बेसहारा बच्चों को बाल कल्याण समिति पहुंचाएं

Updated at : 29 Jan 2016 8:06 AM (IST)
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बेसहारा बच्चों को बाल कल्याण समिति पहुंचाएं

नवादा (नगर) : कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से ही बच्चों को गोद लें. यदि कोई बेसहारा बच्चा मिले, तो उसे नजदीक के थाने या बाल कल्याण समिति में पहुंचाएं. उक्त बातें बाल संरक्षण इकाई की सहायक निदेशक गीतांजलि कुमारी ने कहीं. डीआरडीए भवन में गुरुवार को दत्तक ग्रहण व बाल अधिकार पर कार्यशाला का आयोजन […]

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नवादा (नगर) : कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से ही बच्चों को गोद लें. यदि कोई बेसहारा बच्चा मिले, तो उसे नजदीक के थाने या बाल कल्याण समिति में पहुंचाएं. उक्त बातें बाल संरक्षण इकाई की सहायक निदेशक गीतांजलि कुमारी ने कहीं.
डीआरडीए भवन में गुरुवार को दत्तक ग्रहण व बाल अधिकार पर कार्यशाला का आयोजन किया गया. इसका उद्घाटन सदर एसडीओ राजेश कुमार ने किया. उन्होंने कहा कि बाल अधिकार को सही तरीके से समझने की जरूरत है. बच्चों को गोद लेने के लिए विभागीय स्तर पर कई नियम कानून बनाये गये है. इसका सही ढंग से पालन किया जाना चाहिए.
कार्यक्रम में सहायक निदेशक बाल संरक्षण इकाई गीतांजलि कुमारी ने कहा कि लोगों को बच्चा गोद लेने से संबंधित जानकारियों का अभाव है. इसके लिए कई प्रकार की समस्याएं आती है. यदि कोई बेसहार बच्चा मिलता है, तो स्थानीय स्तर पर कोई उसे मानवता के नाते रख लेता है.
जबकि, नियम के अनुसार सबसे पहले स्थानीय थाना या बाल कल्याण समिति को तत्काल इसकी सूचना दी जानी चाहिए. कार्यक्रम में बाल संरक्षण पदाधिकारी उषा लता सिन्हा व वंदना गुप्ता ने विस्तार से बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि बच्चे को गोद लेने के लिए कई प्रकार की नियम बनाये गये हैं. गोद लेने की जो व्यवहारिक व्यवस्था है जो इसके बारे में खास कर जनप्रतिनिधियों को जानकारी होनी चाहिए. ताकि, जरूरतमंद दंपती आसानी से बच्चे को गोद ले सके. शून्य से 18 वर्ष तक के बच्चे को गोद लिया जा सकता है.
कार्यक्रम में बाल कल्याण समिति के जयरन कुमारी व रीता कुमारी ने बेसहारा बच्चों के बारे में सही समय पर सूचना मिलने की समस्या बतायी. उन्होंने कहा कि सरकार के द्वारा कई प्रकार की व्यवस्था की गयी है.
ताकि अनाथ बच्चों का सही से परवरिश की जा सके. परवरिश योजना के तहत वैसे बच्चे जिनके माता-पिता की मृत्यु हो गयी है. वैसे शून्य से छह वर्ष तक के बच्चों को नौ सौ रुपये व सात से 18 साल के बच्चे को एक हजार रुपये दिया जाता है. कार्यक्रम में बाल अधिकारों से संबंधित कई प्रकार की जानकारी दी गयी. कार्यशाला में ममता संस्था से जुड़े रॉबिन, विनय कुमार, थाना प्रभारी व कई पंचायतों के जनप्रतिनिधि भी मौजूद थे.
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