नवादा: मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना के तहत स्वास्थ्य विभाग की बड़ी पहल, दिल में छेद वाले बच्चों को मिल रही नई जिंदगी

Author Manoj|Edited by Vikash Jha
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डॉ रश्मि कुमारी आईडीएसपी इंचार्ज, सदर अस्पताल नवादा | Prabhat Khabar Network

डॉ रश्मि कुमारी आईडीएसपी इंचार्ज, सदर अस्पताल नवादा | Prabhat Khabar Network

नवादा जिले में मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना के तहत दिल में छेद वाले बच्चों को नया जीवन मिल रहा है. स्वास्थ्य विभाग पटना और अहमदाबाद में बच्चों का मुफ्त इलाज और सर्जरी करा रहा है. यह योजना जरूरतमंद परिवारों के लिए एक उम्मीद की किरण है.

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Nawada News: बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी 'मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना' के तहत नवादा जिला स्वास्थ्य विभाग की एक बड़ी और मानवीय पहल देखने को मिल रही है. जिला स्वास्थ्य समिति द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस योजना के माध्यम से प्रत्येक वर्ष जिले के दर्जनों जरूरतमंद बच्चों को नया जीवनदान दिया जा रहा है. राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) की जिला समन्वयक सह आईडीएसपी (IDSP) इंचार्ज डॉ. रश्मि कुमारी ने बताया कि सरकार इस योजना के अंतर्गत दिल में छेद (Congenital Heart Disease) के साथ पैदा हुए 0 से 18 वर्ष तक के बच्चों का संपूर्ण इलाज और सर्जरी पूरी तरह नि:शुल्क करा रही है.

पटना से अहमदाबाद तक हवाई मार्ग से नि:शुल्क सफर

योजना की विस्तृत कार्यप्रणाली की जानकारी देते हुए डॉ. रश्मि कुमारी ने बताया कि चिन्हित बच्चों के दिल की सफल सर्जरी कराई जाती है. इसके तहत प्राथमिक रूप से बच्चों का इलाज पटना के प्रतिष्ठित इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान (IGIC) में किया जाता है. यदि किन्हीं गंभीर कारणों या तकनीकी वजहों से बच्चों का इलाज पटना में संभव नहीं हो पाता है, तो उन्हें आगे की स्क्रीनिंग के बाद सरकारी खर्च पर हवाई जहाज (विमान) से श्री सत्य साईं अस्पताल, अहमदाबाद भेजा जाता है. मरीजों को उनके घर से अस्पताल ले जाने और ठीक होने के बाद वापस घर तक सुरक्षित पहुंचाने की पूरी व्यवस्था स्वास्थ्य विभाग द्वारा नि:शुल्क की जाती है. परिजनों को इसके लिए एक भी रुपया खर्च नहीं करना पड़ता है.

आंगनबाड़ी और स्कूलों में की जाती है बच्चों की स्क्रीनिंग

0 से 18 वर्ष तक के बच्चों में इस बीमारी का पता लगाने के लिए विभाग द्वारा हर महीने सघन स्क्रीनिंग (जांच) अभियान चलाया जाता है.

  • 0 से 6 वर्ष के बच्चे: इनकी जांच आशा (ASHA) और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के सहयोग से स्थानीय आंगनबाड़ी केंद्रों पर की जाती है.
  • 6 से 18 वर्ष के बच्चे: इनके लिए स्कूलों में विशेष स्क्रीनिंग कैंप लगाए जाते हैं.

इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य विभाग द्वारा विभिन्न जगहों पर कैनोपी (विशेष शिविर) लगाकर भी बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की जाती है. राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के अंतर्गत बाल हृदय योजना के तहत कुल 44 तरह की गंभीर बीमारियों को कवर किया जाता है, जिसमें चिन्हित होने वाले बच्चों को मुफ्त चिकित्सा दी जाती है.

एक बच्चे के इलाज पर आता है करीब 8 लाख का खर्च

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, हृदय रोग से ग्रसित एक बच्चे के मुकम्मल इलाज और सर्जरी पर लगभग 8 लाख रुपये तक का भारी-भरकम खर्च आता है. गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह खर्च उठा पाना नामुमकिन होता है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग इस पूरे खर्च का वहन खुद करता है. आंकड़ों की बात करें तो नवादा जिले में वित्तीय वर्ष 2024-25 में कुल 21 बच्चों को और वित्तीय वर्ष 2025-26 में 19 बच्चों को इस योजना के तहत नि:शुल्क और सफल इलाज मुहैया कराया गया है. ठीक होने के बाद भी विभाग समय-समय पर इन बच्चों के स्वास्थ्य की फॉलो-अप देखभाल करता रहता है.

जागरूकता जरूरी, ताकि अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे लाभ: डॉ. रश्मि कुमारी

सदर अस्पताल नवादा की आईडीएसपी इंचार्ज डॉ. रश्मि कुमारी ने समाज के प्रबुद्ध नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना सरकार की एक अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण पहल है. इससे गरीब परिवारों के बच्चों को देश के बेहतरीन अस्पतालों में मुफ्त इलाज मिल रहा है. उन्होंने कहा कि यह हम सभी की सामाजिक जिम्मेदारी है कि अपने आसपास के जरूरतमंद और पीड़ित बच्चों के परिवारों को इस योजना के प्रति जागरूक करें, ताकि कोई भी बच्चा पैसों के अभाव में दम न तोड़े. अभिभावकों को भी बच्चों में सांस फूलने या कमजोरी जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या जिला स्वास्थ्य विभाग से संपर्क करना चाहिए.


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