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बांझपन निवारण शिविर में 119 मवेशियों की हुई मुफ्त जांच

Updated at : 03 Jan 2026 6:29 PM (IST)
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बांझपन निवारण शिविर में 119 मवेशियों की हुई मुफ्त जांच

NAWADA NEWS.शनिवार को रजौली प्रखंड की चितरकोली पंचायत में पशु बांझपन निवारण शिविर का आयोजन किया गया. पशु चिकित्सालय सपही के तत्वावधान में आयोजित इस शिविर ने न केवल पशुओं के स्वास्थ्य की रक्षा का संदेश दिया, बल्कि आधुनिक पशुपालन के वैज्ञानिक तौर-तरीकों से भी ग्रामीणों को रूबरू कराया.

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पशुपालकों की समृद्धि के लिए सपही चिकित्सालय की पहल, विशेषज्ञों ने दिये पशुओं में बांझपन से बचाव के टिप्स फोटो कैप्शन – फीता काटकर उद्घाटन करते प्रमुख, चिकित्सक व अन्य प्रतिनिधि, रजौली शनिवार को रजौली प्रखंड की चितरकोली पंचायत में पशु बांझपन निवारण शिविर का आयोजन किया गया. पशु चिकित्सालय सपही के तत्वावधान में आयोजित इस शिविर ने न केवल पशुओं के स्वास्थ्य की रक्षा का संदेश दिया, बल्कि आधुनिक पशुपालन के वैज्ञानिक तौर-तरीकों से भी ग्रामीणों को रूबरू कराया. कड़ाके की ठंड के बावजूद सुबह से ही चितरकोली और आसपास के क्षेत्रों से पशुपालक अपने गाय और भैंसों को लेकर शिविर स्थल पर पहुंचने लगे थे. शिविर की औपचारिक शुरुआत प्रमुख प्रतिनिधि सह पैक्स अध्यक्ष रबिंद्र कुमार उर्फ बबलू यादव की अध्यक्षता में हुई. उन्होंने कहा कि पशुपालकों की आय को दोगुना करने के लिए पशुओं का स्वस्थ और प्रजननक्षम होना अनिवार्य है. कहा कि जब पशु चिकित्सक सीधे किसानों के द्वार तक पहुंचते हैं, तभी सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचता है. इस मौके पर विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित मुखिया प्रतिनिधि मनोज कुमार ने भी पशुपालकों को जागरूक करते हुए कहा कि पशुओं में बांझपन की समस्या अक्सर पोषण की कमी और अज्ञानता के कारण होती है, जिसे सही समय पर डॉक्टरी सलाह लेकर दूर किया जा सकता है. चिकित्सा दल का नेतृत्व कर रहे डॉ नीरज कुमार सिंह, डॉ रेषु कुमार और डॉ अभय कुमार ने प्रत्येक पशु की बारीकी से जांच की. इस टीम को तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए उमेश चौधरी, धीरज कपूर और सोनू कुमार जैसे अनुभवी कर्मी तत्पर दिखे. शिविर का मुख्य आकर्षण मोबाइल पशु चिकित्सा इकाई (एमवीयू) की मौजूदगी रही, जिसने अत्याधुनिक संसाधनों के जरिये जटिल मामलों के निदान में मदद की. एमवीयू टीम के डॉ. बिपिन बिहारी प्रसाद, पप्पू कुमार और विद्यासागर कुमार ने अपनी विशेषज्ञता से पशुपालकों को संतुष्ट किया. साथ ही,मैत्री कर्मी संजय कुमार, अशोक कुमार और सिद्धेश्वर यादव की सक्रियता ने शिविर के सफल क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी. अभियान के दौरान कुल 64 पशुपालकों ने अपना पंजीकरण कराया, जिनके कुल 119 पशुओं का निःशुल्क उपचार किया गया. चिकित्सकों ने जांच के दौरान पाया कि अधिकांश पशुओं में बांझपन का मुख्य कारण खनिज लवणों की कमी और गर्भाशय का उचित विकास न होना है. उपचार के साथ-साथ पशुपालकों को निःशुल्क दवाएं, कृमिनाशक दवाइयां और विटामिन सप्लीमेंट्स वितरित किये गये. डॉक्टरों ने पशुपालकों को परामर्श देते हुए बताया कि पशुओं के आहार में केवल घास या पुआल पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें संतुलित मात्रा में दाना और मिनरल मिक्सचर देना भी आवश्यक है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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