विश्व स्तनपान सप्ताह पर जागरूकता संगोष्ठी, विशेषज्ञों ने बताया मां के दूध का वैज्ञानिक महत्व

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कार्यक्रम में शामिल शिक्षक व विद्यार्थी

Nawada News : नवादा के राजेंद्र मेमोरियल वीमेंस कॉलेज में विश्व स्तनपान सप्ताह पर संगोष्ठी हुई। वैज्ञानिकों ने शिशु के स्वास्थ्य के लिए स्तनपान को अमृत के समान बताया।

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Nawada News : विश्व स्तनपान सप्ताह-2026 के अवसर पर राजेंद्र मेमोरियल वीमेंस कॉलेज, नवादा के गृह विज्ञान विभाग एवं आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) के संयुक्त तत्वावधान में जागरूकता संगोष्ठी का आयोजन किया गया. प्राचार्य डॉ. विनोद कुमार के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में कई विशेषज्ञ ऑनलाइन माध्यम से जुड़े. कार्यक्रम का विषय था- 'जीवन की स्थायी शुरुआत के लिए स्तनपान : जो कारगर है, उसे मजबूत करें.' संगोष्ठी में देश की दो प्रतिष्ठित महिला वैज्ञानिकों ने छात्राओं को स्तनपान के वैज्ञानिक महत्व की जानकारी दी.

जन्म के पहले घंटे में स्तनपान शुरू करने पर दिया जोर

बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, झारखंड से संबद्ध कृषि विज्ञान केंद्र, पाकुड़ की वैज्ञानिक एवं विषय विशेषज्ञ डॉ. माया कुमारी ने अपने व्याख्यान में जन्म के पहले घंटे में स्तनपान शुरू करने, कोलोस्ट्रम (पहला पीला दूध) के महत्व, छह माह तक केवल स्तनपान कराने तथा मां और शिशु के स्वास्थ्य पर इसके सकारात्मक प्रभावों की विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने कहा कि स्तनपान को बढ़ावा देने में परिवार, स्वास्थ्यकर्मियों और समाज की सक्रिय भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है.

'मां का पहला दूध अमृत के समान'

डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के खाद्य विज्ञान एवं पोषण विभाग की मुख्य वैज्ञानिक एवं सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय की डीन प्रो. उषा सिंह ने स्तनपान को स्वस्थ शिशु, स्वस्थ परिवार और सशक्त समाज की पहचान बताया. उन्होंने सरल भाषा में स्तनपान के लाभ बताते हुए कहा कि हर बच्चे को जीवन की सर्वोत्तम शुरुआत देने के लिए स्तनपान को बढ़ावा देना और इस दिशा में प्रभावी व्यवस्थाओं को और मजबूत करना जरूरी है. उन्होंने कहा कि मां का पहला गाढ़ा दूध, जिसे कोलोस्ट्रम कहा जाता है, अमृत के समान होता है और स्वस्थ पीढ़ी की शुरुआत इसी से होती है.

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पौष्टिक आहार और संतुलित खानपान पर भी हुई चर्चा

प्रो. उषा सिंह ने कहा कि संतुलित खानपान अपनाकर माताएं अपने बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं. उन्होंने बताया कि घर में उपलब्ध सामान्य खाद्य पदार्थों की पोषण क्षमता का सही उपयोग कर उन्हें पौष्टिक आहार के रूप में अपनाया जा सकता है, जिससे बच्चों को बेहतर पोषण और रोगों से सुरक्षा मिलती है.

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वैज्ञानिकों का जताया आभार

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. विनोद कुमार ने दोनों वैज्ञानिकों का आभार व्यक्त किया. कार्यक्रम का संचालन डॉ. स्मिता कुमारी ने किया, जबकि छात्रा मानसी जैन ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया. डॉ. रितु कुमारी और डॉ. मुमताज बेगम ने भी कार्यक्रम में महत्वपूर्ण योगदान दिया.

शिक्षकों और कर्मियों की रही सक्रिय भागीदारी

कार्यक्रम को सफल बनाने में महाविद्यालय के शिक्षक डॉ. अनिल कुमार पटेल, डॉ. नंदिता, डॉ. वसुंधरा कुमारी, डॉ. रितु कुमारी, डॉ. अर्पणा सिन्हा, डॉ. आशा प्रसाद, अतिथि शिक्षकों तथा कर्मियों में पीयूष शुभम, रविशंकर, अविनाश, सोनू, धर्मपाल, नितिन और मुकेश सहित अन्य लोगों की सक्रिय भागीदारी रही.

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