ड्रग विभाग के अफसर दें साथ, तो बन जाये बात

Updated at : 20 Feb 2018 12:31 AM (IST)
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ड्रग विभाग के अफसर दें साथ, तो बन जाये बात

नवादा : ड्रग विभाग के अफसरों की अनदेखी व मनमानी रवैये से नवादा में दवा दुकानदारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. दुकानदारों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय अधिकारी व कर्मचारी उनका शोषण करते हैं. यह आरोप शहर के अस्पताल रोड स्थित हाट पर लगे प्रभात खबर आपके द्वार कार्यक्रम में […]

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नवादा : ड्रग विभाग के अफसरों की अनदेखी व मनमानी रवैये से नवादा में दवा दुकानदारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. दुकानदारों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय अधिकारी व कर्मचारी उनका शोषण करते हैं. यह आरोप शहर के अस्पताल रोड स्थित हाट पर लगे प्रभात खबर आपके द्वार कार्यक्रम में दवा कारोबारियों ने लगाया. उनका कहना था कि विभागीय अधिकारी गलत लोगों का साथ देकर दवा के कारोबार को प्रभावित करते हैं.

ग्रामीण इलाकों में ऐसे कई बिना लाइसेंसी दवा दुकानें हैं, जिन पर विभाग का हाथ है. दुकानदारों ने कहा कि ड्रग विभाग के अधिकारी ड्रग एक्ट को लेकर जागरूकता कार्यक्रम नहीं चलाते. शहर से काफी संख्या में ऑक्सिटॉसीन के इंजेक्शन मिले थे. बावजूद इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गयी. लाइसेंस रिनुअल कराने की बात हो या फार्मासिस्ट का मुद्दा, हर तरफ विभाग के बिचौलिये चढ़ावे की मांग करते हैं. दवा के कारोबार को बेहतर तरीके से चलाने के लिए अफसरों का सहयोग जरूरी है़

