परिवार नियोजन में पुरुषों की सहभागिता कम

Updated at : 24 Dec 2016 7:55 AM (IST)
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परिवार नियोजन में पुरुषों की सहभागिता कम

महिला बंध्याकरण में नवादा अव्वल जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध है सुविधा परिवार कल्याण के तहत मिलते हैं रुपये, बावजूद पुरुष नहीं करवाते नसबंदी नवादा. लगातार बढ़ रही आबादी से विगत दशक में प्राकृतिक संसाधनों पर जबरदस्त दबाव बढ़ा हैं. शहरों में भी सीमित आधारभूत सुविधाएं बौनी साबित हो रही हैं. कमोबेश जिले […]

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महिला बंध्याकरण में नवादा अव्वल
जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध है सुविधा
परिवार कल्याण के तहत मिलते हैं रुपये, बावजूद पुरुष नहीं करवाते नसबंदी
नवादा. लगातार बढ़ रही आबादी से विगत दशक में प्राकृतिक संसाधनों पर जबरदस्त दबाव बढ़ा हैं.
शहरों में भी सीमित आधारभूत सुविधाएं बौनी साबित हो रही हैं. कमोबेश जिले में भी इस तरह के हालात उभर कर सामने आ रहे हैं. सरकार ने समस्या से निजात पाने को लेकर राष्ट्रीय जनसंख्या नीति के तहत कई कार्यक्रम चलाये हैं. सन 2045 तक देश की जनसंख्या को स्थिरता प्रदान करने को लेकर प्रचार प्रसार किया जा रहा हैं. कार्यक्रम में महिला बंध्याकरण व पुरुष नसबंदी पर काम चल रहा हैं.
बावजूद बढ़ती आबादी को रोकने में सभी उपाय ढाक के तीन पात साबित हो रहे हैं. जिला में परिवार कल्याण कार्यक्रम के तहत चल रहे उपाय पर प्रभात खबर की पड़ताल करती यह रिपोर्ट..
जनसंख्या पर रोक लगाने को सरकार द्वारा पुरुष व महिला को छोटा परिवार अपनाने पर बल दिया जा रहा हैं. परिवार की धुरी महिला व पुरुष की बराबर जिम्मेवारी के बावजूद जिले में परिवार नियोजन कार्यक्रम में पुरुषों की सहभागिता की कमी से कार्यक्रम धरातल पर आने में विफल हो रहा हैं. जिले भर में वर्ष 2016-17 के अप्रैल से नवंबर तक पुरुष नसबंदी के मात्र 21 ऑपरेशन हुए हैं. पुरुष नसबंदी को लेकर चले एनएसवी पखवारे में 18 ऑपरेशन हुए.
इससे कार्यक्रम में कुल मिला कर पुरुषों की भागीदारी 39 रही. यह इस अवधि में जिले भर में महिला बंध्याकरण के लिए हुए ऑपरेशन का मात्र 0.99 फीसद ही हैं. जिला भर में कुल 3795 महिलाओं का बंध्याकरण इस अवधि में किया गया हैं. सिविल सर्जन डॉ श्रीनाथ प्रसाद ने बताया कि प्रखंडों में नारदीगंज, नरहट, रोह जैसे जगहों पर पुरुष नसबंदी को लेकर लोग जागरूक हुए हैं. जबकि मुख्यालय में शिक्षित तबका और उच्च स्तरीय जीवन व्यतीत करनेवाली आबादी के बावजूद नसबंदी को लेकर लोग पिछड़े साबित हो रहे हैं.
समाज में फैली भ्रांतियों के कारण पुरुष नसबंदी करवाने से हिचकिचाते हैं. नसबंदी से मर्दाना ताकत में कमी सहित शारीरिक कमजोरी जैसी भ्रांतियों के कारण लोग इससे डरते हैं, जबकि ऐसा कुछ भी नही हैं. वैज्ञानिक रूप से किसी प्रकार की कमजोरी पुरुष को नहीं होती हैं. इसका ऑपरेशन पहले की तुलना में अब अधिक आसान हो गया हैं.
ऑपरेशन के बाद पुरुषों को लाभ के रूप में दो हजार रुपये भी दिये जाते हैं. लोगों के बीच जागरूकता फैलाने का काम लगातार किया जा रहा हैं. लेकिन लोगों की पुरानी सोच ही बाधक बनी हुई हैं. ऐसे में आशा से महिलाओं को जागरूक करके उनके पुरुषों को प्रेरित किया जा रहा हैं. जल्द ही इसके परिणाम आने लगेंगे. पुरुष नसबंदी पखवारा में लोगों को जागरूक करके इस दिशा में पहल की गयी हैं. धीरे-धीरे बेहतर परिणाम आने लगेंगे.
3795 महिलाओं का ऑपरेशन
मगध प्रमंडल में नवादा महिला बंध्याकरण कार्यक्रम में पिछले वर्ष तक अव्वल पायदान पर रहा हैं.अप्रैल 2016 से नवंबर तक कुल 3795 ऑपरेशन किये जा चुके हैं. इसमें वारिसलीगंज 398 बंध्याकरण के साथ पहले नंबर पर हैं, जबकि 145 बंध्याकरण ऑपरेशन के साथ काशीचक निचले पायदान पर हैं. सदर अस्पताल में कार्यरत परिवार कल्याण परामर्शी शैलेश कुमार बताते हैं कि अस्पताल में प्रसव कराने आनेवाली महिलाओं को दो बच्चे और उनमें निश्चित अंतराल रखने को लेकर विस्तृत जानकारी दी जाती हैं. गर्भधारण के साथ टीकाकरण व प्रसव तक की अवधि के विभिन्न चरणों में माता को जागरूक किया जाता हैं.
अस्थायी तौर से अनचाहे गर्भ से बचने के लिए ओसीपी, आइयूसीडी, पीपीआइयूसीडी, इसी पिल्स आदि की जानकारी दी जाती हैं. इससे महिलाओं में बंध्याकरण को लेकर पूरी तत्परता रहती हैं. लेकिन पुरुष ही इसमें पिछड़ जाते हैं. एनसीवी के तहत होनेवाले आसान से ऑपरेशन के बावजूद इनमें एक असहज भावना बनी रहती हैं. स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा लगातार इस दिशा में प्रयास किया जा रहा है.
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