पंजी में मरीजों का फोन नंबर जरूरी
Updated at : 20 Nov 2016 5:33 AM (IST)
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मुहिम. ओपीडी में आये मरीजों को टीबी से बचाव के बताये उपाय डीटीओ ने हिलसा अनुमंडलीय व थरथरी पीएचसी का निरीक्षण बिहारशरीफ : मरीज इलाज के दौरान किसी तरह से डिफॉल्टर नहीं हो पाये इस पर पूरी तरह से नजर रखने की जरूरत है. जब मरीजों पर गंभीरता पूर्वक निगरानी रखी जाएगी तो रोगी हरगिज […]
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मुहिम. ओपीडी में आये मरीजों को टीबी से बचाव के बताये उपाय
डीटीओ ने हिलसा अनुमंडलीय व थरथरी पीएचसी का निरीक्षण
बिहारशरीफ : मरीज इलाज के दौरान किसी तरह से डिफॉल्टर नहीं हो पाये इस पर पूरी तरह से नजर रखने की जरूरत है. जब मरीजों पर गंभीरता पूर्वक निगरानी रखी जाएगी तो रोगी हरगिज डिफॉल्टर नहीं हो पायेगा. टीबी के मरीज जब इलाज के लिए ओपीडी में आये तो उसका संपर्क नम्बर अर्थात मोबाइल नंबर रोगी देखने वाली पंजी में अंकित अवश्य करें. यह हिदायत जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ रविंद्र कुमार ने शनिवार को हिलसा अनुमंडलीय अस्पताल का जायजा लेने के दौरान ओपीडी में मरीजों का इलाज कर रहे चिकित्सा पदाधिकारी व उपाधीक्षक को दी.जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. कुमार इससे पहले अनुमंडलीय अस्पताल में संचालित डीएमसी का निरीक्षण किया.
इस दौरान डीएमसी में कार्यरत कर्मी को कई दिशा -निर्देश भी दिये. जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ कुमार ने हिलसा अनुमंडलीय अस्पताल के ओपीडी का भी निरीक्षण किया. इस दौरान ओपीडी में अपनी बीमारी का इलाज कराने पहुंचे मरीजों को टीबी बीमारी से बचाव व इसके लक्षण की जानकारी दी. यदि किसी व्यक्ति में दो सप्ताह या इससे अधिक समय से खांसी हो रही हो तो इसे हरगिज नजरअंदाज नहीं करें. साथ ही खांसी के दौरान बलगम के साथ ब्लड आये तो तुरंत निकट के अस्पताल में इसकी चिकित्सीय जांच अवश्य करायें. जिले के सभी अस्पतालों के डीएमसी पर बलगम जांच की सुविधा उपलब्ध है.
डीटीओ ने ओपीडी में इलाज कर रहे डॉक्टर व वहां पर मौजूद अस्पताल के उपाधीक्षक को भी निर्देश दिया कि इस तरह के यदि मरीज इलाज को आते हैं तो उसका बलगम जांच अवश्य करें. साथ ही, जांच रिपोर्ट में यदि पॉजिटिव रिजल्ट आने पर संबंधित मरीज का पंजीयन कर तुरंत चिकित्सा सेवा शुरू कर दी जाय. साथ मरीज या उसके परिजन का मोबाइल नंबर पंजी में अवश्य अंकित करें. ताकि जरूरत पड़ने पर मरीज से संपर्क किया जा सके. पंजी के अलावा डाटा ऑपरेटर मरीज का संपर्क नम्बर कम्प्यूटर में भी अवश्य लोड करें. इसका मुख्य उद्देश्य है कि इलाज के दौरान मरीज किसी तरह से डिफॉल्टर नहीं हो पाये.
लेप्रोसी से बचाव की भी दी जानकारी
हिलसा अनुमंडलीय अस्पताल के ओपीडी में इलाज के लिए मौजूद मरीजों को डॉ. कुमार ने लेप्रोसी बीमारी से बचाव व इसके लक्षण की जानकारी दी. साथ ही कहा कि अगर शरीर के किसी अंग या भाग में सुनापन या तांबे रंग का दाग उभरे दिखे तो इसका नजरअंदाज नहीं करें. इस लक्षण प्रतीत हो तो निकट के पीएचसी में जाकर इसकी चिकित्सीय जांच अवश्य करायें. डीटीओ डॉ. कुमार हिलसा अनुमंडलीय अस्पताल के बाद थरथरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र का भी निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी समेत अन्य चिकित्सक व कर्मी उपस्थित थे. उन्होंने अस्पताल में संचालित डीएमसी का भी जायजा लिया. इस दौरान टीबी के मरीजों को बेहतर इलाज के लिए बराबर तत्पर रहने को कहा. चिंहित मरीजों को अच्छी चिकित्सा सेवा प्रदान की जाय. समय पर मरीजों को जीवनरक्षक दवा उपलब्ध करायी जाय.थरथरी अस्पताल के डॉक्टर व कर्मियों को हिदायत दी कि टीबी के मरीजों व उसके परिजनों का संपर्क नम्बर अवश्य अंकित करें.
साथ ही टीबी के गंभीर मरीजों के बलगम जांच को जिला यक्ष्मा केन्द्र में भेजें. यहां पर इसकी बेहतर जांच के लिए आधुनिक किस्म की सीबीनैट मशीन लगी है. यह मशीन टीबी के सूक्ष्म जीवाणुओं को आसानी रूप से पकड़ लेती है.्
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