गलत करनेवालों पर होगी कार्रवाई
दवा के नाम पर जो लोग गलत कर रहे हैं उनको बख्शा नहीं जायेगा़ गलत दवा दुकान चलानेवालों के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी. प्रतिबंधित दवा बेचने पर कार्रवाई में शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जायेगी. जागरूकता के लिए अभियान चलाना अत्यंत जरूरी है. इसके लिए ड्रग विभाग और सिविल सर्जन से बात की जायेगी. बिना लाइसेंस वाले व सैंपल दवा बेचनेवालों पर कार्रवाई की जायेगी.
कौशल कुमार, डीएम
विभाग नहीं चलाता जागरूकता कार्यक्रम
जो भी खरीद का बिल होता है उसका एक माह बाद शेड्यूल एच-1 व नारकोटिक्स ड्रग नियम के आधार पर दवा का काम करना होता है़ इसका बिल मिलने के बाद हर बार माह के अंत में कंपनी द्वारा लेटर भेज कर रिसीविंग मांगी जाती है़ जिस कानून के तहत कंपनी कागज मांगती है, उससे कभी भी विभाग द्वारा अवगत नहीं कराया जाता है़ बगैर जागरूकता के ही विभाग के अफसर कानूनी कार्रवाई करने आ जाते है़ं
सुमित कुमार, सपना इंटरप्राइजेज
जीवनरक्षक दवाएं की जायें सस्ती
जीवनरक्षक दवाओं की कीमत कम नहीं किया जाना चिंतनीय है. इससे मरीजों को नुकसान हो रहा है़ जीवनरक्षक दवा पर दाम घटाने के बजाय उसका दाम बढ़ा दिया गया है़ दवा को जीएसटी से दूर रखना चाहिए. दवा में दाम बढ़ने से इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ता है़ ड्रग विभाग का भी अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने से दवा दुकानदार हर तरफ से प्रताड़ित हो रहे हैं. उनको इससे बचाना जरूरी है.
अनिल प्रसाद, दवा विक्रेता संघ के सचिव
जीएसटी के नाम पर किया जा रहा परेशान
सरकार के उदासीन रवैये से दवा के थोक विक्रेता परेशान हैं. ड्रग एक्ट के कानूनी पचड़े से हर वक्त परेशान रहते हैं. जीएसटी के नाम पर दुकानदारों को परेशान किया जा रहा है. इसके कारण एक नंबर का कारोबार करनेवालों का धंधा चौपट हो रहा है़ दवा दुकानदारों की समस्याओं को समझाते हुए अफसरों को उन्हें राहत देनी चाहिए़ उनकी दिक्कतों का हल ढूंढ़ने के लिए पहल करनी होगी.
मनोज कुमार, दवा कारोबारी
दुकान के बाहर में बोर्ड लगा कर उसमें पता, दुकान का नाम, केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट या ड्रग स्टोर लिखना तथा लाइसेंस नंबर के साथ-साथ प्रॉपराईटर का नाम जरूरी है़
दुकान में जरूरत के हिसाब से दुकान मालिक का मौजूद होना जरूरी है़
फार्मासिस्ट या योग्य व्यक्ति दुकान में हाजिर रहे़
दवा दुकान का फ्रीज चालू रहे़
क्रय- विक्रय व एच-1 रजिस्टर अपडेट होना चाहिए़
क्रय रजिस्टर में खरीदारी बिल अपडेट रखना जरूरी है़
जो दवा फ्रीज में होनी चहिए उसे उसी में रखी जाये, रैक या आलमारी में नहीं रखा जाये़
प्रतिबंधित दवा, सैंपल दवा, नकली दवा, एक्सपायर्ड दवा, नकली दवा, फंगल दवा तथा जो क्वालिटी में उन्नत नहीं हैं, वैसी दवाओं को नहीं बेचना है़
दवा दुकान में कोई भी मेडिकल प्रैक्टिशनर नशा करनेवाला नहीं हो़ बगैर बिल पर दवा की खरीद-बिक्री नहीं करनी है़
क्या कहते हैं दवा विक्रेता संघ के अध्यक्ष
विभाग की ओर से जागरूकता अभियान नहीं चलाया जाता है. जब संघ ने इस अभियान को चलाना शुरू किया, तब विभाग के अधिकारियों की नींद खुली. इससे साफ हो रहा है कि संघ के सक्रिय होने से विभागीय अधिकारी भी जागे हैं. दुकानदारों को जीएसटी की पूरी जानकारी नहीं है. विभाग भी इस पर ध्यान नहीं दे रहा है़ विभाग केवल अपने फायदा देखता है. प्रभात खबर के इस मुहिम से दवा दुकानदारों की समस्याओं का समाधान करने की कोशिश की जा रही है. फरवरी माह के अंत तक नये लाइसेंस के लिए ऑनलाइन आवेदन लेना है, लेकिन फार्मासिस्ट की समस्या पर विभाग खामोश है़
ब्रजेश राय, अध्यक्ष जिला दवा एसोसिएशन नवादा
जागरूकता अभियान के लिए नहीं है फंड
ड्रग एक्ट के लिए समय-समय पर होनेवाली बैठक में जानकारी दी जाती है़ लेकिन, अलग से जागरूकता अभियान के लिए विभाग के पास में फंड नहीं है़ इसकी जवाबदेही सिविल सर्जन की है़ ऑनलाइन आवेदन लेने के लिए 25 जिलाें के लिए ऑपरेटर नियुक्त किये गये है़ं इस सूची में नवादा का नाम नहीं है. नये लाइसेंस के लिये नये फार्मासिस्ट आयेंगे, तभी ऑनलाइन होगा़ इसकी व्यवस्था कारोबारी को ही करनी है़ प्रतिबंधित दवा बेचने के मामले में विभाग कार्रवाई कर रहा है. जिले में कोई भी बगैर लाइसेंस के दवा दुकान नहीं है़ यदि है, तो उसकी जांच की जायेगी.
संजीव कुमार, ड्रग इंस्पेक्टर, नवादा
रिटर्न भरने के लिए लगानी पड़ती है दौड़
जीएसटी भरने में परेशानी होती है. रिटर्न भरने के लिए दौड़ना पड़ता है़ दुकानदारी के समय विभाग का चक्कर लगाने में कारोबार चौपट हो जाता है. सरकार को दवा पर से जीएसटी हटा देना चाहिए था़ अधिकारी दवा दुकानदारों पर धौंस जमाते हैं.
अमित कुमार, थोक दवा विक्रेता
हर साल लाखों रुपये की दवा हो रही बर्बाद
जेनरिक दवा कंपनी एक्सपायर्ड व ब्रैकेज दवा नहीं लेती है़ इस बिंदु पर सरकार द्वारा कोई मदद नहीं मिलती है. इसके कारण प्रतिवर्ष लाखों की दवाएं बर्बाद हो जा रही है़ं दवा के कारण आर्थिक नुकसान और अफसर कब धावा बोल कर फंसा दे, इसका डर बना रहता है़
अनूप कुमार, दवा विक्रेता
दवा दुकान चलाना अब मुश्किल भरा हो गया है. चूंकि अब दूसरा कारोबार नहीं कर सकते, इसलिए इस कारोबार को अपनाना मजबूरी है़ कानूनी प्रक्रिया इतनी जटिल है कि अब कारोबार करना मुश्किल हो गया है़ हर काम के लिए विभाग का चक्कर लगाना पड़ता है़ इससे परेशानी होती है़ दुकानदारों को सहूलियत देने की पहल होनी चाहिए.
मनीष कुमार संतोष, मनीष मेडिको
फार्मासिस्ट के लिए हो वैकल्पिक व्यवस्था
जिले में खुदरा दवा दुकानदारों के लिए सबसे बड़ी समस्या ड्रग एक्ट में फार्मासिस्ट की है़ दवा दुकानदारों को इससे परेशानी हो रही है़ सरकार इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए. इससे खुदरा दुकानदारों को राहत मिलेगी.
अजीत कुमार, दवा कारोबारी
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