हर मजहब का फूल खिले वह देश है हिंदुस्तान

Updated at : 29 Nov 2015 6:54 PM (IST)
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हर मजहब का फूल खिले वह देश है हिंदुस्तान

हर मजहब का फूल खिले वह देश है हिंदुस्तान हिसुआ के शब्द साधक मंच के तत्वावधन में कवि गोष्ठी व परिचर्चा का हुआ आयोजन राष्ट्रप्रेम व भाईचारा का संदेश देते हुए विभिन्न रसों की कविताओं का हुआ पाठफोटो-15प्रतिनिधि, हिसुआ’मानव को मानवता सिखाये वह देश हैं हिंदुस्तान, हर मजहब का फूल खिले वह देश है हिंदुस्तान.’ […]

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हर मजहब का फूल खिले वह देश है हिंदुस्तान हिसुआ के शब्द साधक मंच के तत्वावधन में कवि गोष्ठी व परिचर्चा का हुआ आयोजन राष्ट्रप्रेम व भाईचारा का संदेश देते हुए विभिन्न रसों की कविताओं का हुआ पाठफोटो-15प्रतिनिधि, हिसुआ’मानव को मानवता सिखाये वह देश हैं हिंदुस्तान, हर मजहब का फूल खिले वह देश है हिंदुस्तान.’ कवि शफीक जानी नादां की यह काव्य पंक्ति जब गूंजी तो उपस्थित जन देश के भाईचारे और एकता के कायल हो गये़ उनकी कविता देश की अखंडता और एकता को बचाये रखने के लिए सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया़ हिसुआ के हिंदी-मगही साहित्यिक मंच शब्द साधक के तत्वावधान में आर्य समाज मंदिर में रविवार को कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ. इसकी अध्यक्षता अध्यक्ष दीनबंधु ने की व संचालन उदय भारती ने किया. कवियों ने देशप्रेम, भाईचारा, शरद ऋतु के आगमन, गांव की जरूरत, राजनीति की विद्रुपता सहित समसामयिक कविताओं का पाठ किया़ यदुलाल आर्य ने क्रोध से विनाश की कविता सुनायी, तो संजय प्रकाश ने शिक्षकों की पीड़ा व्यक्त की़ देवेंद्र पांडेय ने साहित्य से समाज के कल्याण का संदेश दिया़ शत्रुन प्रसाद और दयानंद चौरसिया ने समाज और राजनीति की विसंगतियों पर प्रहार किया तो कवि अनिल ने गांव की जरूरत और आदमी की सोंच के बदलाव को बयां किया़ कवि सुंदरदेव शर्मा ने आत्मबोध से जुड़ी कविता तो कुलेश्वर मेहता ने मंत्री जी के तेवर की कविता सुनायी़ टीएस कलेज के हिन्दी विभागायक्ष प्रो़ नवल किशोर शर्मा ने विविाता में एकता और नये बिहार गढ़ने की कविता सुनायी़ शिक्षक रोहित कुमार पंकज, नरेश प्रसाद, ललित किशोर शर्मा, अधिवक्ता चंदेश्वर प्रसाद गुप्ता, शशिकांत सिंह आदि ने अपने उद्गार रखे़ धन्यवाद ज्ञापन अर्जक संघ के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुमार पथिक ने किया. उपस्थित साहित्यकारों ने मंच का रजिस्ट्रेशन हो जाने के बाद साहित्य को गति देने और पत्र-पत्रिकाओं के प्रकाशन में लगने का निर्णय लिया़सहिष्णुता के मुद्दे पर नहीं बंटे साहित्यकार दूसरे सत्र की परिचर्चा में साहित्यकारों ने सहिष्णुता और इस तरह के मामलों पर साहित्यकारों को आपस में नहीं बंटने की अपील की़ साहित्कारों को एक होकर साहित्य सृजन में ही लगे रहने का आह्वान किया गया़ ऐसे मुद्दों को राजनीति का रंग दिया जाता रहा है, जिसको तूल देकर साहित्य के लिए बाधा तैयार न किया जाये. वक्ताओं ने कहा कि साहित्यकार, कलाकार, चित्रकार आदि देश-समाज के सृजनहार हैं न कि इसे तोड़नेवाले. कवि दीनबंधु, उपेंद्र पथिक, प्रो नवल किशोर शर्मा, सीपी गुप्ता आदि ने अपने विचार रखें.

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