धान की खरीदारी नहीं होने से किसानों में बढ़ी बेचैनी

Updated at : 13 Dec 2015 7:00 PM (IST)
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धान की खरीदारी नहीं होने से किसानों में बढ़ी बेचैनी

धान की खरीदारी नहीं होने से किसानों में बढ़ी बेचैनी काशीचक. प्रखंड में सरकार द्वारा निर्धारित समय सीमा पांच दिसंबर से धान की खरीदारी प्रारंभ नहीं हो सकी है. इस बार सरकार व विभाग ने एक किसान को एक नाम पर अधिकतम 100 क्विंटल धान की बिक्री का निर्देश दिया है. प्रखंड के किसान खेती […]

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धान की खरीदारी नहीं होने से किसानों में बढ़ी बेचैनी काशीचक. प्रखंड में सरकार द्वारा निर्धारित समय सीमा पांच दिसंबर से धान की खरीदारी प्रारंभ नहीं हो सकी है. इस बार सरकार व विभाग ने एक किसान को एक नाम पर अधिकतम 100 क्विंटल धान की बिक्री का निर्देश दिया है. प्रखंड के किसान खेती पर ही आश्रित हैं. धान ही जीविका का मुख्य श्रोत है. इसी धान को बेच कर किसान अपनी घर गृहस्थी को चलाते हैं. ऐसे में बड़े किसानों की परेशानी काफी बढ़ गयी है.कागजात को लेकर हो रही परेशानी प्रखंड के अधिकांश किसानों की भूमि उनके पूर्वजों के नाम पर है. किसानों के पूर्वजों ने आपसी भाईचारा से बंटवारा कर अपनी भूमि को जोत रहे हैं. इसकी वजह से भूमि का लगान हर धान बिक्री करनेवाले किसानों के नाम से होना मुष्किल दिख रहा है. भले ही लोग लगान कटवा रहे हैं. लेकिन, उक्त भूमि का सरकारी निर्देशानुसार कागजात सही नहीं हो पायेगा. इससे किसानों की धान बिक्री में कागजात परेशानी बनी हुई है. बोनस की नहीं हुई घोषणानये सत्र में अभी तक सरकार द्वारा धान खरीद का समर्थन मूल्य 1410 रुपये प्रति क्विंटल साधारण एवं 1450 रुपये प्रति क्विंटल-ए ग्रेड का निर्धारित किया गया है. पिछले वर्ष बोनस के रूप में सरकार द्वारा तीन सौ रुपये प्रति क्विंटल दिया गया था. लेकिन, इस वर्ष राज्य सरकार की ओर से बोनस की घोषणा नहीं किये जाने से किसानों की मुश्किलें और बढ़ गयी है. किसान आज भी ऊहापोह की स्थिति में है. पिछले वर्ष के नहीं मिले पैसे अधिकारियों द्वारा धान खरीद के 48 घंटों के अंदर रुपये का भुगतान की बात कही जा रही है. यह बैंक खाता के माध्यम से होगा. लेकिन, सच्चाई यह है कि कई किसानों के पिछले वर्ष के धान के पैसे आज भी नहीं मिल पाया है. इससे बोनस के रुपये की कमी और भुगतान प्रक्रिया में देरी किसानों के बीच परेशानी का कारण बन सकता है. क्या कहतें है किसान इस साल सरकार द्वारा बोनस के रुपये की घोषणा नहीं की गयी है. किसानों को बोनस मिलेगा या नहीं यह संशय का विषय बना हुआ है. बोनस के रुपये कागजात बनवाने और बिचौलियों के बीच बंट जाते हैं. इस स्थिति में इस साल पैक्स में धान देना मुश्किल लग रहा है.सत्येंद्र सिंह, रेवरासरकार द्वारा एक किसानों का एक सौ क्विंटल धान खरीद का आदेश गलत है. हमारे गांव के दर्जनों किसानों द्वारा धान की अच्छी उपज की जाती है. गांव का रकवा भी अधिक है. ऐसे में बड़े किसानों को मजबूरीवश बाजारों में धान बेचना होगा.विजेंद्र सिंह, सुभानपुर

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