बाढ़ में बचाव का तरीका बताया

Published at :13 Dec 2013 5:35 AM (IST)
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बाढ़ में बचाव का तरीका बताया

नवादा : आपदा से निबटने के लिए चलाये गये तीन दिवसीय प्रशिक्षण के बाद गुरुवार को स्थल पर प्रयोग के दौरान प्रशिक्षण दिया गया. बिहटा के नौ बटालियन नेशनल डिजास्टर रिस्पाउंस फोर्स के जवानों ने प्रशिक्षण देने का काम किया. बाढ़ या नदी तालाब, आहर पोखर में डूबने वाले इंसान को कैसे बचाया जाता है […]

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नवादा : आपदा से निबटने के लिए चलाये गये तीन दिवसीय प्रशिक्षण के बाद गुरुवार को स्थल पर प्रयोग के दौरान प्रशिक्षण दिया गया. बिहटा के नौ बटालियन नेशनल डिजास्टर रिस्पाउंस फोर्स के जवानों ने प्रशिक्षण देने का काम किया.

बाढ़ या नदी तालाब, आहर पोखर में डूबने वाले इंसान को कैसे बचाया जाता है इसका प्रशिक्षण शोभिया तालाब पर दिया गया.

फोर्स में शामिल एएसआइ राजवीर सिंह ने बताया कि गैर तैराकी व तैराकी वाले व्यक्तियों राफ्ट के माध्यम से बचाने का उपाय बताया गया. राफ्ट प्रशिक्षण में बताया गया कि बेकार सामानों से बचाव के उपाय किये जाते हैं, जिसमें बोतल, नारियल, तसला, बंबू, केला का थंब, चारपाई, थमौकोल, गैलन व ट्यूब का इस्तेमाल किया जा सकता है.

तैराकी वाले व्यक्ति डूबने वाले को चार तरह से बचा सकते हैं, जिसमें हेड टो, चीन टो, क्रॉस चेस टो तथा आम टो का तरीका शामिल है. उक्त सभी तरीकों पर फोर्स के जवानों ने तालाब में प्रयोग कर जानकारी दिया. उन्होंने बताया कि ड्राइ रेस्क्यू के तहत गैर तैराकी वाले व्यक्ति डूबने वाले को बाहर कोई समान फेंक कर बचा सकते हैं.

तालाब में प्रशिक्षण के दौरान तैराकी के विभिन्न तरीकों को भी सिखाया. प्रशिक्षण देने वाले जवानों में एएसआइ राजीवर सिंह के अलावा हेड कांस्टेबल विद्यानंद सिंह, कांस्टेबल अशोक कुमार, मंजी कुमार शर्मा तथा मकसूद खां शामिल थे. प्रशिक्षण में 30 मास्टर ट्रेनरों को प्रशिक्षण दिया गया जो प्रखंडों में प्रशिक्षण देंगे.

कैसे करना है बचाव

भूकंप-भूकंप आने पर मलबे में दबे लोगों को आवाज लगा कर मदद, पुकारने को कहा जाना तथा किसी ठोस वस्तु से ठोस वस्तु पर तीन बार प्रहार करने को कहा जाता है, ताकि पता लगे की मलबा में कोई दबा हुआ जिंदा व्यक्ति है. इससे बचाव दल चार तरह का रिबन इस्तेमाल करते हैं. सीरियस व्यक्ति को रेड रिबन बांधा जाता है. कम घायल को एलो व ग्रीन रिबन तथा मरने वाले को ब्लैक रिबन बांधा जाता है.

गैस सिलिंडर-गैस से आग लगने की घटना को रोकने के लिए सिलिंडर लेने से पहले उसमें ए,बी,सी,डी कोड दिया रहता है, जो उसके लाइफ को बताता है. साल भर का कोड 3-3 माह में बांट कर इस्तेमाल किया जाता है. जो सिलिंडर के वैलिडिटी को बताता है. कोड के साथ तिथि लिखा रहता है.

एक कोड का वैल्यू जनवरी से मार्च तक, बी कोड का वैल्यू अप्रैल से जून तक, सी कोड का वैल्यू जुलाई से सितंबर तक तथा डी कॉड का वैल्यू अक्तूबर से दिसंबर माह तक रहता है. इस कोड के आधार पर जांच कर लेने से सिलिंडर से होने वाली हादसा कम होती है.

डूबने व बाढ़-इस परिस्थिति में राफ्ट का इस्तेमाल कर डूबने वाले को बचाया जाता है. बचाने में डेड टो, चीन टो, क्रॉस चेस टो तथा आर्म टो से बचाव किया जाता है. राफ्ट में वैसी चीजें जो हल्की होती है और पानी में डूब नहीं सकता है उसका इस्तेमाल किया जाता है.

सांप काटने पर-देश में सांप की 275 प्रजातियां हैं, जिसमें 172 बगैर विषाणु वाले प्रजाति के सांप पाये जाते हैं. 42 सामान्य विषैला सांप तथा 61 विषैला सांप पाये जाते हैं. सांप काटने पर झाड़ फूंक नहीं करना चाहिए. सांप काटने पर इंसान को एभीएस इंजेक्शन लगा कर आसानी से बचाया जा सकता है.

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