दीक्षांत समारोह. देश-विदेश के 324 छात्र-छात्राओं को मिलीं डिग्रियां

Updated at : 17 Feb 2016 4:03 AM (IST)
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दीक्षांत समारोह. देश-विदेश के 324 छात्र-छात्राओं को मिलीं डिग्रियां

लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखें छात्र छात्र अपनी ऊर्जा का उपयोग पूरी दुनिया को बेहतर बनाने में करें बौद्ध धर्म संसार का आगामी धर्म होगा : रामनाथ कोबिंद योग व विपश्यना के प्रसार में नव नालंदा महाविहार का अहम रोल : महेश शर्मा बिहारशरीफ : डीम्ड यूनिवर्सिटी नव नालंदा महाविहार में मंगलवार को तीसरा दीक्षांत […]

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लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखें छात्र

छात्र अपनी ऊर्जा का उपयोग पूरी दुनिया को बेहतर बनाने में करें
बौद्ध धर्म संसार का आगामी धर्म होगा : रामनाथ कोबिंद
योग व विपश्यना के प्रसार में नव नालंदा महाविहार का अहम रोल : महेश शर्मा
बिहारशरीफ : डीम्ड यूनिवर्सिटी नव नालंदा महाविहार में मंगलवार को तीसरा दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया. महाविहार परिसर में आयोजित इस समारोह को संबोधित करते हुए नव नालंदा महाविहार सोसाइटी के अध्यक्ष सह बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोबिंद ने कहा कि उन सभी छात्रों को, जिन्होंने कठिन परिश्रम करके यह डिग्री हासिल की है,
उन्हें शुभकामनाएं देता हूं. अपने बच्चों को डिग्री लेते देखने के लिए आनेवाले अभिभावकों व महाविहार शिक्षकों को भी बधाई देता हूं, जिनके अथक प्रयास से आज ये छात्र इस मुकाम तक पहुंचे हैं. उन्होंने कहा कि नव नालंदा महाविहार की स्थापना 1951 में तत्कालीन राष्ट्रपति डाॅ राजेंद्र प्रसाद की प्रेरणा एवं प्रथम निदेशक बौद्ध भिक्षु जगदीश कश्यप के प्रयास से हुई थी.
मानव संसाधन विकास मंत्रालय भारत सरकार ने 1994 में नव नालंदा महाविहार का अधिग्रहण कर लिया. 2006 में यूजीसी की सिफारिश पर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने नव नालंदा महाविहार को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया. उन्होंने प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में उनका विशेष महत्व था. जिस पश्चिम के श्रेष्ठ विश्वविद्यालय कभी हासिल नहीं कर सके. नालंदा विश्वविद्यालय में जो पढ़ाया जाता था, उसका जीवन में प्रयोग होता था.
सिद्धांत और व्यवहार में तारतम्य होता था, जो आज की शिक्षा प्रणाली में कहीं नहीं दिखता है. इस विश्वविद्यालय में दो तरह के शिक्षक होते थे, उपाध्याय और आचार्य. उपाध्याय नैतिक शिक्षा प्रदान करते थे, जबकि आचार्य शैक्षणिक व आध्यात्मिक शिक्षा देते थे. नव नालंदा महाविद्यालय द्वारा चलाये जा रहे कोर्स का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह एक अच्छा प्रयास है. इसके साथ ही महाविहार को प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय की तर्ज पर समग्र शिक्षा पर आधारित पाठ्यक्रम तैयार किया जाना चाहिए, जिसे आज इंटर डिशिपिलनरी स्टडीज कहा जाता है.
छात्रों की ओर से इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय से उत्तीर्ण होकर अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा कर लिया है. इसके बाद आपके जीवन में दूसरे चरण की शुरुआत हो गयी है. जो मूल्य परक शिक्षा आपने ग्रहण की है, उसकी बदौलत आप जीवन में आत्मविश्वास व समस्याओं का समाधान कर सकेंगे. उन्होंने कहा कि विनम्रता एक सद्गुण है, जिसका स्वयं में विकास करें. यह जीवन की मुश्किलों से उबरने में काम आयेगा. विपश्यना कोर्स इसमें आपकी सहायता कर सकता है.
उन्होंने छात्रों से अपनी ऊर्जा का उपयोग भारत और पूरी दुनिया को बेहतर बनाने में करने की अपील की. जीवन में सफलता के साथ ही असफलता भी आती रहती है. मगर इन असफलताओं से आप निराश नहीं होंगे. असफलताएं सफलता की सीढ़ी है. जीवन में आगे बढ़ने में बाधाएं हमें और मजबूत व सक्षम बनाती हैं.
महाविहार परिवार बधाई के पात्र : नव नालंदा महाविहार के डायरेक्टर डाॅ रवींद्र पंत ने विशिष्ट अतिथियों का स्वागत करते हुए दीक्षांत समारोह को सफल बनाने में छात्र-छात्राओं, अध्यापकों व अभिभावकों के सहयोग की सराहना की. समारोह को भारत सरकार के ज्वाइंट सेक्रेटरी संजीव मित्तल ने भी संबोधित किया.
दीक्षांत समारोह का संचालन डाॉ राणा पुरुषोत्तम कुमार सिंह ने किया. राज्यपाल रामनाथ कोबिंद व केंद्रीय मंत्री डाॅ महेश शर्मा ने विभिन्न विषयों में पीएचडी की उपाधि पानेवाले छात्र-छात्राओं को प्रमाणपत्र दिये. मौके पर 324 छात्र-छात्राओं के बीच प्रमाणपत्र का वितरण किया गया. मौके पर महाविहार के रजिस्ट्रार एसपी सिन्हा, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष व छात्र छात्राएं मौजूद थे.
नहीं हो सका इंटरनेशनल हॉस्टल और संकाय भवन का उद्घाटन : राज्यपाल रामनाथ कोविंद और केंद्रीय संस्कृति, पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन मंत्री डॉ महेश शर्मा के हाथों महाविहार परिसर में बने शांतिरक्षित इंटरनेशनल हॉस्टल और नागार्जुन संकाय भवन का उद्घाटन होना था, लेकिन कतिपय कारणों से नहीं हो सका. शांतिरक्षित इंटरनेशनल हॉस्टल के निर्माण में 6 करोड़ 37 लाख 81 हजार रुपये खर्च हुए हैं. इस तीन मंजिले हॉस्टल में 69 कमरे और 100 बेड हैं.
इसी प्रकार नागार्जुन संकाय भवन के निर्माण पर 4 करोड़ 96 लाख 36 हजार रुपये व्यय हुए हैं. यह भी तीन मंजिला भवन है, जिसमें 53 कमरे हैं. सभी विभागों के लिए अलग-अलग फैकल्टी रूम, क्लास रूम के अलावा कंप्यूटर लैब का निर्माण कराया गया है, जिसमें 25 कंप्यूटर सेट लगे हैं. इसके अलावा इस भवन में दो काॅन्फ्रेंस हॉल भी है.
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