लौकिक पारलौकिक वद्यिा का ज्ञान देते हैं गुरु

Updated at : 07 Dec 2015 6:56 PM (IST)
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लौकिक पारलौकिक वद्यिा का ज्ञान देते हैं गुरु

लौकिक पारलौकिक विद्या का ज्ञान देते हैं गुरु विहंगम योग युवा शक्ति सत्संग का हुआ आयोजन अतौआ ग्राम में हुए सत्संग में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने लिया भागमधुमती आश्रम के संतों ने किया प्रवचनफोटो-5नवादा (नगर). युवा अज्ञानता की ओर भटक रहे हैं. उन्हें स्वयं की पहचान करना जरूरी है. उक्त बातें मधुमती आश्रम से आये गुरु […]

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लौकिक पारलौकिक विद्या का ज्ञान देते हैं गुरु विहंगम योग युवा शक्ति सत्संग का हुआ आयोजन अतौआ ग्राम में हुए सत्संग में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने लिया भागमधुमती आश्रम के संतों ने किया प्रवचनफोटो-5नवादा (नगर). युवा अज्ञानता की ओर भटक रहे हैं. उन्हें स्वयं की पहचान करना जरूरी है. उक्त बातें मधुमती आश्रम से आये गुरु मुनेश्वर सिंह ने विहंगम योग युवा शक्ति सत्संग में कहीं. सदर प्रखंड के अतौआ गांव में विहंगम योग संस्थान द्वारा कराये गये कार्यक्रम में हजारों की संख्या में युवा लड़के-लड़कियां व ग्रामीणों ने भाग लिया. सत्संग की शुरुआत अ अक्षर का ध्वज फहरा कर किया गया. ध्वज स्थापना के बाद सत्संग का विधिवत शुरुआत किया गया. गुरु मुनेश्वर सिंह ने कहा कि ज्ञान का होना बहुत जरूरी है. क्योंकि, शिक्षा व ज्ञान में बहुत अंतर है. सच्चा ज्ञान किताबी बातों से नहीं आ सकती. यदि किसी का शस्त्र का ज्ञान है, तो उसे शास्त्र का ज्ञान भी आना चाहिए. ताकि, अपने शक्ति का सही उपयोग कर सके. मनुष्य ईश्वर की सबसे श्रेष्ठ कृति है. युवा जीवन में कुछ और पाने की होड़ में अपनों से दूर होते जा रहे हैं. हमें अपनी आत्मिक शक्ति को केंद्रित करना होगा. सभी समस्याओं का मूल कारण हमारे मन का खुद पर नियंत्रण नहीं होना है. भजनों व गीतों ने किया प्रभावितसत्संग में बाल कलाकार गोलू जी के भजनों व गीतों ने लोगों को खूब प्रभावित किया. बात क्या है आदमी से जल रहा है आदमी.. भजन ने तो लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया. सत्संग में कई प्रचलित गीतों के बोल पर आधारित भजनों ने भी लोगों को खूब आनंदित किया. ब्रह्म विद्या प्रकाश है, भक्ति, मुक्ति सुखधाम, गाथा वह अध्यात्म है, अमत सनातन नाम.. आदि गीत भी सत्संग में गूंजे. कई उपदेश कर्ताओं ने भी रखी अपनी बातविहंगम योग युवा शक्ति सत्संग में कई संस्था से जुड़े कई उपदेशकर्ताओं ने युवाओं को प्रेरित करने वाले बातों को रखा. उपदेशकर्ता विक्रम जी ने कहा कि भारत को आजाद हुए कई वर्ष बीत गये है, लेकिन आज भी लोग गुलामी की मानसिकता लिये हुए है. हमें आत्मबोध कराने के लिए जो ज्ञान चाहिए उसका अभाव दिखता है. आहार विहार शुद्ध रखने,नशाखोरी समाप्त करने,अभद्र व्यवहार को रोकने जैसे काम परिवार से शुरू करना होगा. यदि बचपन से ही सही ज्ञान बच्चों को मिले तो राष्ट्र की उन्नति अवश्य ही होगी. उपदेशकर्ता कांती बहन ने कहा कि सही पथ पर चलने से ही मानव कल्याण संभव है. भारत सनातन व पुरातन ज्ञान का भंडार है. इसे आज के युग में लागू करने के लिए सबको मन पर नियंत्रण करने की दिशा में काम करना होगा. लोग कहते है कि दुनिया बदल रही है, लेकिन क्या पहाड़, नदी, झरने, सूरज, चांद क्या बदल गये है. बदला है तो हमारा आचार-विचार व व्यवहार बदला है. स्थानीय लोगों ने निभायी अहम भूमिकाविहंगम योग सत्संग समारोह के संयोजक बसंत सिंह के अलावे गुंजन कुमार, विकास कुमार, सोनू कुमार, विष्णु, गौरव, राहुल, विनय सिंह वकील, राजाराम सिंह, आनंदी सिंह आदि ने आयोजन को सफल बनाने में अहम भूमिका अदा किया. युवा वर्ग को सही मार्ग दिखाने में यह सत्संग समारोह सफल होता दिखाई दिया.

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