नहीं पूरा हो रहा तालाब नर्मिाण का लक्ष्य

Updated at : 31 Dec 2015 6:58 PM (IST)
विज्ञापन
नहीं पूरा हो रहा तालाब नर्मिाण का लक्ष्य

नहीं पूरा हो रहा तालाब निर्माण का लक्ष्य सामान्य व एससी को तालाब बनाने के लिए मिलता है अनुदानकाफी प्रयास के बाद भी जिले में निर्माण कार्य में नहीं आ रही तेजीफोटो-11प्रतिनिधि, नवादा (नगर)मत्स्य पालन विभाग द्वारा मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए कई प्रकार के कार्यक्रम चलाये जा रहे है. लेकिन, इसका समुचित […]

विज्ञापन

नहीं पूरा हो रहा तालाब निर्माण का लक्ष्य सामान्य व एससी को तालाब बनाने के लिए मिलता है अनुदानकाफी प्रयास के बाद भी जिले में निर्माण कार्य में नहीं आ रही तेजीफोटो-11प्रतिनिधि, नवादा (नगर)मत्स्य पालन विभाग द्वारा मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए कई प्रकार के कार्यक्रम चलाये जा रहे है. लेकिन, इसका समुचित लाभ जिले के मछली पालकों को नहीं मिल रहा है. मछली पालन को बढ़ाने के लिए नये तालाब बनाने के लिए सरकार 50 से 90 प्रतिशत तक अनुदान उपलब्ध करा रही है. लेकिन, जिले में तालाब निर्माण में किसान रुचि नहीं ले रहे हैं. वित्तीय वर्ष 2015-16 में अनुसूचित जाति के 25 किसानों को मछली पालन के लिए तालाब बनाने के लिए 90 प्रतिशत तक का अनुदान दिया जा रहा है. बावजूद अब तक केवल नौ लोगों को ही इसका लाभ मिल पाया है. आधा एकड़ से अधिक जमीन पर तालाब बनाने के लिए बोरिंग पंप सेट का लाभ भी एससी समाज के लोगों को देना है. लेकिन मछली पालन के प्रति लोगों में उत्साह नहीं दिखता. विभागीय कागजी कार्रवाई की पेंचिदगी के कारण लोगों में नया तालाब बनाने के प्रति उत्साह कम दिखता है. इसी तरह सामान्य जाति के लोगों को नये तालाब बनाने में 50 प्रतिशत का अनुदान मिलता है. लेकिन, इसमें भी काफी आवेदन आये है. राष्ट्रीय कृषि विकास इकाई द्वारा जिले में तालाब व नये हैचरी का निर्माण कार्य कराने में तेजी लाने का निर्देश दिया गया है. विभागीय लापरवाही के कारण इसमें किसानों का रुचि कम दिख रहा है. खपत के अनुरूप उत्पादन नहीं जिले में औसतन प्रतिदिन दो हजार किलो मछली की खपत है. इसकी पूर्ति आंध्रप्रदेश से आनेवाले मछली से होती है. जिले में वर्तमान समय में जो सरकारी तालाब हैं, उनमें अधिकतर में विवाद बना हुआ है. इसके कारण भी सरकारी स्तर पर काफी कम मछली पालन होता है. प्राइवेट स्तर पर जो तालाब बनाकर मछली पालन कर रहे हैं. उन्हें भी कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है. कई बार दुश्मनी के कारण तालाब में जहर देकर मछली मारने की शिकायत भी आते रहती है. जिले में मछली उत्पादन काफी कम है. इस कारण नवादा का मछली बाजार पूरी तरह से आंध्रप्रदेश से आनेवाली मछलियों पर निर्भर रहता है. स्थानीय व्यापारी अशोक केवट ने कहा कि स्थानीय स्तर पर मछली पालन को बढ़ावा देने में विभाग रुचि नहीं लेता है. यही कारण है कि सरकारी तालाबों के टेंडर नहीं हो पाते है और जिन तालाबों का टेंडर हुआ है, उनमें विवाद के कारण मछली पालन सही ढंग से नहीं हो पाती है. जहां तक नये तालाब निर्माण का सवाल है, जब तक लोगों को इसमें मुनाफा नहीं मिलेगा, तब तक लोग इस काम के लिए इच्छुक नहीं होंगे. सड़क के किनारे मछली बेच कर अपनी रोजी-रोटी कमाने वाले कई युवक मछली पालन के लिए तालाब बनाना चाहते है, लेकिन मछली पालन विभाग द्वारा किसी प्रकार की मदद नहीं दी जाती है. हैचरी बनाने के लिए हो रहा प्रयास मछली बीज पालने के लिए हैचरी का निर्माण करने की योजना पर काम चल रहा है. तीन एकड़ जमीन पर 15 लाख की लागत से हैचरी निर्माण के लिए बारत उदयपुर गांव के किसान राकेश कुमार द्वारा आवेदन किया गया है. सरकार की ओर से हैचरी निर्माण के लिए 50 प्रतिशत का अनुदान दिया जा रहा है. यदि बैंक द्वारा सही ढंग से मदद किया गया, तो शायद इस वर्ष हैचरी निर्माण संभव हो पाये. नये तालाब के लिये जा रहे आवेदन नये तालाब बनाने के लिए लोगों से आवेदन लिये जा रहे है. इस वित्तीय वर्ष में लक्ष्य को पूरा करने का प्रयास किया जायेगा. विभाग मछली पालन के लिए उत्सुक लोगों को प्रशिक्षण दिलाने का काम भी करती है. मछली तालाब का टेंडर निकाला गया है. शंभु प्रसाद, मत्स्य प्रसार पदाधिकारी

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन