकता को ‘ई-शिक्षा कोष’ पोर्टल पर भी नियमित रूप से डिजिटल तौर पर अपडेट किया जाता रहा है, लेकिन इसके बावजूद अब तक शिक्षा विभाग की ओर से भवन निर्माण को लेकर कोई ठोस या सकारात्मक जमीनी पहल नहीं की गई है.

एमएलसी अशोक यादव ने विधान परिषद में उठाया सवाल, मुखिया प्रतिनिधि ने बनवाई बाउंड्री वॉल

विद्यालय की इस विकराल समस्या को लेकर हाल ही में बिहार विधान परिषद (लेजिस्लेटिव काउंसिल) के सत्र में स्थानीय एमएलसी अशोक यादव ने भी तारांकित प्रश्न उठाया था. उन्होंने सदन के माध्यम से शिक्षा विभाग से इस सुदूरवर्ती ग्रामीण विद्यालय के भवन निर्माण के लिए तुरंत फंड जारी करने और आवश्यक दंडात्मक कार्रवाई करने की पुरजोर मांग की थी.

दूसरी ओर, स्थानीय मुखिया प्रतिनिधि चंद्रमा यादव के निजी प्रयासों से वर्तमान में विद्यालय की सुरक्षा के लिए चारदीवारी (बाउंड्री वॉल) का निर्माण तो करा दिया गया है, लेकिन मुख्य संकट कमरों का है. मुखिया प्रतिनिधि ने बताया कि भवन निर्माण की प्रशासनिक स्वीकृति के लिए उन्होंने स्वयं कई बार जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) सहित पटना के विभागीय आला अधिकारियों से व्यक्तिगत संपर्क साधा है, परंतु आश्वासन के सिवा कुछ हाथ नहीं लगा.

बारिश के दिनों में ठप हो जाता है पठन-पाठन, ग्रामीणों ने की परमानेंट बिल्डिंग की मांग

विद्यालय में सुचारू भवन नहीं होने से अब छात्र-छात्राओं के साथ-साथ उनके अभिभावकों की भी चिंता और मानसिक तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. परेशान अभिभावकों का साफ कहना है कि इंटर स्तर का बड़ा विद्यालय होने के बावजूद बुनियादी सुविधाओं का यह घोर अभाव बच्चों की मानसिकता और उनकी शिक्षा पर बेहद प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है. विशेषकर आगामी मानसून और बारिश के दिनों में सीमित जगह होने के कारण छत से पानी टपकने और कीचड़ के चलते नियमित पठन-पाठन पूरी तरह ठप हो जाता है.

स्थानीय ग्रामीणों एवं विद्यालय शिक्षा प्रबंधन समिति के सक्रिय सदस्यों ने बिहार सरकार और शिक्षा विभाग के मुख्य सचिव से अविलंब संज्ञान लेते हुए यहां एक बहुमंजिला भवन निर्माण कराने की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि यहां पर्याप्त भवन और आधुनिक शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध करा दिए जाएं, तो यह विद्यालय आसपास के दर्जनों गांवों के गरीब छात्र-छात्राओं के लिए एक बेहतरीन और आदर्श शैक्षणिक केंद्र बनकर उभर सकता है.

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