अब सिर्फ पांच बसें ही पटना व मुंगेर के लिए

Updated at : 05 Feb 2016 8:18 AM (IST)
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अब सिर्फ पांच बसें ही पटना व मुंगेर के लिए

बदहाल पड़े भवन, वर्कशॉप की कमी के कारण स्थिति दिन प्रतिदिन होती जा रही बदतर कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा परिवहन निगम चतुर्थवर्गीय कर्मचारी भी करते प्रधान सहायक का काम नवादा (सदर) : बिहार व झारखंड में कभी अपना पहचान रखनेवाला राज्य पथ परिवहन निगम का नवादा प्रतिष्ठान आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा […]

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बदहाल पड़े भवन, वर्कशॉप की कमी के कारण स्थिति दिन प्रतिदिन होती जा रही बदतर
कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा परिवहन निगम
चतुर्थवर्गीय कर्मचारी भी करते प्रधान सहायक का काम
नवादा (सदर) : बिहार व झारखंड में कभी अपना पहचान रखनेवाला राज्य पथ परिवहन निगम का नवादा प्रतिष्ठान आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है. 24 घंटे गुलजार रहनेवाला नवादा प्रतिष्ठान से सैकड़ों वाहन खुलते थे. पर, सरकार की अनदेखी से राज्य पथ परिवहन निगम का नवादा प्रतिष्ठान बदहाल स्थिति में पहुंच गया है.
नवादा प्रतिष्ठान में कर्मचारियों की कमी के कारण वाहनों का परिचालन भी सही ढंग से नहीं हो पा रहा है. प्रतिष्ठान से मात्र पांच बसें ही पटना व मुंगेर के लिए खुल रही है. 16 कर्मचारियों के भरोसे परिवहन निगम का नवादा प्रतिष्ठान प्रति माह छह से साढ़े छह लाख रुपये की आमदनी कर सरकारी राजस्व में वृद्धि कर रहा है. बदहाल पड़े भवन, वर्कशॉप की कमी के कारण स्थिति दिन प्रतिदिन बद से बदतर होते जा रही है. प्राइवेट वाहनों को अंगीभूत कर परिवहन निगम दो से ढ़ाई लाख रुपये की आमदनी कर रहा है. प्रतिवर्ष कर्मचारियों के सेवानिवृत्त होने के उपरांत नये कर्मचारियों की बहाली नहीं होने के कारण परिवहन निगम के चतुर्थवर्गीय कर्मचारी भी प्रधान सहायक का काम निबटाने को मजबूर हैं.
24 घंटे खुलते थे टाटा, रांची व बोकारो के लिए वाहन : नवादा प्रतिष्ठान का वह सुनहला दिन लोगों के लिए यादगार भरा छन बना हुआ है. आज से 25 वर्ष पहले नवादा प्रतिष्ठान से 24 घंटे बसों का खुलना जारी रहता था. मुजफ्फरपुर से खुल कर टाटा, रांची, बोकारो जानेवाली वाहनों का इंतजार लोग आधी रात को भी करते थे. चकाचौंध रोशनी के बीच यात्री प्रतिष्ठान के प्रतीक्षालय में इंतजार करते थे. समय बीतने के साथ-साथ नवादा प्रतिष्ठान की स्थिति भी बिगड़ने लगी. कभी यात्रियों के लिए चार-चार टिकट काउंटर बनाये गये थे.
पर इन दिनों एक काउंटर से भी टिकट लेने के लिए लोगों की भीड़ नहीं देखी जाती है. प्राइवेट बसों की कम संख्या होने के कारण दूर शहरों में जानेवाले लोग सरकारी बसों का इंतजार करते थे. अग्रिम बुकिंग कर टिकट ली जाती थी. परिवहन निगम की बसों से यात्रा को लोग सुखद यात्रा मानते थे. फिलहाल लक्जरी बसें के साथ-साथ अधिकांश लोगों के पास अपनी फोर व्हीलर वाहन होने का असर भी सरकारी बसों पर पड़ रहा है.
