जाम के लिए शहर याद रहेगा

Updated at : 31 Dec 2015 7:29 PM (IST)
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जाम के लिए शहर याद रहेगा

जाम के लिए शहर याद रहेगा जाम से निजात दिलाना प्रशासन के लिए पूरे साल बनी रही चुनौतीसमस्या के निदान के लिए अतिक्रमण मुख्य कारण फोटो-8प्रतिनिधि, नवादा (सदर)बीते वर्ष 2015 नवादा के लिए जाम का वर्ष के रूप में जाना जायेगा. शहर में लगने वाले जाम से निजात दिलाने के लिए प्रशासन की ओर से […]

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जाम के लिए शहर याद रहेगा जाम से निजात दिलाना प्रशासन के लिए पूरे साल बनी रही चुनौतीसमस्या के निदान के लिए अतिक्रमण मुख्य कारण फोटो-8प्रतिनिधि, नवादा (सदर)बीते वर्ष 2015 नवादा के लिए जाम का वर्ष के रूप में जाना जायेगा. शहर में लगने वाले जाम से निजात दिलाने के लिए प्रशासन की ओर से उठाये गये सभी कदम विफल साबित हुए. प्रशासन के लिए शहर को जाम से निजात दिलाना चुनौती बन गयी है. शहर में फैले अतिक्रमण के कारण समस्या का निदान नहीं हो पा रहा है. अतिक्रमणकारियों के खिलाफ प्रशासन की ओर से सख्त कदम नहीं उठाये जाने से जाम से निजात नहीं मिल पा रहा है. शहर का मेन रोड, अस्पताल रोड, विजय बाजार, गोला रोड, सोनार पट्टी रोड, स्टेशन रोड, पुरानी बाजार, कचहरी रोड, प्रसाद बिगहा रोड, नारदीगंज रोड, कलाली रोड, खुरी नदी पुल आदि मार्गों पर पूरे साल जाम का नजारा देखने को मिला. जाम से निजात दिलाने के लिए प्रशासन की ओर से उठाये गये कदम भी कारगर साबित नहीं हुए. गौरतलब है कि मेन रोड से अतिक्रमण हटाने को लेकर जिला प्रशासन की ओर से साल के पहले दिन ही अभियान चलाया गया था. तत्कालीन डीएम ललन जी, एसडीओ राजेश कुमार के साथ ही अनेक अधिकारियों ने अतिक्रमण हटाने के लिए लोगों से अपील की थी. एक-दो दिनों बाद ही फिर से अतिक्रमणकारी अपने पुराने स्थल पर पहुंच गये. सदर प्रखंड के सीओ ने भी अभियान चलाया था. परंतु, अतिक्रमणकारियों ने हमला बोल कर अधिकारी व पुलिस बलों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया था. शहर के अति व्यस्त मेन रोड में तो खुरी नदी पुल से लेकर प्रजातंत्र चौक तक पहुंचने में लोगों को एक घंटे से भी अधिक का समय लग जाता है. वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर कलाली रोड से पार नवादा जाने के लिए लोग इस्तेमाल करते है. परंतु, नारदीगंज रोड मोड़ पर हमेशा जाम लगने के कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा. वर्ष 2015 लोगों के जेहन में केवल जाम के नाम रहा. खुरी नदी पुल चुनौतीखुरी नदी पुल पर सड़क के दोनों किनारे बने फुटपाथ पर अतिक्रमण को हटाना प्रशासन के लिए चुनौती बन गयी है. प्रशासन की ओर से फुटपाथियों को अतिक्रमण क्षेत्र से हटाने के लिए कई बार कार्रवाई हुई, परंतु ऐसे दुकानदारों के लिए कोई अलग स्थल चयनित नहीं किये जाने के कारण फुटपाथी दुकानदारों को फुटपाथ पर दुकान लगाना मजबूरी बन गयी है.

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