झोंपड़ी में भी बैठने को तरस रहे न्याय के पुजारी

Updated at : 06 Oct 2017 4:43 AM (IST)
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झोंपड़ी में भी बैठने को तरस रहे न्याय के पुजारी

नवादा : व्यवहार न्यायालय बने 17 साल बीत जाने के बाद भी वकीलों को अब तक बैठने की सुविधा तक नहीं दी गयी है़ लगातार संघर्ष के बाद भी यहां के वकील अब भी बैठने के लिए जगह ढूंढ़ते फिरते हैं़ इसके लिए लगातार 90 दिनों तक हड़ताल भी की गयी थी, पर कोई ठोस […]

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नवादा : व्यवहार न्यायालय बने 17 साल बीत जाने के बाद भी वकीलों को अब तक बैठने की सुविधा तक नहीं दी गयी है़ लगातार संघर्ष के बाद भी यहां के वकील अब भी बैठने के लिए जगह ढूंढ़ते फिरते हैं़ इसके लिए लगातार 90 दिनों तक हड़ताल भी की गयी थी, पर कोई ठोस परिणाम नहीं निकला़ गरमी व बरसात में तो काम करना और भी मुश्किल हो जाता है़ वर्ष 2000 में बनाये गये सिविल कोर्ट भवन में एक कैंटिन भी था, उसे भी पुलिस बैरक बना दिया गया है. हालांकि सुरक्षा की बात करें,

तो सिविल कोर्ट के गेट पर सीसीटीवी कैमरे लगाये गये गये हैं़ कोर्ट के गेट पर सुरक्षा प्रहरी भी तैनात कर दिया गया है. बताया जाता है कि बार एसोसिएशन के आंदोलन को लेकर राज्य सरकार ने कोर्ट के पीछे की भूमि को बतौर वार्षिक 85 हजार रुपये की लीज पर देने की बात कह कर पहली किस्त भी ले चुकी है़ बावजूद अब तक जमीन अधिग्रहण कर एसोसिएशन को नहीं दिया गया है. ऐसी परिस्थिति में तत्कालीन जिला जज गीता वर्मा की पहल पर डीएम के माध्यम से कोर्ट के दक्षिण में राज्य ट्रांसपोर्ट की भूमि को उपलब्ध कराने की मांग सरकार से की गयी है. लोक अदालत का भी भवन बनाया जायेगा. बताया जाता है

कि इसके लिये राज्य ट्रांसपोर्ट विभाग को लिखा जा चुका है. नवादा सिविल कोर्ट में प्रतिदिन 600 वकील काम कर रहे हैं़ बावजूद यहां सुविधाओं का घोर अभाव है. कोर्ट परिसर में बनाये गये कैंटिन को भी पुलिस बैरक बना दिया गया है. वकीलों ने बैठने के लिए जमीन की मांग को लेकर लगातार 90 दिनों तक हड़ताल भी की थी़ बावजूद सकारात्मक पहल नहीं हुई़ सार्वजनिक बाथरूम भी साफ-सफाई के अभाव में गंदा रहता है. वकीलों का कोर्ट में काम करना किसी तपस्या से कम नहीं है. उनको हर साल दो बार अपने स्थान की झोंपड़ी को चंदा कर बनाना पड़ता है. वहीं महिला वकील के लिए भी सुरक्षित बाथरूम तक नहीं है. अपने मुवक्किलों को बैठाने के लिए उन्हें सोचना पड़ता है. बताया जाता है कि सुप्रीम कोर्ट का निर्देश है कि सभी सिविल कोर्ट में बार एसोसिएशन का अपना भवन दिया जाये़ लेकिन, यहां ऐसी कोई सुविधा नहीं मिल रही है. इससे वकीलों व यहां आनेवाले लोगों को दिक्कत होती है़ हालांकि पड़ोस के जिला शेखपुरा में यह सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं. बावजूद यहां के लिए पहल नहीं हो रही है.

हक के लिए जारी रहेगा आंदोलन
बार एसोसिएशन ने अपने अधिकारों के लिए हर संभव संघर्ष किया है़ इसके अलावा वकीलों की सुविधाओं का ख्याल रखते हुए चार कर्मियों को पानी पिलाने के लिये रखा हुआ है़ दो सफाई कर्मियों को भी बहाल कर रखा है. वकीलों के बैठने के लिए एसोसिएशन की तरफ से कुर्सी व टेबुल भी दिये गये हैं. बावजूद अपने अधिकार के लिए संघर्ष कर बैठने के लिए जगह लेकर रहेंगे.
अजीत कुमार, महासचिव बार एसोसिएशन,नवादा
क्या कहते हैं नागरिक
जिस कोर्ट में वकीलों को सुविधाएं नहीं मिल रही हैं वहां भला आम नागरिकों को क्या मिलेगी. वकील साहब के पास आते हैं, तो खड़े-खड़े काम कराना पड़ता है. पेयजल की भी समस्या है. प्यास लगने पर इधर-उधर भटकना पड़ता है. आसपास के होटलों में जाने के बाद भी बिना कुछ खरीदेे वे लोग पानी नहीं देते. सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए.
त्रिवेणी सिंह,भवनपुर सदर प्रखंड
गर्मी और बरसात के दिनों में कोर्ट आने पर सिर छिपाना भी मुश्किल हो जाता है. यहां आम नागरिकों को कोई सुविधा नहीं है. वकील अपने खर्चे से क्लाइंट को सुविधा देते हैं. उनके पास पानी तक नसीब हो पाता है. कोर्ट आने पर लगता है दिन भर के लिए जेल आ गये हैं.यहां समय पार करना मुश्किल हो जाता है़ हाल यह है कि किसी केस के बारे में खुल कर बात भी नहीं कर सकते.
उपेंद्र सिंह, मकनपुर वारिसलीगंज
कोर्ट का अपना भवन, तो है, पर वकीलों को झोंपड़ी में रह कर गुजारा करना पड़ रहा है. महिला वकीलों के लिए सुरक्षित बाथरूम तक नहीं है. 17 सालों से संघर्ष करने के बाद भी कोई सुविधाएं नहीं दी गयी है़
निभा कुमारी, अधिवक्ता
एसोसिएशन के माध्यम से लगातार यहां के अधिवक्ता संघर्ष करते आ रहे हैं़ लेकिन, आज तक किसी अधिकारियों ने इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया. फलतः गर्मी हो या बरसात झोंपड़ी में ही गुजारा करना मजबूरी हो गयी है.
रामाश्रय प्रसाद सिंह, अधिवक्ता
आपस में चंदा कर बैठने के लिए झोंपड़ी बना कर काम कर रहे हैं. जो लोग आते हैं, उनको बैठाना मुश्किल हो जाता है. अधिकारी कोर्ट आते हैं, बावजूद इस पर ध्यान नहीं देते हैं. संघर्ष करने के बाद भी सुविधाओं को लेकर सकारात्मक पहल नहीं हुई़ इससे हर दिन दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.
चंद्रशेखर सिंह, अधिवक्ता
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