प्रतिष्ठान का था अपना वर्कशॉप व पेट्रोल पंप : पूरे प्रदेश में अपना स्थान टॉप पर रखने वाले निगम के नवादा प्रतिष्ठान में अपना वर्कशॉप व पेट्रोल पंप भी था. नवादा प्रतिष्ठान की वाहनों के साथ-साथ दूसरे प्रतिष्ठान से आनेवाले वाहन खराब होने पर ठीक कराये जाते थे.
अन्यत्र पेट्रोल पंप पर डीजल भराने की सुविधा नहीं थी. दूसरे प्रतिष्ठानों के वाहन भी नवादा प्रतिष्ठान में डीजल भराने आते थे. बदलते समय के साथ नवादा प्रतिष्ठान के पांच वाहन भी दूसरे पेट्रोल पंप पर डीजल भराते हैं. निगम के नवादा प्रतिष्ठान का पेट्रोल पंप पिछले 20 वर्षों से जर्जर बना हुआ है. मैकेनिक व सामान के अभाव में वर्कशॉप भी बंद हो गया है. न तो मिस्त्री हैं और न ही वाहनों को दुरुस्त करने वाले औजार. मरम्मत के अभाव में दो दर्जन से अधिक वाहन नवादा प्रतिष्ठान जर्जर की श्रेणी में खड़ी होकर प्रतिष्ठान की शोभा बढ़ा रही है.
अनुबंध पर चल रहीं 16 बसें : राज्य पथ परिवहन निगम की नवादा प्रतिष्ठान में पांच बसें ही चालू हालात में है, जो पटना व मुंगेर की सेवा यात्रियों को प्रदान कर रही है. झारखंड कोटे के नौ वाहन भी जर्जर होकर निलामी के लिए तैयार खड़ी है.
नवादा प्रतिष्ठान के अंतर्गत 16 प्राइवेट वाहनों को भी अनुबंध पर लिया गया है, जिसमें गोप ट्रांसपोर्ट के आठ, हवा हवाई के चार, महालक्ष्मी के एक, वेद प्रकाश के दो तथा बेगूसराय के एक बसें चल रही है. पिछले कई महीनों से मुरारी व कृष्णा चलने वाली 28 बसों को परमिट के अभाव में अनुबंध से मुक्त कर दिया गया है.
आमदनी अट्ठनी, खर्चा रुपया : परिवहन निगम में यह बातें चरितार्थ होती है कि आमदनी अट्ठनी और खर्चा रुपैया. जनवरी में नवादा प्रतिष्ठान से खुलने वाले वाहनों ने छह लाख 34 हजार 957 रुपये का मुनाफा दिया है.
वहीं अनुबंध पर चलने वाले वाहनों से विभाग ने जनवरी में दो लाख 20 हजार 780 रुपये का मुनाफ कमाया है. सरकार की ओर से नवादा प्रतिष्ठान में 16 रुपये 33 पैसे प्रति किलोमीटर की दर से चार लाख 50 हजार रुपये वाहन चलाने के लिए उपलब्ध कराये गये हैं. जबकि कर्मचारियों के वेतन के लिए विभाग ने तीन लाख आठ हजार तथा प्राइवेट चालकों के लिए 59 हजार रुपये उपलब्ध कराये गये हैं.
क्षमता से काफी कम हैं कर्मचारी : फिलहाल पांच निगम की बसें व 16 अनुबंध पर लिये गये प्राइवेट बसों को ससमय परिचालन कराने के लिए 40 कर्मचारियों की आवश्यकता है.
इसके जवाब में मात्र 16 कर्मचारी ही कार्यरत हैं. नवादा प्रतिष्ठान में रोकड़पाल के पद पर कार्यरत श्याम किशोर प्रसाद के 29 फरवरी को सेवानिवृत्त हो जाने के बाद प्रतिष्ठान की स्थिति और भी दयनीय बन जायेगी. नवादा प्रतिष्ठान के अधीक्षक कामख्या नारायण सिंह के नवादा के साथ-साथ गया के चार्ज में रहने के कारण भी प्रतिष्ठान चलाने में परेशानी उत्पन्न होती है.
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