रोकें ...जोड़े ...अक्षय नवमी

Updated at : 20 Nov 2015 7:02 PM (IST)
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रोकें ...जोड़े ...अक्षय नवमी

रोकें …जोड़े …अक्षय नवमी मेसकौर. कार्तिक शुक्ल नवमी को मनाया जाने वाला भुआदान का पर्व हिन्दुओं ने धूमधाम से मनाया इस दिन श्रद्घालु आंवला वृक्ष की पूजा अर्चना कर मन्नतें मांगते हैं. पुराणों के अनुसार दैत्य राज जलंधर की धर्मभार्या वृंदा की समाधि पर जन्म लेने वाला आंवला भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है इस […]

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रोकें …जोड़े …अक्षय नवमी मेसकौर. कार्तिक शुक्ल नवमी को मनाया जाने वाला भुआदान का पर्व हिन्दुओं ने धूमधाम से मनाया इस दिन श्रद्घालु आंवला वृक्ष की पूजा अर्चना कर मन्नतें मांगते हैं. पुराणों के अनुसार दैत्य राज जलंधर की धर्मभार्या वृंदा की समाधि पर जन्म लेने वाला आंवला भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है इस दिन लोग आंवला एवं भुआ की जमकर खरीददारी करते हैं. इस दिन भुआ दान का भी महत्व है. प्रखंड में इस पर्व को श्रद्घालु भुआदान के नाम से ही मनाते है. लोग पूजा अर्चना के बाद ब्राह्मणों को भुआ ही दान करते हैं. भुआदान को लेकर सीतामढ़ी में मेला जैसा भीड़ लगता है. लोग नरहट, सिरदला आदि प्रखंड से सीतामढ़ी आकर इस पर्व को धूमधाम से मनाते हैं. आचार्य सिद्घनाथ पांडेय ने बताया कि भारत में नदी पर्वत समेत वृक्ष की भी पूजा होती है, आवलें की पूजा कार्तिक माह में विशेष स्थान लगता है. इस दिन वृक्ष की पूजा के बाद इसके नीचे भोजन तैयार करना सवार्ेत्तम है. पूर्वजों का कहना है कि आंवलें के नीचे भोजन करने से घाव एवं चर्म रोग संबंधित बीमारी नहीं होतंे हैं. इसका पुण्य फल चंद्रग्रहण सूर्य ग्रहण के समय कुरूक्षेत्र में तुला दान के समान है. इस दिन दान पुण्य का अक्षय फल प्राप्त होता है.

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