नामांकन नहीं लेनेवाले स्कूलों को नोटिस

Published at :15 Jan 2015 5:53 AM (IST)
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नामांकन नहीं लेनेवाले स्कूलों को नोटिस

आरटीइ के तहत 25% गरीबों के एडमिशन का मामला नवादा (नगर) : वर्ष 2013-14 व 2014-15 में जिले के प्रस्वीकृति प्राप्त 50 निजी स्कूलों को शिक्षा का अधिकार (आरटीइ) के तहत 25 प्रतिशत गरीब बच्चों का एडमिशन लेना था. इसमें 45 नियमानुसार नामांकन लिया, जबकि पांच स्कूलों ने दोनों साल बच्चों का एडमिशन नहीं लिया. […]

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आरटीइ के तहत 25% गरीबों के एडमिशन का मामला
नवादा (नगर) : वर्ष 2013-14 व 2014-15 में जिले के प्रस्वीकृति प्राप्त 50 निजी स्कूलों को शिक्षा का अधिकार (आरटीइ) के तहत 25 प्रतिशत गरीब बच्चों का एडमिशन लेना था. इसमें 45 नियमानुसार नामांकन लिया, जबकि पांच स्कूलों ने दोनों साल बच्चों का एडमिशन नहीं लिया.
इस मामले को जिला शिक्षा विभाग ने गंभीरता से लेते हुए उन पर कारण बताओ नोटिस दिया है. जानकारी के अनुसार जिन पांच स्कूलों को नोटिस दिया गया है, उसमें चार स्कूल सेंट जोसेफ स्कूल हैं. इसमें एक पार नवादा और एक कौआकोल में चलता है. बाकी दो में एक पकरीबरावां व दूसरा गुलनी का बताया जा रहा है. पांचवें स्कूल के बारे में बताया जा रहा कि वह अब बंद हो चुका है.
इस बार बढ़ेगा दायरा
शिक्षा का अधिकार के तहत जिले के 174 निजी विद्यालयों को शिक्षा विभाग द्वारा प्रस्वीकृति देकर गरीब बच्चें को मुफ्त पढ़ाने का निर्देश दिया है. स्कूलों में कुल नामांकन का 25 प्रतिशत एडमिशन निर्धन बच्चों का लिया जाना है. लेकिन, स्कूल संचालकों द्वारा गरीबों का हक मार कर मुनाफा कमाया जा रहा है. नहीं तो अपने चहेतों का मुफ्त एडमिशन लेकर खानापूर्ति कर दी जा रही है.
सरकार द्वारा बच्चों को नि:शुल्क पढ़ाने के बदले में एक निश्चित राशि स्कूल संचालकों को दी जा रही है. जबकि, कई स्कूलों द्वारा 25 प्रतिशत गरीब बच्चों का नामांकन लेने की खानापूर्ति भी नहीं की जाती है. सर्व शिक्षा अभियान से मिली जानकारी के अनुसार, सत्र 2015-15 के लिए सभी 174 प्रस्वीकृति प्राप्त स्कूलों द्वारा 25 प्रतिशत गरीब बच्चों का नामांकन लेना है.
अधिकतर संचालकों के बीच यह स्पष्ट ही नहीं है कि किन बच्चों का एडमिशन लेना है या नहीं. नामांकन लेने वाले बच्चों से कौन-कौन से कागजात लेने हैं.
इसकी सही जानकारी स्कूल संचालकों को नहीं दिया जाता है. संभाग प्रभारी राकेश रंजन ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2013-14 व 2014-15 में 50 स्कूलों को प्रस्वीकृति दी गयी थी. लेकिन, केवल 45 स्कूलों द्वारा ही 25 प्रतिशत गरीब बच्चों का एडमिशन लिया गया है. संत जोसेफ के चार संस्थानों द्वारा गरीब बच्चों का मुफ्त एडमिशन नहीं लेने पर शिक्षा विभाग ने कड़ा संज्ञान लिया है. डीइओ सैय्यद एहेशाम हुसैन द्वारा कारण बताओ नोटिस भेजा गया है.
नहीं होगी हकमारी
शिक्षा विभाग द्वारा स्पष्ट निर्देश निकाला गया है कि जिन स्कूलोंद्वारा गरीब बच्चों का नामांकन लेने में गड़बड़ी की जायेगी उन पर सख्त कार्रवाई की जायेगी. सर्व शिक्षा अभियान द्वारा सत्र 2013-14 में 696 गरीब बच्चों का नामांकन किया गया था. इसके लिए स्कूल संचालकों को 28 लाख 79 हजार 352 रुपये दिये गये. वहीं, सत्र 2014-15 में 742 गरीब बच्चों का नामांकन लिया गया है.
इसके बदले में 30 लाख 69 हजार 654 रुपये का भुगतान प्राइवेट स्कूल संचालकों को किया गया है. आरटीइ के नियमानुसार सभी बच्चों का एडमिशन स्कूलों में लेने का निर्देश दिया गया. पिछले वर्ष पांच चरणों में 124 नये विद्यालयों को प्रस्वीकृति मिली है. विभाग ने निर्देश दिया है कि सभी विद्यालय अपने पोषक क्षेत्र के गरीब बच्चों का नामांकन नि:शुल्क लें.
बीपीएल परिवारों के महादलित, दलित, अति पिछड़े वर्ग व सामान्य श्रेणी के बच्चों को शिक्षा का लाभ वरीयता के आधार पर दिया जाना है. पारदर्शी पूर्वक गरीब बच्चों की पहचान कर एडमिशन लें. शिक्षा विभाग द्वारा नामांकित प्रति गरीब बच्चों के लिए प्रति वर्ष 4,137 रुपये की राशि स्कूल संचालकों को दी जायेगी.
क्या कहते हैं अधिकारी
सभी प्रस्वीकृति प्राप्त विद्यालय आरटीइ के नियमानुसार गरीब बच्चों का एडमिशन अपने अपने स्कूलों में लें. पोषक क्षेत्र के बच्चों का एडमिशन लेने में प्राथमिकता दें. गलत करने वाले स्कूलों पर कार्रवाई की जायेगी.
चंद्रकिशोर यादव, डीपीओ, सर्वशिक्षा अभियान
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