न विभाग है सक्रिय और न संस्थानों में ही जागरूकता

Updated at : 01 Feb 2017 3:55 AM (IST)
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न विभाग है सक्रिय और न संस्थानों में ही जागरूकता

मनमानी . जिले में कोचिंग संस्थानों के रजिस्ट्रेशन को ले भारी सुस्ती 75 में से 6 कोचिंग संस्थानों का ही हुआ रजिस्ट्रेशन बिहारशरीफ : स्कूल कॉलेज के छात्र-छात्राओं को अलग से शिक्षा प्रदान करने के लिए जिला मुख्यालय बिहारशरीफ से लेकर प्रखंडों तक दर्जनों ट्यूशन तथा छोटे-बड़े कोचिंग संस्थान खुले हैं. इनके रजिस्ट्रेशन के लिए […]

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मनमानी . जिले में कोचिंग संस्थानों के रजिस्ट्रेशन को ले भारी सुस्ती

75 में से 6 कोचिंग संस्थानों का ही हुआ रजिस्ट्रेशन
बिहारशरीफ : स्कूल कॉलेज के छात्र-छात्राओं को अलग से शिक्षा प्रदान करने के लिए जिला मुख्यालय बिहारशरीफ से लेकर प्रखंडों तक दर्जनों ट्यूशन तथा छोटे-बड़े कोचिंग संस्थान खुले हैं. इनके रजिस्ट्रेशन के लिए न तो जिला शिक्षा कार्यालय द्वारा कोई बड़ी पहल की जा रही है और न तो कोचिंग संचालकों में इसके प्रति विशेष लगाव है.
इस संबंध में कई कोचिंग संचालकों का कहना है कि विभागीय उदासीनता के कारण ही जिले में संचालित लगभग 75 कोचिंग संस्थानों में से महज छह कोचिंग संस्थानों का ही रजिस्ट्रेशन हो सका है. बड़ी संख्या में कोचिंग तथा ट्यूशन सेंटर चलानेवालों को रजिस्ट्रेशन संबंधी नियम कानूनों की भी जानकारी नहीं है. उनका कहना है कि विभाग द्वारा उन्हें इस आशय की कोई जानकारी नहीं दी गयी है. सबसे अहम बात यह है कि विभाग द्वारा ट्यूशन व कोचिंग संस्थानों को रजिस्ट्रेशन के लिए कोई ईमानदार प्रयास नहीं किया गया है. कोचिंग संस्थानों का रजिस्ट्रेशन के प्रति उदासीनता के पीछे कई अन्य कारण भी हैं. इनमें प्रमुख कारण है कि कई कोचिंग व ट्यूशन सेंटर मात्र एक कमरे में संचालित किये जा रहे हैं. सरकार के कोचिंग एक्ट के तहत बुनियादी सुविधाओं की यहां भारी कमी है. बच्चे सड़कों तथा गलियों में ही अपनी साइकिल तथा बाइक खड़ी कर क्लास करते हैं. अधिकतर कोचिंग संस्थानों के पास साइकिल स्टैंड तक नहीं है. स्वच्छ व हवादार कमरे, बैठने की पर्याप्त सुविधा, शौचालय ताथ टॉयलेट आदि का सर्वत्र अभाव है.
जानकार बताते हैं कि ऐसे कोचिंग संस्थानों का रजिस्ट्रेशन होना भी संभव नहीं है. इस स्थिति में कोचिंग संचालक भी उदासीनपूर्ण रवैया अपनाते हैं. जिले में कई ऐसे भी कोचिंग संस्थान हैं, जहां विद्यार्थियों की संख्या काफी कम है. ऐसे संस्थान भी रजिस्ट्रेशन से दूर रहने में ही अपनी भलाई समझते हैं. यदि गौर से देखा जाये, तो मैट्रिक व इंटर परीक्षाओं के पूर्व ऐसे दर्जनों नये ट्यूशन कोचिंग संस्थान खुल जाते हैं तथा दूसरी ओर कई पुराने संस्थान बंद भी हो जाते हैं. ऐसे संस्थान भी स्थायी रूप नहीं ले पाने के कारण रजिस्ट्रेशन से दूर है.
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