नरकटियागंज में दूर होगी बच्चों में कुपोषण की समस्या, एनआरसी की हुई शुरुआत, जाने कैसे उठाएं इसका लाभ

Updated at : 04 Sep 2022 5:04 AM (IST)
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नरकटियागंज में दूर होगी बच्चों में कुपोषण की समस्या, एनआरसी की हुई शुरुआत, जाने कैसे उठाएं इसका लाभ

नरकटियागंज स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र फिर से चालू हो गया है. अबतक यहां 40 बच्चों का इलाज सफलतापूर्वक हो चुका है. यहां 5 वर्ष तक के अति गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को भेजा जाएगा. सिविल सर्जन डॉ वीरेंद्र कुमार चौधरी ने निर्देश दिया है कि पोषण पुनर्वास केंद्र में ऐसे बच्चों को चिन्हित कर भेजा जाए.

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कोरोना काल में बंद किया गया नरकटियागंज स्थित पोषण पुनर्वास केंद्र फिर से चालू हो गया है. अबतक यहां 40 बच्चों का इलाज सफलतापूर्वक हो चुका है. अब फिर से जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, आंगनबाड़ी केन्द्रों तथा जिले में कार्यरत चलंत चिकित्सा दल (आरबीएसके) द्वारा पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी), नरकटियागंज में 5 वर्ष तक के अति गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को भेजा जाएगा. सिविल सर्जन डॉ वीरेंद्र कुमार चौधरी ने निर्देश दिया है कि पोषण पुनर्वास केंद्र में ऐसे बच्चों को चिन्हित कर भेजा जाए. जिससे इनकी अच्छी तरह से देखभाल एवं इलाज हो सके. सिविल सर्जन द्वारा आईसीडीएस के जिला प्रोग्राम पदाधिकारी तथा जीविका के जिला कार्यक्रम प्रबंधक से भी इस कार्यक्रम में सहयोग के लिए अनुरोध किया गया है.

पुनर्वास केंद्र का उद्देश्य मृत्यु दर को कम करना

डीपीएम सलीम जावेद ने बताया कि पोषण पुनर्वास केंद्र का उद्देश्य गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों की व्यापकता एवं मृत्यु दर को कम करना है. पोषण पुनर्वास केंद्र पर भर्ती कुपोषित बच्चे एवं उनके माता को साथ रखकर स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता तथा हाथ धोने की विधि के संबंध में प्रशिक्षित किया जाता है. पोषण पुनर्वास के नोडल पदाधिकारी सह डीपीसी अमित कुमार गुप्ता ने बताया कि इस केंद्र को कोरोना के बाद फिर से चालू कर दिया गया है. इसमें कोरोना काल के दौरान से अभी तक 40 बच्चों को भर्ती कराया गया था, जिसे अच्छी तरह से इलाज कर उन्हें वापस घर भेज दिया गया. पोषण पुनर्वास केंद्र पर कई तरह की चिकित्सीय जटिलता वाले, अति गंभीर कुपोषित बच्चों का उपचार तथा पोषण प्रबंधन किया जाता है.

इन बच्चों को कराया जाता है भर्ती

पोषण पुनर्वास केंद्र में हाइपोथर्मिया, दोनों पैरों में गड्ढे पड़ने वाली सूजन, लगातार उल्टी होना, बहुत कमजोर, उदासीन, बुखार आना, सांस तेज चलना/पसली का धंसना/साइनोसिस, त्वचा में विकार, आंखों की समस्या, एनीमिया आदि से ग्रसित बच्चों को भर्ती कराया जाता है. यहां बच्चों का मुफ्त में इलाज होता है.

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