रास्ता बंद, फिर भी ककोलत पहुंच रहे सैलानी

Updated at : 11 Jul 2016 2:21 AM (IST)
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रास्ता बंद, फिर भी ककोलत पहुंच रहे सैलानी

सीढ़ियों से अब तक नहीं हटाया गया पत्थर व मलबा गोविंदपुर : भारी बारिश के कारण हुई भूस्खलन के बाद ककोलत जल प्रपात की सीढ़ियों पर चट्टानों के गिर जाने से ककोलत कुंड तक जाने का रास्ता बंद हो गया है. सीढ़ियों पर गिरे चट्टानों का हटाने का काम अभी तक शुरू नहीं हुआ है. […]

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सीढ़ियों से अब तक नहीं हटाया गया पत्थर व मलबा

गोविंदपुर : भारी बारिश के कारण हुई भूस्खलन के बाद ककोलत जल प्रपात की सीढ़ियों पर चट्टानों के गिर जाने से ककोलत कुंड तक जाने का रास्ता बंद हो गया है. सीढ़ियों पर गिरे चट्टानों का हटाने का काम अभी तक शुरू नहीं हुआ है. केयर टेकर यमुना पासवान द्वारा प्रवेश द्वार पर रास्ता बंद कर बैरियर लगा दिया गया है. सैलानियों को कुंड के पास जाने से रोका दिया जा रहा है. चट्टान गिरने के कारण कुंड पर जाने में खतरा ही खतरा है.
बारिश के कारण कुंड में मलवा भी भर गया है. फिर भी रविवार को दो हजार से अधिक सैलानी ककोलत पहुंचे. केयर टेकर यमुना पासवान ने बताया कि ककोलत विकास परिषद के कार्यकर्ता सुरेश पासवान, कुंदन कुमार, बिरजू कुमार, पंकज कुमार, नवलेश कुमार व सभी कार्यकर्ताओं के सहयोग से कुंड से मलवा हटाने का काम शुरू किया गया था. लेकिन, ककोलत जल प्रपात में हुई क्षतिग्रस्त के बावजूद रविवार को गरमी से राहत पाने को दो हजार से अधिक सैलानी यहां पहुंचे.
औरंगाबाद, भागलपुर, जहानाबाद, पटना व झारखंड के कई जिला से सैलानी यहां पहुंचे. सैलानियो ने खुद के रिस्क पर जल प्रपात पर पहुंचे. काफी जिद के बाद केयर टेकर यमुना पासवान व ककोलत परिषद के कार्यकर्ता सैलानियों को लगे बैरियर से ऊपर नहीं जाने दिया. पटना से आये विकास कुमार, भागलपुर से नीतीश कुमार, कोडरमा के मोहन लाल, बोकारो के अजय कुमार, केंदुआ के मंटू महतो समेत अन्य जगहों से आये सैलानियों ने ककोलत बंद होने को लेकर नाराजगी जतायी. यह सभी लोग अपने परिवार व दोस्तों के साथ ककोलत शीतल जल प्रपात का आनंद उठाने आये थे.
इनलोगों का कहना था कि अगर ककोलत कुंड का रास्ता बंद कर दिया गया, तो सूचना प्रसारित की जानी चाहिए थी. ताकि सैलानियों को परेशानी न हो. सैलानियों ने कहा कि सीढ़ियों के रास्ते में पड़े पत्थर का चट्टान विभाग को अविलंब हटवा देना था. परंतु आज तक पत्थर को हटवाने के लेकर कोई कदम नहीं उठाया गया. केयर टेकर यमुना पासवान ने बताया कि सात जुलाई को वन विभाग के रेंजर अखिलेश प्रसाद ने टूटी सीढ़ियों व गिरे चट्टानों का मुआयना किया था. उन्होंने कहा था कि वरीय पदाधिकारी व इंजीनियर की सलाह के बाद ही चट्टानों को हटाने का काम किया जायेगा. यमुना पासवान ने कहा कि ककोलत को हुई क्षति के कारण रविवार को बढ़ी भीड़ को संभालने में काफी परेशानी हुई.
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