पांच महीनों में 12 लावारिस शव का हुआ अंतिम संस्कार

Updated at : 28 Dec 2015 7:02 PM (IST)
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पांच महीनों में 12 लावारिस शव का हुआ अंतिम संस्कार

पांच महीनों में 12 लावारिस शव का हुआ अंतिम संस्कार लावारिस शवों को अग्नि देकर कर रहे है सामाजिक सेवा नवादा (सदर). जिले में विभिन्न स्थानों पर मिलने वाले लावारिस शवों को अंतिम संस्कार करने के नाम पर हो रही खानापूर्ति को बंद करने व ऐसे लाशों को चीलकौओं से बचाने को लेकर संवेदनशील बने […]

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पांच महीनों में 12 लावारिस शव का हुआ अंतिम संस्कार लावारिस शवों को अग्नि देकर कर रहे है सामाजिक सेवा नवादा (सदर). जिले में विभिन्न स्थानों पर मिलने वाले लावारिस शवों को अंतिम संस्कार करने के नाम पर हो रही खानापूर्ति को बंद करने व ऐसे लाशों को चीलकौओं से बचाने को लेकर संवेदनशील बने व्यक्ति ने पांच महीने में 12 शवों का अंतिम संस्कार किया है. नवादा नगर के कलाली रोड निवासी सामाजिक कार्यकर्ता श्रवण बरनवाल ने प्रशासन के समक्ष उत्पन्न यह समस्या का समाधान करते हुए पांच सदस्यीय एक कमेटी का गठन किया, जो लावारिस शवों के मिलने पर उसे अपने हाथों से अंतिम संस्कार कर पुण्य के भागी बन रहे है. ईद से पहले नगर थाने में आयोजित शांति समिति की एक बैठक में अज्ञात शवों की अमानवीय स्थिति पर उठी चर्चा के बाद खुद श्रवण बरनवाल ने ऐसे शवों का अंतिम संस्कार करने का बीड़ा उठाया. सरकारी सहयोग के नाम पर सिर्फ शवों को इस कमेटी को सुपूर्द कर दिया जाता है. इस कमेटी से जुड़े लोग खुद के पॉकेट से या फिर चंदा उगाही में मिले राशि से अज्ञात शवों को अंतिम संस्कार हिंदू रीति रिवाज के अनुसार करते है. पांच महीने पहले हुआ कमेटी का गठनसदर अनुमंडल पदाधिकारी के संरक्षण में गठित लावारिस लाश दाह संस्कार समिति में डॉ मनोज कुमार को अध्यक्ष, वार्ड पार्षद राजेश कुमार मुरारी को उपाध्यक्ष, संदीप कुमार चुन्नु को कोषाध्यक्ष, श्रवण कुमार बरनवाल को सचिव, पंकज कुमार को सह सचिव के साथ ही जितेंद्र प्रताप जीतू, अमित कुमार, वार्ड पार्षद रूपेश कुमार, सब इंस्पेक्टर सुरेश प्रसाद सिंह व श्रवण कुमार श्रृंगारिका को कमेटी का सदस्य बनाया गया है. अज्ञात लाश मिलने के बाद कोर कमेटी के सदस्यों को सूचित कर स्थानीय बिहारी घाट पर एकत्रित किया जाता है.पुरुष या महिला जौसा शव होने पर उसी अनुरूप नये वस्त्र भेंट किये जाते हैं. हिंदू रीति रिवाज के अनुसार सभी कर्म कांडों के साथ अज्ञात लाश का दाह संस्कार किया जाता है. कमेटी के सचिव श्रवण बरनवाल कहते हैं कि अज्ञात शवों को मुक्तिधाम पहुंचाना लक्ष्य बन गया है. अज्ञात शव मिलने पर कोई रहे या न रहे मैं स्वयं मुक्तिधाम पहुंच कर अज्ञात शवों का दाह संस्कार करता हूं. उन्होंने बताया कि इस कार्य में राजेश मुरारी, पंकज तथा चुन्नु का खुल कर सहयोग मिलता है. अबतक 14 शवों को पहुंचाया मुक्तिधाम26 जुलाई 2015 को गठित लावारिस लाश दाह संस्कार समिति की ओर से अब तक 14 लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार कर मुक्तिधाम पहुंचाया जा चुका है. इनमें 5 महिलाएं तथा 9 पुरुषों के लाश शामिल है. 31 जुलाई को टाऊन थाना से मिली महिला की लाश2 अगस्त को रेल थाने से मिली पुरुष की लाश17 अगस्त को नगर थाना से मिली महिला की लाश23 अगस्त को रेल थाना से मिली पुरुष की लाश3 सितंबर को रेल थाना से मिली महिला की लाश5 सितंबर को वारिसलीगंज थाना से मिली महिला की लाश13 सितंबर को रेल थाना से मिली महिला की लाश16 सितंबर को रेल थाना से मिली पुरुष की लाश26 सितंबर को नगर थाना से मिली पुरुष की लाश29 सितंबर को रेल थाना से मिली पुरुष की लाश29 नवंबर को गोविंदपुर थाना से मिली पुरुष की लाश1 दिसंबर को रेल थाना से मिली पुरुष की लाश9 दिसंबर को रेल थाना से मिली पुरुष की लाश19 दिसंबर को वारिसलीगंज थाने से मिली पुरुष की लाशरेल थाने से मिलता है अधिक अज्ञात शवकिउल-गया रेल खंड पर नवादा स्टेशन पर कार्यरत रेल थाने से ही समिति को अधिकतर अज्ञात शव मिलता है. समिति से जुड़े उपाध्यक्ष राजेश कुमार मुरारी ने बताया कि सबसे ज्यादा परेशानी उस वक्त होती है जब कई दिनों का सड़ा-गला अज्ञात लाश को मुक्तिधाम तक ले जाना पड़ता है. दूषित वातारण में ही लाश का अंतिम संस्कार किया जाता है.

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