करहरा में शक्षिा व स्वास्थ्य खराब

Updated at : 25 Nov 2015 6:58 PM (IST)
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करहरा में शक्षिा व स्वास्थ्य खराब

करहरा में शिक्षा व स्वास्थ्य खराब एक सड़क के लिए भी तरस रहे गांव के लोग बरसात के मौसम में नदी पार कर पहुंचते हैं गांवप्रतिनिधि, कौआकोल खड़सारी पंचायत के करीब सात सौ की आबादी वाले करहरा गांव के लोग आज भी गांव में मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं. गांववालों की मुख्य समस्या […]

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करहरा में शिक्षा व स्वास्थ्य खराब एक सड़क के लिए भी तरस रहे गांव के लोग बरसात के मौसम में नदी पार कर पहुंचते हैं गांवप्रतिनिधि, कौआकोल खड़सारी पंचायत के करीब सात सौ की आबादी वाले करहरा गांव के लोग आज भी गांव में मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं. गांववालों की मुख्य समस्या यातायात को लेकर हैं. समीप के गांवों से करहरा तक पहुंचने के लिए यहां के लोगों को नाटी नदी पार करना पड़ता है. करीब दो किलोमीटर की दूरी पगडंडियों के सहारे ही तय करनी पड़ती हैं. अगर किसी की तबीयत खराब हो गय, तो लोग मरीज को चारपाई पर लेकर डॉक्टर के पास पहुंचते हैं. कई बार, तो ऐसी परिस्थिति में मरीजी की जान चली जाती है. गांव में सरकारी स्तर से किसी भी प्रकार की सुविधा नहीं है. लोगों की मानें, तो आज भी उनकी समस्याओं को सुनने के लिए कोई जन प्रतिनिधि नहीं पहुंचा है. यहां तक कि पंचायत के मुखिया भी ग्रामीणों की समस्या को सुनने से कतराते रहे हैं. गांववाले सड़क की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए अपने विधायक व सांसद से अनुरोध करके हार चुके हैं. पर, उनकी समस्या को कोई भी जनप्रतिनिधि सुनने तक का प्रयास नहीं किया. किया पीड़ा का इजहार इस गांव के लोग अपनी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं. गांव में न तो बिजली और शिक्षा की व्यवस्था है और न ही यातायात की. गांव की समस्या के प्रति क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि गंभीर नहीं हैं.अरुण कुमार, सेवानिवृत्त शिक्षक, करहरासड़क की सुविधा नहीं रहने के कारण हम किसानों की आर्थिक स्थिति काफी प्रभावित हो रही है. हम अपने उत्पादों को बाजारों तक नहीं ले जा पाते हैं. इससे किसानों को अपनी मेहनत की मजदूरी मिलना संभव नहीं हो पा रहा है.अनिल प्रसाद, किसान, करहरागरमी में तो किसी तरह पैदल चलकर गांव के लोग बाजार या अन्य जगह आ जा लेते हैं. पर, बरसात में गांव से निकलना मुश्किल हो जाता है. रास्ते की कठिनाई से कई बार प्रसव होने वाली महिलाओं की जानें भी चली गयी है. एमएलए, एमपी ने भी हम लोगों के लिए कुछ भी नहीं कर सके.आशा देवी, गृहिणी, करहरागांव की समस्या के प्रति मैं काफी गंभीर हूं. इसके लिए कई बार क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से बातचीत कर समस्या से अवगत भी कराया. यहां तक की सड़क के लिए जमीन उपलब्ध करा कर मापी भी करायी गयी है. अधिकारियों व स्थानीय जनप्रतिनिधियों की अनदेखी के चलते ग्रामीणों के सारे प्रयास ठंढे बस्ते में ही पडे़ रह जाते हैं.मदन मुरारी प्रसाद, सचिव, सुषमा विकलांग सेवा संस्थान, नवादा गांव की समस्या काफी बड़ी गांव की समस्या काफी बड़ी है. मुखिया स्तर की योजना इसमें कारगर नहीं हो सकती है. इसके लिये अधिक धन की जरूरत है. जिले की बैठक में इस समस्या को प्रमुखता से उठा कर वरीय पदाधिकारियों को अवगत कराया जायेगा.सुनीता देवी, मुखिया

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