जिले के 24 पशु अस्पतालों में उपलब्ध है सीमेन
Updated at : 03 Feb 2016 8:45 AM (IST)
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कृत्रिम गर्भधारण से दुधारू पशुओं की क्वालिटी में आ रहा परिवर्तन नवादा (नगर) : दुधारू पशुओं के नस्ल को सुधारने में कृत्रिम गर्भधारण की व्यवस्था लाभकारी साबित हो रही है. श्वेत क्रांति के जनक वर्गीज कुरियन के बताये रास्ते पर राज्य सरकार के सहयोग से जिला के 24 पशु अस्पतालों में यह सुविधा उपलब्ध करायी […]
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कृत्रिम गर्भधारण से दुधारू पशुओं की क्वालिटी में आ रहा परिवर्तन
नवादा (नगर) : दुधारू पशुओं के नस्ल को सुधारने में कृत्रिम गर्भधारण की व्यवस्था लाभकारी साबित हो रही है. श्वेत क्रांति के जनक वर्गीज कुरियन के बताये रास्ते पर राज्य सरकार के सहयोग से जिला के 24 पशु अस्पतालों में यह सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है. जेबु कैटल (देशी गाय) के नस्ल को सुधारने के लिए जिला स्तर पर भी प्रयास चल रहा है.
गाय से मिलनेवाले दूध की क्वालिटी बढ़े, प्रोडक्शन में विस्तार हो व पशुओं के बच्चों का मृत्यु दर कम हो. इसके लिए कृत्रिम गर्भधारण की व्यवस्था की जाती है. जिले में मुख्यालय के पशु अस्पताल के अलावा 23 अन्य पशु अस्पतालों में कृत्रिम गर्भधारण के लिए सीमेन उपलब्ध है. यहां पशुपालकों से शुल्क लेकर ब्रीडिंग की व्यवस्था करायी जाती है. सरकार की ओर से सामान्य जाति के लिए 40 रुपये तथा अनुसूचित जाति के लिए व्रिडिंग करवाने के लिए 25 रुपये शुल्क के रूप में लिये जाते हैं.
कई अच्छी नस्ल का सीमेन है उपलब्ध: जिले में पशुओं के गर्भधारण के लिए देशी व विदेशी नस्ल के सीमेन उपलब्ध है, जिससे क्रॉस ब्रीडिंग करा कर पशुओं के नस्ल को इंप्रूव किया जा रहा है.
जिले में सभी 24 पशु अस्पतालों में कम से कम माह में 50 पशुओं को कृत्रिम गर्भधारण कराने का लक्ष्य दिया गया है. इसके अनुसार खासकर गायों के देहाती नस्ल को सुधारने में काफी मदद मिली है. क्वालिटी सीमेन के द्वारा गाय के नस्ल में काफी सुधार हुआ है. यही कारण है कि इससे दूध के गुणवत्ता में सुधार के साथ ही उत्पादन भी बढ़ा है.
देशी नस्ल को बढ़ावा देने का हो रहा प्रयास: क्रॉस ब्रीडिंग द्वारा होनेवाले कृत्रिम गर्भधारण से जो बच्चे जन्म ले रहे हैं. उनकी नस्ल में सुधार तो हुआ है. लेकिन, इसकी मृत्यु दर अधिक है. प्रतिरोधक क्षमता में कमी के कारण गाय के होनेवाले बच्चे की मृत्यु दर बढ़ी है.
विदेशी नस्ल के सीमेन के कारण यहां के वातावरण में वैसे बच्चे सही ढंग से विकसित नहीं हो पा रहे थे. सर्वे के बाद देशी नस्ल के रेड सिंधी, साहिवाल, थारपारकर, मुर्रा जैसे नस्ल के सीमेन अब देहाती गायों को दिया जा रहा है. भैंस की अपेक्षा गाय को कृत्रिम गर्भधारण द्वारा गर्भवती बनाया जा रहा है.
विशेषज्ञ डॉक्टरों की देख-रेख में दिया जाता है सीमेन: जिला मुख्यालय के पशु चिकित्सालय के अलावा 23 अन्य स्थानों पर कृत्रिम गर्भधारण के लिए सीमेन उपलब्ध है. गाय या भैंस के जरूरत के अनुसार उन्हें यह सीमेन विशेषज्ञ डॉक्टरों की देख-रेख में दिया जाता है.
जिले के झिकटौरा, ओढनपुर, मोतीबिगहा, पकरीबरावां, गोविंदपुर, माधोपुर, रोह, रजौली, कौआकोल, मड़वागुलनी, फुल्डीह, सिरदला, वारिसलीगंज, जलालपुर, काशीचक, वाजिदपुर, हिसुआ, मंझवे, नारदीगंज, बस्तीबिगहा, नरहट, अकबरपुर व मेसकौर के पशु चिकित्सालयों में व्रिडिंग की व्यवस्था उपलब्ध है.
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