फिर पेच . रुपये की कमी से बाधित हो रही धान की खरीदारी, कम नहीं हो रही परेशानी

Published at :10 Feb 2015 10:48 AM (IST)
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फिर पेच . रुपये की कमी से बाधित हो रही धान की खरीदारी, कम नहीं हो रही परेशानी

नवादा (सदर): धान खरीद प्रक्रिया में पैक्स अध्यक्षों को बतौर पूंजी महज पांच लाख रुपया ही देने से खरीद प्रक्रिया बाधित हो रही है. ऐसी स्थिति में भविष्य को देखते हुए पैक्स अध्यक्ष किसानों से अधिक धान खरीद कर स्वयं जिम्मेवार नहीं बनना चाहते हैं. खाते से पांच लाख रुपये की निकासी में ही सप्ताह […]

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नवादा (सदर): धान खरीद प्रक्रिया में पैक्स अध्यक्षों को बतौर पूंजी महज पांच लाख रुपया ही देने से खरीद प्रक्रिया बाधित हो रही है. ऐसी स्थिति में भविष्य को देखते हुए पैक्स अध्यक्ष किसानों से अधिक धान खरीद कर स्वयं जिम्मेवार नहीं बनना चाहते हैं. खाते से पांच लाख रुपये की निकासी में ही सप्ताह भर गुजर जाता है. सरकार की इस तरह की पेचीदगी भरे काम से किसान काफी आहत दिख रहे हैं.
जिले के तमाम किसानों में धान बेचने की आपाधापी है. धान बेचने के बाद किसानों की परेशानी यह है कि उसे अगली फसल के लिए भी पूंजी चाहिए. कई किसानों के घर शादी-विवाह होने से भी रुपये की जरूरत है. धान बेचने में किसानों की लाचारी यह है कि बाजार मूल्य व सरकारी मूल्य में काफी अंतर है. वर्तमान में धान का बाजार मूल्य 11 से 12 सौ रुपये क्विंटल है. जबकि, सरकारी कीमत 1300 रुपये प्रति क्विंटल है. साथ में तीन सौ रुपये बोनस.
यानी कीमत बोनस मिला कर 1660 रुपये प्रति क्विंटल है. इस तरह बाजार व सरकारी मूल्य में करीब पांच से छह सौ रुपये प्रति क्विंटल का अंतर है. इस कारण किसान अपना धान बाजार में नहीं बेच कर हर हाल में क्रय केंद्र में ही देना चाहते हैं.
बिचौलिये कर रहे इंतजार
आमतौर पर ज्यादा हो रही खरीदारी में बिचौलिये भी किसानों की सैलाब में डुबकी लगाते रहे हैं. लेकिन, इस बार की स्थिति फिलहाल इंतजार करने पर विवश कर रही है. जब किसान ही आपाधापी की जुगत कर रहे है, तो व्यापारी अभी इसे देख ही रहे हैं.
सप्ताह में एक दिन ही खरीदारी बनी बाधा
धान की खरीद पैक्स अध्यक्षों द्वारा सप्ताह में एक दिन करना खरीदारी में सबसे बड़ी बाधा बन रही है. पैक्स अध्यक्षों की भी लाचारी है. किसान धान बेचने को लेकर काफी जल्दबाजी में हैं, लेकिन इस बार सरकारी पेच इस तरह लगा है कि खरीदने व बेचने वाले दोनों को बांध दिया है.
गोदाम का भर जाना बना नया बहाना
नवादा व हिसुआ में एक -एक बेस गोदाम है, जबकि सभी 14 प्रखंडों में एक-एक एसएफसी व क्रय केंद्र का गोदाम है. अभी ही गोदामों के भर जाने की बात कही जा रही है. हालांकि, नवादा प्रखंड के खरीदी बिगहा गोदाम की क्षमता एक लाख क्विंटल है और 7 फरवरी तक तकरीबन 82 हजार क्विंटल ही धान की खरीदारी पूरे जिले में हुई है.
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