मधुशाला के बीच चल रही पाठशाला

मधुशाला के बीच चल रही पाठशाला वारिसलीगंज. प्रखंड के रसनपुर गांव के प्राथमिक विद्यालय के पास अवैध तरीके से महुआ शराब बनाने का धंधा चल रहा है. इसके कारण गांव के छोटे-छोटे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है. गांव के लोग बच्चों की पढ़ाई बीच में छोड़ने पर विवश हो गये हैं. शराब के अवैध […]
मधुशाला के बीच चल रही पाठशाला वारिसलीगंज. प्रखंड के रसनपुर गांव के प्राथमिक विद्यालय के पास अवैध तरीके से महुआ शराब बनाने का धंधा चल रहा है. इसके कारण गांव के छोटे-छोटे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है. गांव के लोग बच्चों की पढ़ाई बीच में छोड़ने पर विवश हो गये हैं. शराब के अवैध धंधे के कारण विद्यालय के पास गंदगी भी जमा रहती है. गंदगी के बीच ही बच्चों को तालिम दी जाती है. इस तरह के आवोहवा में लगातार छह घंटे का समय गुजारने के कारण बच्चे बीमार भी होते रहते हैं. गौरतलब है कि रसनपुर गांव में वर्षों से बड़े पैमाने पर महुआ से शराब बनाने का अवैध धंधा चल रहा है. हालांकि, यदा-कदा उत्पाद विभाग व स्थानीय पुलिस छापेमारी कर भट्ठियों को ध्वस्त करती है. लेकिन, एक-दो दिन बाद धंधेबाज फिर से काम शुरू कर देते हैं. प्राथमिक विद्यालय रसनपुर में ज्यादातर बच्चे इसी गांव के पढ़ते हैं. कुछ के अभिभावक अपनी अवैध कमाई के आगे बच्चों के स्वास्थ्य की चिंता नहीं करते. लगभग 60 घरों वाले इस गांव की तीन तिहाई परिवार शराब निर्माण के अवैध धंधे से जुड़े हैं. भट्ठियों से निकलने वाला गंदा पानी स्कूल के पास स्थित गड्ढे में जमा होता है. इससे बच्चे अक्सर बीमार होते रहते हैं.राहगीरों को होती है परेशानीप्रखंड के ठेरा, जलालपुर, आजमपुर, पवीपुर, महादेव बिगहा, लोदीपुर सहित अन्य गांवों की आबादी इसी सड़क से प्रखंड मुख्यालय तक आती जाती है. रसनपुर गांव के पास गंदगी व सड़ांध से बचने के लिए नाक पर रूमाल रख कर चलना पड़ता है. लाचार हैं शिक्षककरीब 160 बच्चों वाले इस विद्यालय में पांच नियोजित शिक्षक पदस्थापित हैं. इन्हें शराब की बदबू के बीच विद्यालय में रह कर विद्यार्थी को शिक्षा देना पड़ता है. गांव के लोगों के भय से शिक्षक भी इसकी शिकायत उच्चाधिकारियों से नहीं करते हैं.क्या कहते हैं अधिकारीविद्यालय में इसी गांव के बच्चे पढ़ते हैं. ऐसे में इसकी रोकथाम का प्रयास गांव के संभ्रात लोगों को करनी चाहिए. अधिकारी होने के नाते मैं अपने स्तर से उत्पाद अधीक्षक को इसकी जानकारी दिया हूं. हरेंद्र प्रसाद, बीइओ
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