बिल नहीं दिखाने पर 53 दवाएं प्रतिबंधित

Updated at : 13 Dec 2015 12:26 AM (IST)
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बिल नहीं दिखाने पर 53 दवाएं प्रतिबंधित

छापेमारी के भय से बंद रहीं शहर की अधिकतर दवा दुकानें नवादा कार्यालय : स्वास्थ्य विभाग के निर्देश पर जिले में दवा दुकानों में चल रही छापेमारी के कारण तीसरे दिन शहर सहित अन्य स्थानों पर भी अधिकतर दवा दुकानें बंद रहीं. मजिस्ट्रेट की देख-रेख में तीन सदस्यीय दल दवा दुकानों में छापेमारी कर रहे […]

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छापेमारी के भय से बंद रहीं शहर की अधिकतर दवा दुकानें
नवादा कार्यालय : स्वास्थ्य विभाग के निर्देश पर जिले में दवा दुकानों में चल रही छापेमारी के कारण तीसरे दिन शहर सहित अन्य स्थानों पर भी अधिकतर दवा दुकानें बंद रहीं. मजिस्ट्रेट की देख-रेख में तीन सदस्यीय दल दवा दुकानों में छापेमारी कर रहे हैं. शनिवार को छापेमारी दल के भय से एक दर्जन से अधिक दवा दुकानों का शटर भी नहीं उठा. जांच के क्रम में जांच दल द्वारा कई दवाओं का सैंपल भी लिया जा रहा है. दुकानों में रखी दवाओं की रसीद भी प्रस्तुत नहीं की जा रही है.
जांच अधिकारियों ने जांच में यह पाया है कि खरीद दर व बिक्री दर में दवाओं की कीमत कई गुना अधिक है. जांच टीम के अधिकारी राजेश गुप्ता ने बताया कि दुकानदारों द्वारा खरीदे गये दवाओं का बिल प्रस्तुत किया गया. इसमें प्रिंट दर से काफी कम राशि अंकित पायी गयी. जबकि, दुकानदार प्रिंट मूल्य पर ही ग्राहकों को कई गुना अधिक रुपये लेकर दवाओं बिक्री कर रहे है.
उन्होंने बताया कि गुरुवार को अस्पताल रोड स्थित जैन मेडिको में किये गये छापेमारी के दौरान 53 वैसी दवाएं भी पायी गयी, जिसका खरीद बिल दुकानदार द्वारा प्रस्तुत नहीं किया गया. इन दवाओं को चिह्नित कर बिक्री के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है. दवा दुकानों में छापेमार दल द्वारा एंटी कैंसर दवाओं की भी जांच की जा रही है. जांच में ऐसी दवाओं को दुकानदारों द्वारा पांच से आठ सौ फीसदी अधिक मूल्य पर बेचा जाता है.
ऐसी दवाओं की जांच के लिए ही अधिकारियों द्वारा छापेमारी की जा रही है. नवादा में हुई छापेमारी में कई दुकानों में जीवन रक्षक दवाओं की कीमतों में खरीद दर से 25 गुणा अधिक प्रिंट दर पाया गया. खरीद व बिक्री दर में 25 से 30 गुणा का अंतर रख कर दवाओं की बिक्री कराने वाले गेटवेल नामक कंपनी पर पहले ही प्रतिबंध लगाया जा चुका है.
सही कीमत पर मिले दवाएं
विभाग का यह प्रयास है कि लोगों को जीवन रक्षक दवाएं सहज कीमत पर उपलब्ध हो. उपभोक्ता अपने अधिकारों का पालन करते हुए खरीदे गये दवाओं का बिल अवश्य लें. क्योंकि, बिल नहीं होने पर नकली दवाएं भी दुकानदार द्वारा उपलब्ध करा दिया जा सकता है. जो लोगों का जीवन बचाने के बजाय जानलेवा साबित हो सकता है. ऐसी परिस्थिति में बिल नहीं रहने पर दुकानदार के खिलाफ कार्रवाई भी नहीं हो सकती है.
राजेश गुप्ता, ड्रग इंस्पेक्टर
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