कम नहीं हो रहा मच्छरों का प्रकोप

Updated at : 30 Nov 2015 7:00 PM (IST)
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कम नहीं हो रहा  मच्छरों का प्रकोप

कम नहीं हो रहा मच्छरों का प्रकोप रखे-रखे खराब हो गये मलेरिया विभाग व नगर पर्षद के फॉगिंग मशीनमच्छरों की रोकथाम के लिए नहीं हो रहा दवा का छिड़ाकावफोटो-2प्रतिनिधि, नवादा (नगर)मौसम में बदलाव के साथ ही मच्छरों का प्रकोप इन दिनों खूब बढ़ गया है. मच्छरों के डंक से बीमारों की संख्या बढ़ रही है. […]

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कम नहीं हो रहा मच्छरों का प्रकोप रखे-रखे खराब हो गये मलेरिया विभाग व नगर पर्षद के फॉगिंग मशीनमच्छरों की रोकथाम के लिए नहीं हो रहा दवा का छिड़ाकावफोटो-2प्रतिनिधि, नवादा (नगर)मौसम में बदलाव के साथ ही मच्छरों का प्रकोप इन दिनों खूब बढ़ गया है. मच्छरों के डंक से बीमारों की संख्या बढ़ रही है. मलेरिया सहित अन्य बीमारियों के मरीज अस्पतालों में पहुंच रहे हैं. मच्छरों को भगाने के लिए लोग अपने स्तर से क्वायल या मच्छरदानी पर ही निर्भर हैं. नगर पर्षद में लाखों रुपये की लागत से खरीदा गया मशीन बेकार में रखे-रखे खराब हो गया है. वहीं सदर अस्पताल स्थित मलेरिया विभाग के फॉगिंग मशीन का भी यही हाल है. मच्छरों के कारण शाम व सुबह में घरों के बाहर बैठना में मुश्किल हो गया है. संपन्न व मध्यम वर्ग के लोग तो किसी प्रकार से मच्छरों से बचाव के उपाय कर रहे हैं, लेकिन गरीबों को बीमार होने के अलावा कोई अन्य चारा नहीं है. जानकारी के अनुसार, मलेरिया विभाग व नगर पर्षद का फॉगिंग मशीन खराब पड़ा है. इसके कारण शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में फॉगिंग नहीं हो पा रही है. हालांकि, नगर पर्षद के मशीन का एक ही पाईप काम करता है. इसके कारण इसका इस्तेमाल भी कम किया जा रहा है. काफी महंगा है केमिकलफॉगिंग मशीन से धुआं करने के लिए इस्तेमाल होने वाला केमिकल काफी महंगा आता है. नगर पर्षद के फॉगिंग मशीन को चलाने के लिए प्रति छह घंटे में 95 लीटर डीजल व एक लीटर कींगफॉग केमिकल मिला कर बनाये गये मिश्रण का इस्तेमाल करना पड़ता है. नगर पर्षद द्वारा कई बार आर्थिक कमी के कारण भी फॉगिंग का काम रोका जाता है. वहीं, सदर अस्पताल के मलेरिया विभाग में रखा फॉगिंग मशीन छोटा है, बावजूद केमिकल के कमी के कारण इसका भी इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है.शाम के समय फॉगिंग करना बेहतरफॉगिंग करने का सबसे सही समय गोधुली बेला यानी शाम का समय होता है. शाम पांच से सात बजे तक फॉगिंग की जाती है. लेकिन, इन दिनों शहरी क्षेत्रों में फॉगिंग नहीं होने के कारण मच्छरों का प्रभाव बढ़ रहा है. हालांकि, नगर पर्षद के अधिकारियों ने बताया कि पिछले दिनों डीएम आवास सहित अन्य अधिकारियों के कार्यालय व क्वाटरों में फॉगिंग किया गया है.बोले शहर के लोग मच्छरों का प्रकोप इन दिनों काफी बढ़ गया है. गंदगी व मौसम में बदलाव के कारण भी मच्छर बढ़ रहे हैं. फॉगिंग होने से मच्छर रोकने में राहत मिलती, लेकिन यह भी इन दिनों नहीं हो रहा है.आरपी साहू, समाजसेवी फॉगिंग कब व कहां होती है इसका तो पता भी नहीं चलता है. मच्छर का असर व्यापक हो गये हैं. घर के कई लोग मच्छर काटने से बीमार पर रहे हैं. दयानंद प्रसाद, शिक्षकघर हो या दुकान बिना क्वायल जलाये कहीं भी आप नहीं बैठ सकते हैं. मच्छर की समस्या नगर की सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है. सोनू अग्रवाल, व्यवसायीफॉगिंग मशीन से धुआं होते तो शायद ही कभी देखा होगा. मच्छर का प्रकोप इन दिनों बढा है. मच्छर काटने से होने वाले रोगियों की संख्या भी इन दिनों बढ़ी है.डॉ पंकज कुमार

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